Connect with us

Hi, what are you looking for?

No. 1 Indian Media News PortalNo. 1 Indian Media News Portal
Local News Community

प्रिंट-टीवी...

‘दृश्यांतर’ मैग्जीन के विमोचन में बोले नामवर सिंह- ‘ये अजित राय तो संपादकीय लिखने लगा’

प्रोफेसर नामवर सिंह ने अध्यक्षता की. आयोजन दूरदर्शन भवन (मंडी हाउस के पास) में छठें फ्लोर स्थित कांफ्रेस रूम में हुआ था. मीडिया और साहित्य से चुनिंदा लोग बुलाए गए थे. मंच पर नामवर सिंह के अलावा राजेंद्र यादव, त्रिपुरारी शरण और खुद अजित राय बैठे थे. 'दृश्यांतर' मैग्जीन के संपादक हैं अजित राय. ये मैग्जीन सरकारी यानि दूरदर्शन यानि प्रसार भारती के पैसे से लांच की गई है.

प्रोफेसर नामवर सिंह ने अध्यक्षता की. आयोजन दूरदर्शन भवन (मंडी हाउस के पास) में छठें फ्लोर स्थित कांफ्रेस रूम में हुआ था. मीडिया और साहित्य से चुनिंदा लोग बुलाए गए थे. मंच पर नामवर सिंह के अलावा राजेंद्र यादव, त्रिपुरारी शरण और खुद अजित राय बैठे थे. 'दृश्यांतर' मैग्जीन के संपादक हैं अजित राय. ये मैग्जीन सरकारी यानि दूरदर्शन यानि प्रसार भारती के पैसे से लांच की गई है.

मतलब ये कि प्रसार भारती ने इस मैग्जीन के जरिए प्रिंट में भी पांव रख दिया है. अजित राय को ये ऐतिहासिक जिम्मेदारी मिली कि वो सरकारी मैग्जीन निकालें और इसे ऐसा निकालें कि वह असरकारी हो और गैर-सरकारी मैग्जीनों पर भी भारी हो. छह-सात महीने पहले काम शुरू किया गया. 'दृश्यांतर' नाम तय हुआ. मैग्जीन बाजार में जब आ गई और लोगों ने पढ़ लिया, तब इसका विमोचन समारोह रखा गया ताकि ठीक से फीडबैक मिल सके. सबसे आखिर में बोले नामवर सिंह, क्योंकि वो अध्यक्षता कर रहे थे.

अजित राय के बारे में बोलने लगे. ''मुझे तो कभी लगा ही नहीं कि अजित राय मिलने जुलने के अलावा कोई रुक कर बड़ा काम करेगा… लेकिन इसने तो ऐसी मैग्जीन निकाली की क्या कहने… और, ये अजित राय तो संपादकीय लिखने लगा.. इसने संपादकीय लिखा है 'दृश्यांतर' में… बस देखना कि ये 'दृश्यांतर' अवांतर न हो जाए…''. नामवर सिंह ने यह कहते हुए बात शुरू की कि यहां पर जितने भी वक्ता आए, सब इस मैग्जीन के पहले अंक में छपे हुए हैं.. एक मैं ही हूं जो बाहरी हूं…

नामवर सिंह को अजित राय ने याद दिलाया कि आपके विदेश प्रवास के संस्मरणों की मांग की गई थी… अब अगले अंक के लिए आप दे दीजिए… तब नामवर ने अपने अंदाज में वक्तव्य दिया… ''लिखने से हाथ कट जाता है, बोलने से मुंह नहीं कटता''

नामवर सिंह ने मैग्जीन की तारीफ में ऐसे पुल बांधे कि वहां मौजूद लोग हक्के बक्के रह गए. उन्होंने कहा कि आजादी के बाद से लेकर आज तक के दिन तक ऐसी मैग्जीन नहीं प्रकाशित हुई. कार्यक्रम समापन के बाद कुछ लोग आपस में बतियाते मिले कि ये नामवरजी को क्या हो गया है, जहां भी मंच संभालते हैं, वहां उस आयोजन को लेकर ऐसी तारीफ के पुल बांधते हैं जैसे भूतो न भविष्यति… मतलब अतिरेक पर जाकर क्यों बातें करते हैं ये…

आयोजन के जरिए पता चला कि मैग्जीन के पीछे असली दिमाग यानि मास्टरमाइंड दूरदर्शन वाले त्रिपुरारी शरण हैं. अजित राय संचालन कर रहे थे और बार-बार ये बता रहे थे कि त्रिपुरारी शरण जी ने एक बार भी नहीं टोका कि क्या नहीं छापना है और क्या छापना है. त्रिपुरारी शरण ने अपने संबोधन में लोगों को भरोसा बंधाया कि ये मैग्जीन न सिर्फ पूरे तेवर में रहेगी बल्कि मील का पत्थर बनेगी.

राजेंद्र यादव ने संतुलित वक्तव्य दिया. अलग-अलग धारा, विधा, तेवर की मैग्जीनों के योगदान का उल्लेख करते हुए 'दृश्यांतर' के विशिष्ट होने के बारे में भी बताया.

इस आयोजन के बारे में संजीव सिन्हा ने दो बातें अपने एफबी वॉल पर प्रकाशित की हैं, जो यूं हैं…

संजीव सिन्हा : गत 15 सालों में विभिन्‍न कार्यक्रमों के दौरान आलोचक डॉ. नामवर सिंह को बीस-पच्‍चीस बार तो सुन ही चुका होऊंगा। लेकिन हर बार वो अतिरेकी वक्‍तव्‍य दे डालते हैं। आज 'दूरदर्शन महानिदेशालय' द्वारा प्रकाशित 'दृश्‍यांतर' पत्रिका के लोकार्पण अवसर पर इस पत्रिका के बारे में भी उन्‍होंने ऐसा ही कुछ कह डाला, ''आजादी के बाद से इस स्‍तर की कोई पत्रिका नहीं निकली। यह 'हंस' और 'आलोचना' से भी अच्‍छी है।''

xxx

उफ्फ! राजेंद्र यादव का कविता के प्रति इतना पूर्वाग्रह… आज 'दृश्‍यांतर' पत्रिका के लोकार्पण के अवसर पर 'हंस' के संपादक श्री राजेंन्‍द्र यादव ने फिर कविता-विरोधी वक्‍तव्‍य दे डाला। कहा, ''कविता वर्तमान से अतीत की ओर ले जाती है (यानी अतीतजीवी होती है) जबकि कथा-कहानी अतीत से वर्तमान की तरफ लाती है।'' (नोट : चित्र में जो अतिथि बैठे-बैठे पत्रिका का लोकार्पण कर रहे हैं वे हैं श्री राजेंद्र यादव)


अब बात करते हैं मैग्जीन के कंटेंट आदि के बारे में.. 96 पन्ने की यह मैग्जीन मासिक है और इसका दाम 25 रुपये है. इसमें प्रकाशित ज्यादातर कंटेंट लिखवाया गया है और एक्सक्लूसिव व मौलिक है, यानि कहीं प्रकाशित नहीं है और न ही कहीं से कापी-पेस्ट.

पहले अंक में श्याम बेनेगल से त्रिपुरारी शरण की बातचीत है. इस इंटरव्यू के बारे में नामवर ने कहा कि इसे पढ़कर इंटरव्यू लेने का सलीका सीख सकते हैं. सिनेमा पर डा. चंद्र प्रकाश द्विवेदी ने लिखा है. देवेंद्र राज अंकुर ने रामगोपाल बजाज पर संस्मरण लिखा है. इस संस्मरण की जबर्दस्त चर्चा आयोजन में रही.

मंजीत ठाकुर की रिपोर्ताज है, बुंदेलखंड पर. विश्वनाथ प्रसाद तिवारी की डायरी है. स्मृति आख्यान में शिवमूर्ति ने लिखा है. दो उपन्यास अंश प्रकाशित किए गए हैं जिसमें पहला विनोद भारद्वाज का है, 'लाइफ इज ब्यूटीफुल', और दूसरा तेजेंद्र शर्मा का, 'विल्जडन जंक्शन'. असगर वजाहत ने इस मैग्जीन के लिए एक नया नाटक लिखा, जिसका प्रकाशन हुआ  है, 'पाकिटमार रंगमंडल' नाम से.  सामयिकी स्तंभ में सत्येंद्र प्रकाश और उमेश चतुर्वेदी के लेख हैं.

कुल मिलाकर न सिर्फ कम दाम में बेहतरीन कंटेंट वाली पत्रिका है, बल्कि यह संभावना भी जगाती है (त्रिपुरारी शरण के वक्तव्य के बाद यह धारणा और मजबूत हुई) कि इस मैग्जीन से हिंदी जगत को वो नए और बेहतरीन लिखने वाले मिलेंगे जो अच्छे प्लेटफार्म न होने या बेहतर की तलाश न किए जाने के कारण कहीं दूर सकुचाए, उपेक्षित पड़े हैं.

अगर आप यह मैग्जीन मंगाना देखना पढ़ना जुड़ना चाहते हैं तो इसके लिए नीचे दिए गए फोन नंबर या मेल आईडी या पोस्टल एड्रेस के माध्यम से मैग्जीन के संपादक अजित राय से संपर्क कर सकते हैं…

011-23097513

[email protected]

दूरदर्शन महानिदेशालय, कमरा नंबर 1026, बी विंग, कोपरनिकस मार्ग, नई दिल्ली-110001


रिपोर्ट: यशवंत सिंह (एडिटर, भड़ास4मीडिया डॉट कॉम). संपर्क: [email protected]

CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

… अपनी भड़ास [email protected] पर मेल करें … भड़ास को चंदा देकर इसके संचालन में मदद करने के लिए यहां पढ़ें-  Donate Bhadasमोबाइल पर भड़ासी खबरें पाने के लिए प्ले स्टोर से Telegram एप्प इंस्टाल करने के बाद यहां क्लिक करें : https://t.me/BhadasMedia 

Advertisement

You May Also Like

विविध

Arvind Kumar Singh : सुल्ताना डाकू…बीती सदी के शुरूआती सालों का देश का सबसे खतरनाक डाकू, जिससे अंग्रेजी सरकार हिल गयी थी…

विविध

: काशी की नामचीन डाक्टर की दिल दहला देने वाली शैतानी करतूत : पिछले दिनों 17 जून की शाम टीवी चैनल IBN7 पर सिटिजन...

विविध

पहली बार चुनाव हमने 1967 में देखा था. तेरह साल की उम्र में. और अब पहली बार ऐसा चुनाव देख रहे हैं, जो इससे...

विविध

राजस्थान, कांग्रेस और सेक्स. ये तीन शब्द लगता है आपस में अच्छे से घुल मिल गए हैं. भंवरी कांड में ये तीनों शब्द जुड़े...