हिंदुस्तान अखबार में मध्ययुगीन अनाचार फैला हुआ है. प्रबंधन ने कत्लेआम करने वाले तानाशाह जमींदार / सामंत का रूप धारण कर लिया है. जिसे चाहो निकालो, ट्रांसफर करो, धमकाओ, आफिस से बाहर कर दो… दर्जनों बुजुर्ग और दशकों से जुड़े कर्मचारियों का बिहार के कई एडिशनों से यूपी-उत्तराखंड के कई एडिशनों में तबादला कर दिया गया ताकि ये लोग परेशान होकर खुद इस्तीफा दे दें.
ऐसे ही दो पीड़ितों ने अपने साथ किए गए दुर्व्यवहार की शिकायत कानपुर स्थित श्रम आयुक्त के आफिस में लेबर कमिश्नर शालिनी प्रसाद से की है. इन लेबर डिपार्टमेंट की स्थिति मीडिया हाउसों के सामने क्या है, यह तो आप भी जानते हैं, सो इस डिपार्टमेंट से बहुत आशावादी तो नहीं हुआ जा सकता, लेकिन यह जरूर देखा जा सकता कि आखिर इस कंप्लेन पर लेबर डिपार्टमेंट ने क्या जांच की और क्या कार्रवाई की. नीचे वो पत्र है जो हिंदुस्तान के पीड़ितों ने लेबर कमिश्नर को लिखा है.

शोभना भरतिया और शशि शेखर के इशारे पर किस तरह हिंदुस्तान के एचआर डिपार्टमेंट के गुर्गे इन कर्मियों को प्रताड़ित कर रहे हैं, उसकी दास्तान भी इस पत्र में है… पढ़िए और दूसरों को पढ़ाइए, क्योंकि इन दैत्याकार मीडिया हाउसों के अत्याचार व अनाचार के खिलाफ बोलने वाला कोई नहीं है, आवाज उठाने वाला कोई नहीं है, खबर छापने वाला और खबर दिखाने वाला कोई नहीं है.. पत्रकार व गैर-पत्रकार संगठन इस पर कुछ कहेंगे, इसकी भी उम्मीद कम है… अब सहारा सोशल मीडिया, वेब, ब्लाग के साथियों का ही है..
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