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देख लो, मीडिया में मीडिया वालों की भी बनती हैं खबरें

राजनेताओं व आम लोगों में एक धारणा थी कि मीडिया वाले खुद अपनी खबरों को नहीं दिखाते, लेकिन तहलका मसले पर लगातार न्यूज चैनलों पर उससे जुड़ी खबरों को दिखाकर यह साबित कर दिया है कि खबर किसी की भी बन सकती है। चुनावी मौसम में तहलका प्रकरण पर महाकवरेज करके मीडिया ने लोगों में अपनी गिरती इमेज को बरकरार रखा है।

राजनेताओं व आम लोगों में एक धारणा थी कि मीडिया वाले खुद अपनी खबरों को नहीं दिखाते, लेकिन तहलका मसले पर लगातार न्यूज चैनलों पर उससे जुड़ी खबरों को दिखाकर यह साबित कर दिया है कि खबर किसी की भी बन सकती है। चुनावी मौसम में तहलका प्रकरण पर महाकवरेज करके मीडिया ने लोगों में अपनी गिरती इमेज को बरकरार रखा है।

29 व 30 नवंबर को देश के सभी चैनलों पर सिर्फ तहलका प्रकरण की ही खबरें दिखाई गई। अगर पक्षपात वाली बात होती तो आज मीडिया इस खबर को हजम कर सकता था। तरुन तेजपाल मीडिया के हस्ताक्षर हैं, जो उनको करीब से जानते-समझते हैं और अब तक दोस्त कहते थे, वह भी उनके खिलाफ बोल रहे हैं, कि तेजपाल ने बहुत गलत किया।

आसाराम के मुद्दे पर लोगों ने मीडिया को कटघरे में खड़ा कर दिया था और उसे मीडिया ट्रायल की संज्ञा दे डाली थी। दुनिया को पता है कि तहलका ने सरकारी तंत्र में फैली करप्शन नाम के दीमक को खत्म करने की सबसे पहले पहल की थी, उन्होंने अपनी खबरों से कई धमाके किए थे। पर आज उनके प्रति मीडिया में तनिक भी रहम नहीं है। उनकी सारी कलई मीडिया एक-एक करके खोल रहा है।

युवा मीडिया समीक्षक रमेश ठाकुर का विश्लेषण.

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