कोलकाता : प्रेस काउंसिल के अध्यक्ष जस्टिस मार्कंडेय काटजू ने एक फिर मीडिया को आड़े हाथ लिया है। काटजू इस बार अभिनेता देवानंद के निधन की खबर को अखबारों तथा टीवी चैनलों पर व्यापक कवरेज मिलने को लेकर मीडिया पर बरसे। उन्होंने कहा कि कर्ज और तमाम तरह की दिक्कतों में डूबे किसानों की आत्महत्या की खबरें और अन्य ज्वलंत सामाजिक-आर्थिक मुद्दों को दरकिनार कर एक अभिनेता के निधन की खबर को इतनी प्रमुखता देना समझ से परे हैं, साथ ही यह समाचार चयन क्षमता का अभाव भी दर्शाता है।
उन्होंने कहा कि मैंने भी युवावस्था में देवानंद की फिल्में देखी हैं और उन्हें पसंद करता हूं लेकिन उन के निधन की खबर को इतनी तवज्जो दिए जाने से सहमत नहीं हूं। जस्टिस काटजू ने कहा कि पिछले 50 सालों के दौरान करीब ढाई लाख किसानों ने तमाम कारणों से आत्महत्या की, परन्तु इस पर पत्रकार पी. साईंनाथ जैसे कुछ अपवादों को छोड़कर किसी ने ध्यान नहीं दिया। हमेशा ही ऐसे मुद्दों की अनदेखी की गई है।
उन्होंने कहा कि देश इस वक्त अनेक सामाजिक-आर्थिक समस्याएं झेल रहा है। यहां गरीबी, बेरोजगारी, महंगाई किसानों-बुनकरों की आत्महत्याओं जैसे मुद्दे कहीं ज्यादा महत्व रखते हैं, परन्तु मीडिया इस तरफ ध्यान न देकर दोयम स्तर के खबरों को प्रमुखता देती है। उन्हों ने कहा कि अब वक्त आ गया है कि मीडिया खुद को दुरुस्त कर ले क्योंकि उससे लोगों की अपेक्षाएं जुड़ी हुई हैं। उसे आम लोगों की अपेक्षाओं पर खरा उतरने का प्रयास करना चाहिए।






