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‘देशबन्धु’ के पत्रकार को समाचार रोकने के लिए प्रलोभन देने और डराने-धमकाने का प्रयास

रायपुर : दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे रायपुर मंडल में फर्जी तरीके से कार्य कर रही महिला एएलपी माधुरी श्याम कुंवर का असली रूप अब सामने आने लगा है। उसके फर्जीवाड़ा की जानकारी सामने आने के बाद वह अब मीडिया पर दबाव डालने के लिए अपने गिरोह के एक सदस्य को लगातार मीडिया प्रतिनिधि के पीछे लगाई हुई है। जो रेलवे में हुई शिकायतकर्ताओं के नाम, पते और समाचार पत्र समूह में कार्यरत् लोगों के नाम जानने के लिए लगातार मीडिया पर दबाव डाल रहे हैं और उसने आज धमकी भी दी है कि यदि इसी प्रकार खबरें प्रकाशित की तो इसका अंजाम भी भुगतना पड़ेगा।

रायपुर : दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे रायपुर मंडल में फर्जी तरीके से कार्य कर रही महिला एएलपी माधुरी श्याम कुंवर का असली रूप अब सामने आने लगा है। उसके फर्जीवाड़ा की जानकारी सामने आने के बाद वह अब मीडिया पर दबाव डालने के लिए अपने गिरोह के एक सदस्य को लगातार मीडिया प्रतिनिधि के पीछे लगाई हुई है। जो रेलवे में हुई शिकायतकर्ताओं के नाम, पते और समाचार पत्र समूह में कार्यरत् लोगों के नाम जानने के लिए लगातार मीडिया पर दबाव डाल रहे हैं और उसने आज धमकी भी दी है कि यदि इसी प्रकार खबरें प्रकाशित की तो इसका अंजाम भी भुगतना पड़ेगा।

यह व्यक्ति इससे पूर्व भी 26 मार्च को 'देशबन्धु' परिसर में आया हुआ था और फर्जी नाम-पता और पदनाम के साथ 'देशबन्धु' के पत्रकार से मिला था और समाचार रोकने के लिए पैसे का लालच के साथ-साथ डराने-धमकाने का भी प्रयास किया।

उल्लेखनीय है कि माधुरी श्याम कुंवर का फर्जी पत्रकार साथी रेलवे अधिकरियों को आईबीएन 7, सहारा और जी न्यूज के रिपोर्टर के रूप में लगातार मिल रहा था, वह अधिकारियों को ब्लेकमेल कर माधुरी श्याम कुंवर की ड्यूटी मनमाने तरीके से लगवा रहा था। वह स्वयं को रेलवे अधिकारियों से मिलते समय माधुरी श्याम कुंवर का भाई बताने के साथ अपना नाम राजू खान बताता था, परंतु उसके बारे में यह जानकारी मिली है कि उसके और भी कई नाम हैं। जैसे एमएम खान, एमके खान, कासिम खान, कासिम रायपुरी। यह व्यक्ति स्वयं को पत्रकार तो कभी समाजसेवी, तो कभी रेलवे का अधिकारी बता रहा है। महिला एएलपी के बारे में लगातार फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद वह तिलमिला गई और बीते दिन उसने मनगढ़ंत आरोप लगाते हुए रेलवे के कई अधिकारियों एवं पुरुष कर्मचारियों पर चारित्रिक लाछन लगाने का प्रयास किया और दो वर्ष पुराने मामले में यौन उत्पीडऩ की शिकायत की। जबकि उक्त प्रकरण को दो वर्ष पूर्व ही रेलवे के अधिकारी ने खारिज कर दिया था।

महिला एएलपी वर्ष 2007 में सदर्न रेलवे के चेन्नई डिवीजन में फर्जी तरीके से काम कर रही थी। जिसके बाद उसे वर्ष 2008 में चेन्नई डिवीजन ने बिना नोटिस के बर्खास्त कर दिया था और इस फैसले पर केन्द्रीय प्रशासनिक अभिकरण (कैट) ने भी अपनी मुहर लगा दी है। उसके बाद उक्त महिला ने बिलासपुर जोन में वर्ष 2010 में आवेदन भरा और अपने आवेदन पत्र में स्वयं को कभी शासकीय सेवा करना नहीं बताया। उसके द्वारा बकायदा घोषणा पत्र भी दिया गया है, जो फर्जी साबित हो चुका है। इसके अलावा महिला ने फर्जी चरित्र प्रमाण पत्र भी लगाया है।
 
उक्त महिला कर्मी के खिलाफ लगातार शिकायत मिलने के बाद रेलवे के उच्च अधिकारियों ने पूरे प्रकरण को बिलासपुर जोन के सीनियर डीजीएम और विजिलेंस विभाग के प्रमुख को सौंप दिया है। जिसके बाद से यह महिला तिलमिला गई और इसे पता चल चुका है कि इस बार भी उसकी बर्खास्तगी तय है, इसलिए वह अब नए-नए हथकंडे अपना रही है। वह मीडिया प्रतिनिधियों पर पैसा खाने का भी आरोप लगा रही है, जबकि रायपुर के कई समाचार पत्रों में यह खबर प्रमुखता से प्रकाशित की गई।
 
उक्त महिला कर्मी ने नौकरी के प्रारंभ में ही एक एलआई का फोन इस्तेमाल कर स्वयं को अश्लील एसएमएस कर दिया था और उसके बाद से उसे वह ब्लेकमेल कर रही थी। उसके इस कृत्य में फर्जी पत्रकार बराबर शामिल था और उक्त फर्जी पत्रकार अधिकारियों पर दबाव डालकर माधुरी श्याम कुंवर को मनमाने तरीके से आफिस ड्यूटी में बैठा रहा था। जबकि दपूमरे में कार्यरत कई महिला रेलवे ड्रायवर रनिंग ड्यूटी में कार्य कर रहे हैं और उन्हें अब तक आफिस ड्यूटी नहीं मिली है। उक्त महिला कर्मी की लगातार शिकायत और उसकी हरकतों से पूरा मंडल परेशान हो चुका था। इसकी पुष्टि भी कई बड़े अधिकारियों ने की है। (साभार- देशबंधु)

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