देवरिया । उत्तर प्रदेश के खेल मंत्री कामेश्वर उपाध्याय तथा समाजवादी के पूर्व सांसद हरि केवल प्रसाद की मृत्यु पर जिले में बुधवार को शोक संवेदना व्यक्त करने आए मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के आगमन पर जिला प्रशासन द्वारा पत्रकारों के साथ भाटपाररानी में किए गए दुर्व्यवहार तथा सलेमपुर के महथापार में पत्रकारों को कुछ देर तक बन्दी बनाए जाने की घटना को लेकर जिले के पत्रकारों में जिला प्रशासन के खिलाफ काफी आक्रोश व्याप्त है।
हालांकि दोनों स्थानों पर स्वयं मुख्यमंत्री ने पत्रकारों द्वारा की गई शिकायतों को काफी गंभीरता से लिया तथा कार्यवाही का आश्वासन दिया। चर्चा है कि इस प्रकरण की जांच मीडिया के चहेते गोरखपुर के मण्डलायुक्त के रवीन्द्र नायक को दी गई है।
गौरतलब है कि बीते 31 अक्टूबर अर्थात बुधवार को प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के जब अपरान्ह भाटपाररानी में स्थित दिवगंत नेता कामेश्वर उपाध्याय तथा महथापार में पूर्व सांसद हरि केवल प्रसाद के आवास पर पहुंचने की जानकारी मिली तो जिला प्रशासन को सांप सूंघ गया। खासकर जिलाधिकारी कुमार रविकान्त सिंह को।
भाटपाररानी में उन्होंने इस अवसर पर मीडिया को मुख्यमंत्री से दूर रखने के लिए हर सम्भव प्रयास किया। अण्डरट्रेनिंग में आई एक महिला एस डी एम को खास तौर पर निर्देश दे दिया कि जितने भी पत्रकार यहां पर एकत्रित हैं उनको मुख्यमंत्री तक फटकने न दिया जाय। पत्रकारों को जिला प्रशासन का यह व्यवहार अत्यन्त आश्चर्यचकित करने वाला था। कई बार जिलाधिकारी कुमार रविकान्त सिंह से पत्रकारों का इस मुददे पर टकराव होते-होते बचा।
खैर किसी तरह मुख्यमंत्री ने स्व. कामेश्वर उपाध्याय के प्रति अपनी श्रद्धाजंलि अर्पित की और जैसे ही वह हेलीपैड पर पहुंचे वहां उपस्थित पत्रकारों ने जिलाधिकारी के इस तानाशाही रवैया की शिकायत की जिसे बड़े अपनेपन से मुख्यमंत्री ने यह कह कर कि ''आप पत्रकार तो हमारे दुर्दिन के साथी हैं, बुरा मत मानिए'' कहकर सम्भाल लिया।
लेकिन मुख्यमंत्री जब सलेमपुर के महथापार में स्व. हरिकेवल प्रसाद के आवास पर पहुंचे तो वहां कुछ पत्रकारों को एक कमरे में बन्द देखकर हतप्रभ रह गए और स्वयं उस कमरे से पत्रकारों को आजाद कराया तथा वहां पर उपस्थित अधिकारियों को डांट पिलाई। उधर जैसे ही जिला प्रशासन की इस हरकत की जानकारी अन्य पत्रकारों को हुई, लगभग छोट बड़े सभी अखबारों एवं टी वी चैनलों ने घटना की निन्दा करते हुए इसे प्रमुखता से प्रकाशित तथा प्रसारित किया।
बताया जा रहा है कि जिलाधिकारी कुमार रविकान्त सिंह नहीं चाहते थे कि पत्रकार मुख्यमंत्री से मुखातिब हों। जिलाधिकारी को इस बात का भय सता रहा था कि कहीं पत्रकार जिला प्रशासन की शिकायत न कर बैंठे। लेकिन वही हुआ जो होना था। मुख्यमंत्री के सामने जिला प्रशासन की ऐसी किरकिरी हुई कि कहिए मत। कहा जा रहा है कि जिलाधिकारी का शुरू से पत्रकारों से शुष्क व्यवहार रहा है।





