शिमला प्रेस क्लब का विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। क्लब के सालाना चुनाव 13 अक्तूबर 2009 को हुए थे। कायदे से नए चुनाव 13 अक्तूबर 2010 से पहले हो जाने चाहिए थे। अब अढ़ाई साल से ऊपर हो चले हैं और चुनावों पर प्रश्नचिन्ह बरकरार है। इसी बीच क्लब में वित्तीय व अन्य अनियमितताओं के साथ-साथ हजारों रूपयों के गबन के आरोप भी सामने आए। इन सबको लेकर शिमला प्रेस क्लब के लगातार पांच बार अध्यक्ष रह चुके वरिष्ठ पत्रकार कृष्णभानु ने दो अलग-अलग पत्र लिखकर मामला पत्रकार समाज के सामने उठाया। पत्र मौजूदा अध्यक्ष धनंजय शर्मा को लिखे गए, जिसके जवाब में उन्होंने कृष्णभानु को क्लब से निकालने की धमकी दे डाली। नतीजतन कृष्णभानु ने धंनजय शर्मा पर एक और ‘खतबम’ दाग दिया। नीचे प्रस्तुत है, कृष्णभानु द्वारा धनंजय शर्मा को लिखा पत्र:-
श्री धनंजय शर्मा
अध्यक्ष ( ? )
प्रेस क्लब ऑफ शिमला
पदमदेव कॉम्पलेक्स (धरातल मंजिल)
दि रिज, शिमला (हि.प्र.)
प्रिय धनंजय,
आपका 2 जून 2012 का पत्र मुझे 15 जून को प्राप्त हुआ। आपने मुझे कड़ी कार्रवाई की धमकी दी है। आपका यह पत्र ‘चोरी और सीना जोरी’ की कहावत चरितार्थ कर रहा है। प्रेस क्लब शिमला में जारी अनियमितताओं के लिए आप पांव के नाखुन से लेकर सिर की चोटी के अंतिम छोर तक पूरी तरह लथपथ हैं। प्रमाण सामने भी आ चुके हैं।
31.05.2012 और 05.06.2012 के पत्रों में वितीय अनियमितताओं को लेकर जो आरोप लगाए हैं, मैं उनपर पूरी तरह कायम हूँ। चुनौती देता हूं कि हिम्मत है तो मुझ पर मानहानि का मुकदमा दायर करें। खामख्वाह गीदड़ भभकियां देकर स्वयं को गीदड़ साबित न करें। 31.5.2012 और 05.06.2012 के पत्रों की फोटो प्रतियां इस पत्र के साथ आपको फिर भेज रहा हूं। इसे गौर से पढ़ें और बिंदुबार जवाब दें। अन्यथा कानूनी कार्रवाई का सामना करने के लिए तैयार रहें।
उपरोक्त पत्रों में लगाए गए आरोप सत्य हैं। इनके अलावा भी आप क्लब की उपविधि तथा दि हिमाचल प्रदेश सोसायटी रजिस्ट्रेशन एक्ट, 2006 (XX1 of 1860) की उल्लंघना के घोर आरोपी हैं। क्लब की उपविधि की धारा (4)(a) (b) का आपने खुला उल्लघंन किया है। इसके अलावा उपविधि की धारा (27) (b) की भी आपने विगत अढ़ाई साल में धज्जियां उड़ाई हैं। अब आप उपविधि की धारा 32 (1) की भी अनदेखी करने जा रहे हैं।
यही नहीं, बल्कि आप पिछले लगभग अढ़ाई साल से सोसायटीज़ रजिस्ट्रेशन एक्ट की धारा 20 (1) (2) तथा (3) का भी जानबूझकर उल्लंघन कर रहे हैं। इसके लिए आपके खिलाफ एक्ट की धारा 33 (1) (a) (b) के तहत कड़ी कार्रवाई की जा सकती है। आपने अधिनियम 2006 की धारा 35 (1) का भी उल्लंघन कर गंभीर अपराध किया है। इन सभी अनियमितताओं के लिए आपके खिलाफ अधिनियम की धारा 39 (3) (a) के तहत कड़ी कार्रवाई की मांग की जा सकती है। अधिनियम की धारा 41 (1) (a) (b) (c) के तहत आपको पदच्युत भी किया जा सकता है। अनियमितताओं की सूची क्योंकि लंबी है, इसलिए उपरोक्त अधिनियम के तहत आपको पदच्युत कर प्रशासक की नियुक्ति के लिए कभी भी सिफारिश की जा सकती है।
सुना है कि 27 जून 2012 को क्लब का साधारण अधिवेशन बुलाया गया है। इसे देखते हुए मैंने आपके विरूद्ध प्रस्तावित एफआईआर और अन्य कानूनी कार्रवाई स्थगित कर दी है। पुनः बता रहा हूं कि जो आरोप मैंने लगाए हैं, मैं उन पर कायम हूँ। अतः आपसे एक बार फिर कहा जाता है कि जो गंभीर आरोप आप पर लगाए गए हैं, उनका बिंदुवार जवाब दें। याद दिला दूं कि मैं इस क्लब का लगातार पांच बार अध्यक्ष रहा हूं। इसे मैंने और मेरे मित्रों ने लहू से सींचा है, इसलिए आपके नेतृत्व में इसे कदापि बरबाद नहीं होेने दिया जाएगा। मैं लम्बी-छोटी, पतली-मोटी सभी तरह की कानूनी लड़ाई को तैयार बैठा हूँ। साहस दिखाएं और छेड़कर देखें।
आपका शुभचिंतक
(कृष्ण भानु)
पूर्व अध्यक्ष
प्रतिलिपिः
1. क्लब की संचालन परिषद के सभी सदस्यों को सूचनार्थ।
2. शिमला के सभी वरिष्ठ पत्रकार सदस्यों को सूचनार्थ।





