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दैनिक जागरण, लखनऊ से जुड़े राज बहादुर सिंह, कद घटा परवेज अहमद का

लखनऊ : दैनिक जागरण लखनऊ में राज्‍य ब्‍यूरो में काम करने वाले पुराने लोगों का दबाव काम आया. उनके असंतोष को कम करने के लिए संजय गुप्‍ता के आदेश पर परवेज अहमद कद घटा दिया गया है. उनसे कई महत्वपूर्ण बीट लेकर राज बहादुर सिंह को दे दिया गया है. राज बहादुर सिंह कुछ रोज पहले ही दैनिक जागरण, लखनऊ से जुड़े हैं. चर्चा है कि परवेज अहमद का पद भी घटा दिया गया है, पर इस बात की पुष्टि नहीं हो पाई है.

लखनऊ : दैनिक जागरण लखनऊ में राज्‍य ब्‍यूरो में काम करने वाले पुराने लोगों का दबाव काम आया. उनके असंतोष को कम करने के लिए संजय गुप्‍ता के आदेश पर परवेज अहमद कद घटा दिया गया है. उनसे कई महत्वपूर्ण बीट लेकर राज बहादुर सिंह को दे दिया गया है. राज बहादुर सिंह कुछ रोज पहले ही दैनिक जागरण, लखनऊ से जुड़े हैं. चर्चा है कि परवेज अहमद का पद भी घटा दिया गया है, पर इस बात की पुष्टि नहीं हो पाई है.

स्थानीय संपादक दिलीप अवस्‍थी ने परवेज अहमद को हिन्‍दुस्‍तान से लाकर उन्‍हें दैनिक जागरण में विशेष संवाददाता स्‍वदेश कुमार के स्‍थान पर सरकार कवर करने की जिम्‍मेदारी सौंप दी थी. इतनी महत्‍वपूर्ण जिम्‍मेदारी सौंपे जाने के बाद जागरण ब्‍यूरो के पुराने लोगों ने संजय गुप्‍ता के समक्ष अपनी आपत्‍ति दर्ज कराई थी. कहा था कि हिन्‍दुस्‍तान में लोकल बीट कवर करने वाले रिपोर्टर को जागरण ब्‍यूरो में तमाम सदस्‍यों की वरिष्‍ठता को नजरअंदाजकर इतनी महत्‍वूपर्ण जिम्‍मेदारी कैसे दी जा सकती है. यह भी कहा गया था कि राजीव दीक्षित, आनंद राय, अवनीश त्‍यागी, हरिशंकर मिश्र, सत्‍येंद्र पांडे जैसे पुराने लोगों को जब विशेष संवाददाता का दर्जा नहीं दिया गया है तो फिर परवेज अहमद को कैसे दिया जा सकता है.

इस बीच जागरण ब्‍यूरो के सदस्‍यों ने परवेज अहमद की एक महीने की परफार्मेंस रिपोर्ट भी भेजी. चूंकि इस समय जागरण में भगदड़ की स्‍थिति है ऐसे में जागरण ब्‍यूरो को बचाने के लिए संजय गुप्‍ता ने परवेज अहमद से सरकार कवर करने की जिम्‍मेदारी लेते हुए दूसरे साधारण विभाग देने को कहा. इस पर दिलीप अवस्‍थी ने अमल भी कर दिया.

परवेज से कई बीटें लेकर राज बहादुर सिंह को दे दिया गया है. राज बहादुर सिंह पहले भी जागरण के राज्‍य ब्‍यूरो में हुआ करते थे. तब विनोद शुक्‍ला का जमाना था. एक प्रकरण के कारण राजबहादुर को जागरण से जाना पड़ा. तब उन्होंने जागरण वालों पर मुकदमा कर दिया था. राजबहादुर और जागरण के गुप्‍ताज के बीच मुकदमेबाजी एक ऐसे मुकाम तक पहुंची कि बाद में बीच-बचाव कर मुकदमा वापस कराया गया.

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