औरंगाबाद। पिछले साल अगस्त महीने से प्रारंभ हुए दैनिक भास्कर में आलम ये है कि कोई भी हिन्दी जानने वाला पत्रकार ज्यादा दिन नौकरी नहीं कर पा रहा है। मध्य प्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार और जबलपुर के विभिन्न अखबारों में अपने सेवाएं दे चुके राजेन्द्र तिवारी के बाद भोपाल के अनिल बिहारी श्रीवास्तव इस समय यहां की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। लेकिन समझा जा रहा है कि वे भी अपने मातहत समाचार संपादक के व्यवहार को लेकर खासे परेशान बताए जा रहे हैं। वे कभी भी अपने पद से इस्तीफा दे सकते हैं।
ऐसी खबर हैं कि मालिक मनमोहन अग्रवाल विकल्प के तौर पर किसी और की तलाश कर रहे हैं। हाल ही में फ्री प्रेस भोपाल में रहे एसके झा को संतोष सोलंकी के स्थान पर यूनिट हेड की जिम्मेदारी सौंपी गई है। हिन्दी के कई पत्रकारों का दैनिक भास्कर से चले जाना दैनिक भास्कर के मालिकों के लिए नागवार गुजर रहा है। वे पता लगा रहे हैं कि आखिर क्या वजह है जो बाहरी लोग यहां आकर टिक नहीं पा रहे हैं। इसके पीछे के रहस्य के बारे में जानकारी मिल रही है कि एनई स्थानीय पत्रकारों की एक लाबी बनाकर किसी बाहरी व्यक्ति को अधिक समय तक न टिकने देने की योजना बना रखी है, जिसे लेकर सभी परेशान बताए जा रहे हैं।
एक पत्रकार द्वारा भेजा गया पत्र.





