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दैनिक जागरण, नारनौल में ऑफिस ब्‍वॉय से प्रभारी बने राजेंद्र

: देवेंद्र को किया गया दरकिनार : दैनिक जागरण अखबार में नित नए कारनामें देखे जाते हैं। अब नया कारनामा नारनौल हरियाणा में सामने आया है। यहां पर जागरण प्रबंधन ने योग्यता को दरकिनार कर स्टाफर को छोड़ आफिस ब्वाय को प्रमोट करके आफिस का इंजार्च बना दिया। जिसकी स्थानीय मीडिया में भी काफी चर्चा है। माना जा रहा है कि यह योग्‍यता से ज्‍यादा चाटुकारिता का परिणाम है।

: देवेंद्र को किया गया दरकिनार : दैनिक जागरण अखबार में नित नए कारनामें देखे जाते हैं। अब नया कारनामा नारनौल हरियाणा में सामने आया है। यहां पर जागरण प्रबंधन ने योग्यता को दरकिनार कर स्टाफर को छोड़ आफिस ब्वाय को प्रमोट करके आफिस का इंजार्च बना दिया। जिसकी स्थानीय मीडिया में भी काफी चर्चा है। माना जा रहा है कि यह योग्‍यता से ज्‍यादा चाटुकारिता का परिणाम है।

हुआ यूं की नारनौल कार्यालय में कई वर्षों से चीफ रिपोर्टर का पद रिक्त है। इसलिए रेवाड़ी के महेश वैद्य को यहां का अतिरिक्त कार्यभार दिया गया है। महेश वैद्य ने भी तुरंत यहां का कार्यभार लिया था। इससे पूर्व यहां पर रोहताश सिंह यादव संवाद सहयोगी होकर भी कई वर्षों से कार्यालय प्रभारी रहे हैं। करीब ढाई साल पूर्व उनकी तबीयत खराब होने पर देवेंद्र यादव को जागरण ने स्टाफर के रूप में रिपोर्टर लगाया था। जिसके हिसाब से करीब दो साल से देवेंद्र यादव ही वरिष्ठता के तहत कार्यालय प्रभारी के रूप में कार्य कर रहा है। वहीं इनके अलावा रोहतास सिंह का भतीजा राजेंद्र, जो करीब पांच साल पूर्व आफिस ब्वाय के रूप में लगा था, उसे स्टाफ की कमी होने पर तीन साल पूर्व संवाद सहयोगी बनवा दिया गया। वहीं वह देवेंद्र कई वर्ष जूनियर भी है व पूर्व में अमर उजाला के ब्यूरो प्रमुख भी रह चुके हैं। अब रोहतास सिंह के रिटायर होने पर उन्होंने भाई-भतीजावाद के चलते सीजेएम निशिकांत ठाकुर से चाटुकारिता कर अपने भतीजे राजेंद्र की पदोन्नति करा स्टाफ रिपोर्टर के साथ कार्यालय प्रभारी का भी दर्जा दिला दिया। प्रबंधन से चाटुकारिता करने पर राजेंद्र से कई वर्ष सीनियर रहे देवेंद्र को दरकिनार करते हुए राजेंद्र की न केवल सैलरी में भारी इजाफा कर दिया गया बल्कि उसे कार्यालय प्रभारी का पद भी दे दिया गया। इस प्रकार एक आफिस ब्वाय ने महज चार साल के दौरान कार्यालय प्रभारी का पद हासिल कर सबको चौंका दिया है।

वहीं खास बात यह भी है कि देवेंद्र ने जहां 2004 में पत्रकारिता में मास्टर डिग्री प्राप्त की थी। वहीं राजेंद्र ने हाल ही में दूरस्थ शिक्षा के तहत अपनी बीए की पढ़ाई ही की है। वहीं उसे पत्रकारिता व लिखने का अनुभव भी काफी कम है। जागरण प्रबंधन के इस नए कारनामे की स्थानीय मीडिया में काफी चर्चा है तथा पत्रकार यह कह रहे हैं कि जागरण में योग्यता की नहीं, बल्कि चाटुकारिता की अहमियत है। जिस प्रकार महेश वैद्य चाटुकारिता कर दूसरे जिले में हस्तक्षेप कर रहे हैं। उसी तर्ज पर रोहतास सिंह यादव ने भी अपने भतीजे के लिए प्रबंधन की जमकर चाटुकारिता की तथा राजेंद्र को आफिस ब्वाय से आफिस इंचार्ज बनवा दिया।

एक पत्रकार द्वारा भेजा गया पत्र.

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