जागरण ग्रुप से सूचना है कि दैनिक जागरण का नेशनल एडिशन बंदी की कगार पर पहुंच गया है. प्रबंधन इस सफेद हाथी को ठिकाने लगाने की कोशिश करने लगा है. नोएडा में नेशनल एडिशन की टीम में करीब डेढ़ दर्जन लोग हैं. इन्हें अब सेंट्रल डेस्क का हिस्सा इसीलिए बना दिया गया है ताकि कल को बंदी की परिघटना का कोई खास असर न पड़े और कम से कम लोगों को बाहर का रास्ता दिखाना पड़े. सूत्रों के मुताबिक मध्य प्रदेश में नईदुनिया के टेकओवर के बाद से जागरण प्रबंधन नेशनल एडिशन के कारोबार को समेटने में लग गया है. जागरण नेशनल एडिशन का भोपाल संस्करण बंद कर दिया गया है. दिल्ली में सरकुलेशन दिन पर दिन कम किया जा रहा है. विज्ञापन इस अखबार को मिलता नहीं. इस नेशनल अखबार की कोई चर्चा भी कहीं नहीं होती.
इंकलाब, मिडडे, नईदुनिया आदि के अधिग्रहण के बाद जागरण को नेशनल एडिशन का प्रयोग फालतू, खर्चीला और सफेद हाथी लगने लगा है. इसी कारण वह बंदी की ओर कदम बढ़ा रहा है. बंदी की प्रक्रिया में कई तकनीकी पेंच हैं, जिसके कारण बंदी की औपचारिक घोषणा रुकी हुई है. जिस देन ये पेंच खत्म हो जाएंगे, उसी दिन से चुपचाप यह नेशनल एडिशन बंद कर दिया जाएगा. सूत्रों के मुताबिक राजीव सचान को नई जिम्मेदारी दे दी गई है. वह सेंट्रल डेस्क के प्रभारी बना दिए गए हैं. उनकी नेशनल एडिशन की टीम को भी सेंट्रल डेस्क में लगा दिया गया है. मतलब वह नेशनल एडिशन व सेंट्रल डेस्क दोनों देखेंगे. जब नेशनल एडिशन बंद हो जाएगा तो कुछ लोगों की छंटनी के बाद बाकी लोगों को सेंट्रल डेस्क में एकोमोडेट कर लिया जाएगा.






