बीना शुक्ला दैनिक जागरण, कानपुर की मीडियाकर्मी रही हैं. उनके साथ जागरण में ही कार्यरत चार वरिष्ठों ने यौन शोषण किया. बीना ने पहले दैनिक जागरण के मालिकों से लिखित शिकायत की. पर मालिकों ने चुप्पी साध ली और बीना को ही टर्मिनेट करने का फरमान जारी कर दिया. जब दैनिक जागरण के मालिकों ने कोई कार्रवाई नहीं की और न ही कोई जांच बिठाई तो वे पुलिस के पास गईं. पुलिस के छोटे बड़े सभी अधिकारियों ने मामला दैनिक जागरण का देखकर शिकायत को ठंढे बस्ते में डाल दिया. मजबूरन बीना को कोर्ट जाना पड़ा.
कोर्ट के आदेश के बाद दैनिक जागरण, कानपुर के 4 मीडियाकर्मियों के खिलाफ कानपुर शहर के काकादेव थाने में मुकदमा दर्ज हुआ. जिन लोगों के खिलाफ एफआईआर हुई है, उनके नाम हैं- डीजीएम नितिन श्रीवास्तव, प्रोडक्शन हेड प्रदीप अवस्थी, फोरमैन संतोष मिश्रा और फीचर विभाग के दिनेश दीक्षित. डीजीएम नितिन श्रीवास्तव आजकल दैनिक जागरण, नोएडा में कार्यरत है. बीना ने लेबर कोर्ट में भी जागरण के खिलाफ मुकदमा किया है. उन्होंने गलत तरीके से खुद को टर्मिनेट किए जाने के खिलाफ लेबर कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. बीना शुक्ला का साफ आरोप है कि पुलिस-प्रशासन जागरण प्रबंधन के इशारे पर आरोपियों को बचाने में लगा हुआ है. दैनिक जागरण के भीतर का मामला होने के कारण कोई दूसरा मीडिया हाउस इसे प्रकाशित नहीं कर रहा है.
बीना ने भड़ास4मीडिया से बातचीत में साफ कहा कि उन्हें अपनी पहचान उजागर होने से कोई दिक्कत नहीं. वह खुलकर अपनी बात कहना, रखना, बताना चाहती हैं. वह न्याय चाहती हैं. वह वर्षों से लड़ रही हैं पर उन्हें कहीं से कोई सपोर्ट नहीं मिल रहा है. पुलिस वाले जांच के नाम पर जागरण प्रबंधन के इशारे पर आरोपियों को बचाने में जुटे हैं. बीना शुक्ला ने आज एक टेप जारी करते हुए बताया कि इस टेप में दैनिक जागरण, कानपुर में कार्यरत एक मीडियाकर्मी से बातचीत है जिसके सामने ही उनके साथ दुर्व्यवहार किया गया था. बीना शुक्ला का कहना है कि सारे प्रमाणों के बावजूद पुलिस-प्रशासन के लोग दैनिक जागरण में कार्यरत आरोपियों को छू तक नहीं रहे हैं.
अगर आप भी बीना शुक्ला की मदद करना चाहते हैं, उनकी कहानी लिखना या प्रकाशित या जानना चाहते हैं तो उनसे सीधे संपर्क [email protected] के जरिए कर सकते हैं. बीना ने सोशल मीडिया (फेसबुक, ट्विटर, वेब, ब्लाग आदि) के लोगों से खासकर अपील की है कि उनके प्रकरण को हर कोई उठाए ताकि उन्हें न्याय मिल सके. कार्पोरेट मीडिया और मेनस्ट्रीम मीडिया के प्रभाव में जांच गलत दिशा में मोड़ने पर आमादा पुलिस-प्रशासन को रास्ते पर लाने के लिए भी यह जरूरी है कि हर स्तर पर मसले को उठाया जाए ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके.
बीना शुक्ला ने यूपी के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव से भी अपील की कि दैनिक जागरण वालों के प्रभाव से कानपुर के पुलिस-प्रशासन को मुक्त कराने के निर्देश दिए जाएं और आरोपियों की फौरन गिरफ्तारी की जाए. बीना शुक्ला का कहना है कि आरोपी एक प्रभावशाली मीडिया हाउस में काम करते हैं और इस मीडिया हाउस का प्रबंधन आरोपियों के साथ मिला हुआ है, इसलिए ये लोग विविध तरीके से दबाव डालकर, साजिश रचकर पूरे मामले को गलत दिशा में मोड़ना चाहते हैं ताकि पीड़िता को न्याय न मिल सके और आरोपियों को बचाया जा सके. नीचे ये वो टेप है जो बीना शुक्ला ने कानपुर के पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों को सौंपने के साथ-साथ भड़ास4मीडिया को दिया ताकि पूरी बातचीत आम हो सके जिससे कोई भी किसी स्तर पर इस जरूरी सुबूत (टेप) को लापता न कर दे.
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