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दैनिक जागरण, सहारनपुर का कारनामा, संपादक-मालिक को पेशी की नोटिस

: कानाफूसी : एक पक्षीय समाचार छापने के मामले में यूं तो दैनिक जागरण कुख्यात है, लेकिन मेरठ के अधीनस्थ कार्यालयों में इन दिनों सहारनपुर टॉप वन है। पिछले दिनों सहारनपुर कार्यालय के सेकेंड इन्चार्ज अजय यादव ने बेसिक शिक्षा विभाग के एक वरिष्ठ लिपिक सतेंद्र के खिलाफ एक मिथ्या, भ्रामक और पूरी तरह से एकपक्षीय खबर प्रकाशित की। इस खबर को लेकर भेजे गए नोटिस को नजरअंदाज कर दिया।

: कानाफूसी : एक पक्षीय समाचार छापने के मामले में यूं तो दैनिक जागरण कुख्यात है, लेकिन मेरठ के अधीनस्थ कार्यालयों में इन दिनों सहारनपुर टॉप वन है। पिछले दिनों सहारनपुर कार्यालय के सेकेंड इन्चार्ज अजय यादव ने बेसिक शिक्षा विभाग के एक वरिष्ठ लिपिक सतेंद्र के खिलाफ एक मिथ्या, भ्रामक और पूरी तरह से एकपक्षीय खबर प्रकाशित की। इस खबर को लेकर भेजे गए नोटिस को नजरअंदाज कर दिया।

लिपिक सतेंद्र ने इसके खिलाफ सिविल जज (सीनियर डिविजन), सहारनपुर न्यायालय में मुकदमा संख्या 649/ 2011 सतेंद्र बनाम दैनिक जागरण दायर किया। इसमें केवल 50 हजार रुपये की मानहानि का दावा किया गया। लिपिक ने इतनी कम राशि का हर्जाना इसलिए मांगा कि वह एक बाबू है और ज्यादा राशि का दावा दायर करने से सत्यापित हो जाता कि दैनिक जागरण की खबर के अनुसार लिपिक वाकई भ्रष्ट है।

कोर्ट से लगातार समन भेजे जाने के बावजूद दैनिक जागरण की ओर से न तो कोई कोर्ट में पेश हुआ और न ही संबंधित पक्ष से समझौते के लिए संपर्क ही किया गया। नतीजा यह रहा कि कोर्ट ने दैनिक जागरण के प्रबंध संपादक महेंद्र मोहन गुप्त, संपादक संजय गुप्त और स्थानीय संपादक धीरेंद्र मोहन गुप्त को व्यक्तिगत पेशी का नोटिस भेज दिया है। इसे लेकर दैनिक जागरण मेरठ यूनिट और सहारनपुर कार्यालय में हड़कंप की स्थिति है। नोटिस हाल ही में प्राप्त हुआ है और जिस दिन नोटिस आया, उस दिन संपादकीय प्रभारी मनोज झा ने सहारनपुर ब्यूरो चीफ अवनींद्र कमल से संबंधित रिपोर्टर अजय यादव को बाहर का रास्ता दिखाने का निर्देश दिया। लेकिन अजय यादव ब्यूरो प्रभारी का कमाऊ पूत है और उसे ऐसे कारनामों की खुली छूट है।

ब्यूरो प्रभारी ने जब रिपोर्टर अजय यादव से पूछा तो उसने कह दिया कि अगर कोर्ट में दोष सिद्ध भी होता है तो वह 50 हजार रुपये अपनी जेब से जमा कर देगा। रिपोर्टर के इस कथन के बाद पैसे कोर्ट में जमा करने की नौबत तो नहीं आई, अलबत्ता मेरठ से लेकर सहारनपुर तक इस रकम को वसूल लिए जाने की चर्चाएं जोरों पर हैं। यह पहला मौका है जब मेरठ यूनिट के किसी जिले से संपादकों, मालिकों को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में पेश होने का नोटिस भेजा गया है। इस मामले में मालिकों को यही बताया गया है कि रिपोर्टर अजय यादव को हटा दिया गया है, लेकिन वह बदस्तूर काम और इंतजाम कर रहा है, रोज बाइलाइन खबरें लिख रहा है। ऐसा इसलिए कि बात आई-गई हो जाए और मामला भी रफादफा कर दिया जाए।

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

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