Connect with us

Hi, what are you looking for?

No. 1 Indian Media News PortalNo. 1 Indian Media News Portal
Local News Community

प्रिंट-टीवी...

दैनिक जागरण, देहरादून ने छापा पेड न्‍यूज

पेड न्‍यूज का जन्‍मदाता दैनिक जागरण अपने अखबार में नैतिकता और सा‍माजिक सरोकार का बराबर दुहाई देता रहता है. उसके मालिक तथा लाखों कमाने वाले संपादक भी नैतिकता की बातें करते रहते हैं, पर जब इसको अमल करने की बात आती है तो सारी बातें कूड़े के ढेर में चली जाती हैं. पैसा कमाने तथा नए अधिग्रहणों को अंजाम देने की कोशिश में जागरण पत्रकारिता के सारे सरोकारों को बेच चुका है, अब पत्रकारिता को भी बेचना शुरू कर दिया है.

पेड न्‍यूज का जन्‍मदाता दैनिक जागरण अपने अखबार में नैतिकता और सा‍माजिक सरोकार का बराबर दुहाई देता रहता है. उसके मालिक तथा लाखों कमाने वाले संपादक भी नैतिकता की बातें करते रहते हैं, पर जब इसको अमल करने की बात आती है तो सारी बातें कूड़े के ढेर में चली जाती हैं. पैसा कमाने तथा नए अधिग्रहणों को अंजाम देने की कोशिश में जागरण पत्रकारिता के सारे सरोकारों को बेच चुका है, अब पत्रकारिता को भी बेचना शुरू कर दिया है.

ताजा मामला दैनिक जागरण के देहरादून एडिशन का है. अखबार ने सिटी एडिशन के चार नम्‍बर पेज पर बैसाखी आई के नाम पर पेड न्‍यूज छापा है. बॉटम में प्रकाशित खबर में तीन ब्रांडों की खबरों को बढ़ा-चढ़ाकर लिखा गया है. खास बात है कि कहीं भी इन खबरों में विज्ञापन शब्‍द का इस्‍तेमाल नहीं किया गया है, जबकि यह खबर पूरी तरह पेड न्‍यूज है. बॉटम में तीन खबरें प्रकाशित की गई हैं. दो खबरें शिक्षा से जुड़े संस्‍थानों का तथा तीसरा प्रॉपर्टी से जुड़ी कंपनी शिवालिक का. ये खबरें पूरी तरह से पेड न्‍यूज हैं लेकिन जागरण ने इसे क्रेडिट लाइन देकर खबर बनाने का कुत्सित प्रयास किया है.

सवाल यह उठता है कि क्‍या जागरण इन संस्‍थानों से पैसा लेकर अपने पाठकों के साथ छल नहीं कर रहा है? पिछले लोक सभा चुनाव में अखबार को धंधा बना देने वाले जागरण की पैसा कमाने की भूख किसी से छिपी नहीं है. पत्रकारिता से ज्‍यादा बनियागिरी करने वाला यह संस्‍थान अपने पत्रकारों को तो जीवन जीने लायक पैसा देना भी गंवारा नहीं करता, पर जब पैसा लेने की बात आती है तो इसके मालिकान पत्रकारिता के सारे नियम-कानून गिरवी रखकर दोनों हाथों से पैसा बटोरने में लग जाते हैं. बीते विधानसभा चुनावों में आयोग की कड़ाई के चलते इस अखबार के मालिकान पैसा नहीं कमा सके तो अब तमाम शिक्षा संस्‍थानों और प्रॉपर्टी का धंधा करने वालों का पेड न्‍यूज छापकर उसकी भरपाई करने में जुट गए हैं.

अपने पत्रकारों का खून तक चूस जाने वाला जागरण अब अपने पाठकों को भी धोखा दे रहा है. वह भी उन पाठकों को जो अखबार की खबरों पर भरोसा करते हैं. इसमें लिखी खबरों को सही मानते हैं. धिक्‍कार है जागरण और इसकी बाजारू पत्रकारिता को. सिर्फ पैसा ही कमाना है तो उसके कई रास्‍ते हैं, कई तरीके हैं, कई व्‍यवसाय हैं पर पत्रकारिता को बेचकर, इसे गिरवी रखकर, अपने पाठकों को धोखा देकर पैसा कमाने की कोशिश को कहीं से भी जायज नहीं कहा जा सकता है.

Pahad Ki Dada: Hill Mail Uttarakhand
CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

… अपनी भड़ास [email protected] पर मेल करें … भड़ास को चंदा देकर इसके संचालन में मदद करने के लिए यहां पढ़ें-  Donate Bhadasमोबाइल पर भड़ासी खबरें पाने के लिए प्ले स्टोर से Telegram एप्प इंस्टाल करने के बाद यहां क्लिक करें : https://t.me/BhadasMedia 

Advertisement

You May Also Like

विविध

Arvind Kumar Singh : सुल्ताना डाकू…बीती सदी के शुरूआती सालों का देश का सबसे खतरनाक डाकू, जिससे अंग्रेजी सरकार हिल गयी थी…

विविध

: काशी की नामचीन डाक्टर की दिल दहला देने वाली शैतानी करतूत : पिछले दिनों 17 जून की शाम टीवी चैनल IBN7 पर सिटिजन...

विविध

पहली बार चुनाव हमने 1967 में देखा था. तेरह साल की उम्र में. और अब पहली बार ऐसा चुनाव देख रहे हैं, जो इससे...

विविध

राजस्थान, कांग्रेस और सेक्स. ये तीन शब्द लगता है आपस में अच्छे से घुल मिल गए हैं. भंवरी कांड में ये तीनों शब्द जुड़े...