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दैनिक जागरण के स्‍टेट ब्‍यूरो में सेंध लगाएंगे नदीम!

दैनिक जागरण, लखनऊ के ब्‍यूरोचीफ रहे नदीम के नवभारत टाइम्‍स जाने के बाद प्रबंधन अब अपने गढ़ की किलेबंदी में जुट गया है. नदीम जागरण के स्‍टेट ब्‍यूरो की रीढ़ माने जाते थे. प्रबंधन नदीम के जाने के झटके से अभी ठीक से उबर नहीं पाया है कि जागरण, लखनऊ में सेंध लगने की खबरों ने प्रबंधन की चिंता और बढ़ा दी है. खबर आ रही है कि जागरण प्रबंधन से असंतुष्‍ट कई वरिष्‍ठ पत्रकार नदीम के सहारे नभाटा की उड़ान भरने को तैयार हैं. 

दैनिक जागरण, लखनऊ के ब्‍यूरोचीफ रहे नदीम के नवभारत टाइम्‍स जाने के बाद प्रबंधन अब अपने गढ़ की किलेबंदी में जुट गया है. नदीम जागरण के स्‍टेट ब्‍यूरो की रीढ़ माने जाते थे. प्रबंधन नदीम के जाने के झटके से अभी ठीक से उबर नहीं पाया है कि जागरण, लखनऊ में सेंध लगने की खबरों ने प्रबंधन की चिंता और बढ़ा दी है. खबर आ रही है कि जागरण प्रबंधन से असंतुष्‍ट कई वरिष्‍ठ पत्रकार नदीम के सहारे नभाटा की उड़ान भरने को तैयार हैं. 

नदीम के जाने के बाद प्रबंधन का संकट भी लगातार बढ़ रहा है. दो दशकों से जागरण, लखनऊ की धुरी बने नदीम की जगह नए ब्‍यूरोचीफ चुनना प्रबंधन के लिए पहेली और सिरदर्द बना हुआ है. सबसे बड़ी चुनौती स्‍टेट ब्‍यूरो को संभालकर रखने की है. लोकसभा चुनाव से पहले जागरण के स्‍टेट ब्‍यूरो में सेंध लगने की तैयारी लगभग हो चुकी है. पांच लोगों के सहारे चल रहे स्‍टेट ब्‍यूरो के दो सदस्‍य नया आशियाना तलाशने में जुट गए हैं. संभव है कि ये भी नभाटा या फिर किसी अन्‍य अखबार की टीम के साथ जुड़ जाएं. हालांकि चर्चा है कि नदीम कुछ और लोगों को अपने साथ ले जा सकते हैं.

दैनिक जागरण, लखनऊ के लिए बड़ी मुश्किल स्‍थानीय संपादक दिलीप अवस्‍थी और स्‍टेट हेड रामेश्‍वर पांडेय के बीच लंबे समय से और शांतिपूर्वक चल रहे शीतयुद्ध को लेकर है. सूत्रों का कहना है कि रामेश्‍वर पांडेय कहने-सुनने के लिए तो अपना पूरा प्रयास ब्‍यूरो को बचाने और मजबूत करने में कर रहे हैं लेकिन यह प्रयास ठीक उसी तरह है जैसे शेर के चंगुल में फंसे मेमने को बचाने के लिए बंदर इस पेड़ से उस पेड़ पर उछलता रहता है यानी उसका प्रयास कहीं से भी कमतर नहीं होता है, भले मेमना बचे या मर जाए.  

दिलीप अवस्‍थी को असफल साबित करने का इससे बेहतर मौका नहीं मिल सकता है लिहाजा रामेश्‍वर पांडेय अपना प्रयास जारी रखे हुए हैं. चुनाव के पहले स्‍टेट ब्‍यूरोचीफ के जाने के बाद जागरण प्रबंधन बुरी तरह हिल गया है. प्रबंधन के सामने सबसे बड़ी मुश्किल विश्‍वसनीय नए ब्‍यूरो हेड की नियुक्ति को लेकर हो रही है. इस पर पर किसकी नियुक्ति की जाए प्रबंधन तय नहीं कर पा रहा है. हिंदुस्‍तान से आए परवेज अहमद को लेकर भी पुराने लोगों में अंदरुनी नाराजगी है. परवेज को तव्‍वजो मिलने से पुराने लोग अंदर से कुढ़े बैठे हुए हैं. नदीम के जाने के बाद नाराजगी की यह चिंगारी आग का शक्‍ल भी अख्तियार कर सकती है. फिलहाल जागरण प्रबंधन डैमेज कंट्रोल करने की कोशिशों में जुटा हुआ है. स्‍टेट हेड के नामों पर ठोंक ठठाव किया जा रहा है.

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