उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव का दूसरा चरण काफी अहम है।‘मनी’ और ‘मसल पॉवर’ वाला यह क्षेत्र जातीय समीकरण के लिए भी जाना जाता है। यहां 11 फरवरी को पूर्वाचल के नौ जिलों के एक करोड़ से अधिक मतदाता करीब ग्यारह सौ उम्मीदवारों के भाग्य का फैसला करेंगे। बसपा के हाथी को पिछली बार यहां की जनता ने खूब पुचकारा था। नतीजतन बसपा के खाते में करीब आधी सीटों पर जीत दर्ज हुई। समाजवादी पार्टी यहां दूसरे और भारतीय जनता पार्टी अपने गठबंधन के साथी जनता दल यू के साथ तीसरे स्थान पर रही थी। राहुल गांधी इस बार पूर्वांचल से काफी उम्मीद लगाए बैठे हैं, लेकिन 2007 के चुनाव में पूर्वांचल कांग्रेस के लिए बुरे सपने जैसा रहा था। दूसरे चरण में जिन नौ जिलों की 59 सीटों पर मतदान होना है उसमें अधिकतर क्षेत्रों में ब्राह्मण मतदाताओं का दबदबा है। पिछड़ों तथा अनुसूचित जातियों का भी यह गढ़ माना जाता है। यही वजह है कि 2007 में बसपा का दलित-ब्राह्मण कार्ड ने यहां खूब चला।
दलित वोट बैंक के साथ ही ब्राह्मण मतदाताओं के रूझान ने बसपा सरकार बनाने का मार्ग प्रशस्त किया था। इसके पूर्व यह इलाका सपा का गढ़ रहा था। अबकी यहां कांग्रेस, बसपा, सपा और भाजपा की नींद उड़ाने के लिए पीस पार्टी का खतरा सभी दलों पर मंडरा रहा है। यह योगी आदित्यनाथ का गढ़ माना जाता है। भाजपा को योगी आदित्यनाथ की नाराजगी से कितना नुकसान होता है, यह भी देखने वाली बात होगी। सपा से बगावत करके बाहर निकले अमर सिंह को भी इस इलाके से काफी उम्मीद है। उनका राष्ट्रीय लोकमंच अगर इस इलाके में अपनी पैठ नहीं बना पाया तो अमर के लिए आगे की राह आसान नहीं होगी। वह काफी समय से पूर्वांचल राज्य बनाने की मांग करके जनता के बीच अपनी पैठ बनाने में लगे हैं। दूसरे चरण में भी दागी और करोड़पति उम्मीदवारों का दबदबा देखने को मिलेगा। जहां करोड़पति उम्मीदवारों की संख्या 235 है, वहीं 118 दागी प्रत्याशी पूर्वांचल में अपनी किस्मत अजमा रहे हैं। दूसरे चरण में प्रमुख रूप से करीब डेढ़ दर्जन महिला उम्मीदवारों के भी भाग्य का फैसला होगा।
दूसरे चरण में जिन दिग्गत नेताओं के भाग्य का फैसला होना है उसमें भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सूर्य प्रताप शाही, विधान सभा अध्यक्ष सुखदेव राजभर, बसपा के प्रदेश अध्यक्ष स्वामी प्रसाद मौर्या, भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रमापति शास्त्री, पीस पार्टी के अध्यक्ष डा. अय्यूब, पूर्व मुख्यमंत्री वीर बहादुर सिंह के पुत्र तथा हाल ही में बसपा से निष्कासित पूर्व वन मंत्री फतेह बहादुर सिंह, बसपा सरकार के राजस्व मंत्री फागू चौहान, सपा विधानमंडल दल के उपनेता अम्बिका चौधरी, कांग्रेस के पूर्व मंत्री बच्चा पाठक, सपा के प्रदेश महामंत्री ओम प्रकाश सिंह, सपा के ही ब्रहमाशंकर त्रिपाठी, बसपा से निकाले गए राजेश त्रिपाठी, पूर्व मंत्री शाकिर अली, कांग्रेस के पूर्व प्रवक्ता अखिलेश प्रताप सिंह तथा एनआरएचएम घोटाले में चर्चित रहे बसपा विधायक राम प्रकाश जायसवाल की पत्नी रेनू जायसवाल, देवरिया में कांग्रेस के जेपी जायसवाल के अलावा बाहुबली उम्मीदवारों में आजमगढ़ से दुर्गा यादव, मऊ से मुख्तार अंसारी, गाजीपुर से शिबगतुल्ला अंसारी, देवरिया से प्रेम प्रकाश सिंह, चिल्लूपार से हरिशंकर तिवारी आदि शामिल हैं। पूर्वांचल में कई उम्मीवार ऐसे हैं जो चुनाव तो यहां से गरीब-गुरबों की बात करके लड़ते और जीतते हैं, लेकिन इन लोगों ने अपनी सम्पति और साम्राज्य दिल्ली, नोयडा, गुड़गांव, देहरादून, हल्द्वानी और महाराष्ट्र तक में फैला रखा है।
सोलहवीं विधानसभा के लिए दूसरे चरण के चुनाव में 9 जिलों महाराजगंज, गोरखपुर, कुशीनगर, संत कबीर नगर, देवरिया, आजमगढ़, मऊ, बलिया और गाजीपुर की 59 सीटों पर चुनाव होने है। पिछले चुनाव में इन जिलों में 61 सीटें थीं, जिसमें लगभग आधी यानी 29 सीटों पर बसपा, 19 सीटों पर सपा और 8 सीटों पर भाजपा तथा 2 सीटों पर उसका सहयोगी जदयू तथा 2 सीटों पर ही कांग्रेस को विजय मिली थी। नये परिसीमन में इस क्षेत्र की 2 विधानसभा सीटें कम हो गयी हैं। दूसरे चरण के चुनाव में अन्य के अलावा बाढ़ भी बडा मुद्दा है। सभी नौ जिलों का ज्यादातर इलाका प्रतिवर्ष विभिन्न नदियों की बाढ़ में चपेट में आ जाता है। यहां का अन्नादाता किसान भी अपनी दुर्दशा से दुखी है। गन्ना तथा अन्य कृषि उत्पादों का समुचित मूल्य न मिलना और कृषि विकास की कोई कार्य योजना न होने से यहां का अन्नादाता हमेशा परेशान रहता है। रोजी-रोटी की तलाश में इस इलाके के लोग बड़ी संख्या में दिल्ली, मुम्बई आदि महानगरों की तरफ पलायन करने को मजबूर होते हैं। वैसे तो इन लोगों की कोई सुध नहीं लेता लेकिन चुनाव की आहट होते ही इन लोगों को पैसे के बल पर वोट डालने के लिए बुलाने में विभिन्न दलों के नेता पीछे नहीं रहते हैं। दूरदराज कामधंधे में लगे लोगों का ट्रेनों में आरक्षण काफी पहले करा दिया गया है। सबके घर वालों को हफ्ते से लेकर पन्द्रह दिन तक की दिहाड़ी पेशगी दे दी गई है।
बहरहाल, तमाम परेशानियों के बाद भी हार नहीं मानने वाले पूर्वांचल के किसानों ने अपने इलाके का नाम कभी डूबने नहीं दिया। यही वजह है पूर्वांचल की गिनती देश के उपजाऊ क्षेत्रों में होती है। किसानों को न समय पर खाद मिलती है और न, बीज। बिजली तथा सिंचाई जैसी मूलभूत सुविधाएं भी उसे मुहैया नहीं हो पाती हैं। पहले चरण की तरह दूसरे चरण में भी बसपा सपा में ही संघर्ष होने के आसार हैं। वैसे कुछ स्थानों पर भाजपा व कांग्रेस के कारण लड़ाई चतुष्कोणीय होने की संभावना है। परन्तु पीस पार्टी, जद यू तथा अन्य कुछ जातीय व क्षेत्रीय समीकरण की पार्टियों के कारण चुनावी समीकरण बदलने की स्थिति पैदा हो सकती हैं। दूसरे चरण में आदित्य योगी नाथ और माफिया डॉन मुख्तार अंसारी के दबदबे वाली गोरखपुर-बस्ती मंडल की 31 सीटें शामिल हैं। पूर्वांचल का चुनावी इतिहास काफी कुछ कहता है। इस क्षेत्र की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां के परिणामों के आधार पर ही कहा जाता रहा है कि जो पूर्वांचल जीतता है, यूपी की सत्ता उसी की होती है।
पूर्वांलच का उक्त इलाका बीते कई सालों से जानलेवा इंसेफलाइटिस और बाढ़ की विभीषिका के कारण राष्ट्रीय स्तर पर चर्चित रहा है। भूख व कुपोषण से हुई मौतों ने इस इलाके का नाम काफी बदनाम किया। बात उद्योग-धंधों की करी जाए तो कभी पूरे उत्तर भारत में चीनी का कटोरा कहा जानेवाला यह इलाका चीनी मिलों की बंदी, गन्ना किसानों की बदहाली और बुनकरों की आर्थिक दुर्दशा से लिए भी जाना जाता है। विकास के मामले में यूपी के सबसे पिछड़े क्षेत्रों में शामिल यह इलाका इस चुनाव में भी इस उम्मीद के साथ मैदान में है कि जाति धर्म को परे कर राजनीतिक दल इस बार विकास को प्रमुख मुद्दा बनाएंगे और चुनाव बाद इस दर्द की दवा भी करेंगे।
इस क्षेत्र से सांसद रमाकान्त यादव के बेटे के चुनाव मैदान में होने के कारण इनकी प्रतिष्ठा दांव पर हैं । दूसरे चरण में पार्टियों ने युवाओं व महिलाओं पर भी खासा भरोसा जताया हैं प्रमुख दलों से दर्जन भर से अधिक युवा व तकरीबन इतनी ही महिला प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं। बात दागियों की करी जाए तो विधानसभा चुनाव के पहले चरण में जहां 109 दागी प्रत्याशी ताल ठोक रहे थे, वहीं दूसरे चरण में भी इनकी संख्या 118 तक पहुंच गई हैं। एडीआर की रिपोर्ट के मुताबिक सभी प्रमुख पार्टियों ने दागी उम्मीदवारों को मैदान में उतारा है। निर्वाचन क्षेत्र मऊ और घोसी के कौमी एकता दल के उम्मीदवार मुख्तार अंसारी पर सर्वाधिक 15 मुकदमें हैं जिनमें नौ गंभीर अपराध वाले हैं।
उप्र इलेक्शन वाच व एडीआर ने दूसरे चरण में चुनाव लड़ रहे 1098 प्रत्याशियों के हलफनामों का विश्लेषण किया। इनमें 387 प्रत्याशियों में से 18 (35 फीसदी) ने अपने विरूद्ध आपराधिक मामलों की पुष्टि की। पिछले विधानसभा चुनाव में दागी उम्मीदवार सिर्फ 28 फीसदी थे। एडीआर के रिपोर्ट के मुताबिक सभी प्रमुख पार्टियों ने आपराधिक छवि वाले उम्मीदवारों को टिकट देकर मैदान में उतारा है। इन प्रत्याशियों में से 55 ऐसे हैं जिनके खिलाफ गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं। हत्या जबरन, धन उगाही,चोरी, रिश्वत व हत्या का प्रयास के मामले में भाजपा के नौ, बसपा के दस, सपा के 12, पीस पार्टी के तीन, कांग्रेस के दस, जनतादल (यू) के सात, कौमी एकता दल के दो व अपना दल के एक उम्मीदवार के खिलाफ मुकदमा चल रहा है। कवयित्री मधुमिता हत्याकांड में सजा काट रहे पूर्व मंत्री और दंबग नेता अमरमणि त्रिपाठी का पुत्र अमनमणि त्रिपाठी समाजवादी पार्टी से उम्मीदवार है।
गंभीर आपराधिक मामलों में फंसे विभिन्न दलों के प्रत्याशियों संख्या
पार्टी उम्मीदवार दागी
बसपा 59 23
कांग्रेस 59 19
सपा 59 30
बीजेपी 55 20
जेडीयू 50 12
पीस पार्टी 35 08
कौमी एद. 14 04
अपना दल 04 01
आईएनडी 01 01
टॉप टैन दागी प्रत्याशी
प्रत्याशी मुकदमे
मुख्तार अंसारी 15
उपेन्द्र 11
जावेद इकबाल 05
प्रदीप 12
उत्पल राय 09
यशपाल सिंह रावत 09
राम इकबाल 03
अरुण कुमार सिंह 07
उमाशंकर 04
लखनऊ से वरिष्ठ पत्रकार अजय कुमार की रिपोर्ट. अजय ‘माया’ मैग्जीन के ब्यूरो प्रमुख रह चुके हैं. वर्तमान में ‘चौथी दुनिया’ और ‘प्रभा साक्षी’ से संबद्ध हैं.






