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धोखाधड़ी व फर्जीवाड़े के खिलाफ ‘प्राण मीडिया’ में हंगामा शुरू

मीडिया शिक्षा के नाम पर खुले संस्‍थान छात्रों को अच्‍छे-अच्‍छे सब्‍जबाग दिखाकर और प्‍लेसमेंट की गारंटी देकर फंसाते हैं और जब कोर्स पूरा हो जाता है तो उन्‍हें दर दर की ठोकरें खाने के लिए छोड़ देते हैं. ऐसा ही हाल नोएडा से संचालित हो रहे प्राण'स मीडिया संस्‍थान का है. इस संस्‍था के छात्रों ने आरोप लगाया है कि यहां पर शत प्रतिशत प्‍लेसमेंट की गारंटी दी जाती है लेकिन जब कोर्स पूरा हो जाता है तो संस्‍थान के एमडी निखेल प्राण उन लोगों से सीधे मुंह बात तक नहीं करते, प्‍लेसमेंट कराना तो दूर की बात है.

मीडिया शिक्षा के नाम पर खुले संस्‍थान छात्रों को अच्‍छे-अच्‍छे सब्‍जबाग दिखाकर और प्‍लेसमेंट की गारंटी देकर फंसाते हैं और जब कोर्स पूरा हो जाता है तो उन्‍हें दर दर की ठोकरें खाने के लिए छोड़ देते हैं. ऐसा ही हाल नोएडा से संचालित हो रहे प्राण'स मीडिया संस्‍थान का है. इस संस्‍था के छात्रों ने आरोप लगाया है कि यहां पर शत प्रतिशत प्‍लेसमेंट की गारंटी दी जाती है लेकिन जब कोर्स पूरा हो जाता है तो संस्‍थान के एमडी निखेल प्राण उन लोगों से सीधे मुंह बात तक नहीं करते, प्‍लेसमेंट कराना तो दूर की बात है.

मास कम्‍युनिकेशन एवं मास मीडिया के शिक्षा के नाम पर तमाम ऐसे संस्‍थान संचालित हो रहे हैं, जो अपने छात्रों को एडमिशन के समय शत प्रतिशत नौकरी की गारंटी देते हैं, इसके एवज में वे उनसे मोटी रकम वसूलते हैं. और जब कोर्स पूरा हो जाता है तो छात्रों को दूध की मक्‍खी की तरह निकाल कर फेंक दिया जाता है. कई बार संस्‍थान का चक्‍कर लगाने के बाद छात्र खुद थक-हार कर बैठ जाते हैं. पर इन मीडिया संस्‍थानों की दुकानदारी चलती रहती है. चमक-धमक के चक्‍कर और नौकरी की गारंटी को देखते हुए इन संस्‍थानों में एडमिशन लेने वाले मोटी फीस चुकाने के बाद धोखा के अलावा कुछ नहीं पाते हैं.

ऐसे ही एक मीडिया शिक्षा संस्‍थान प्राण'स के छात्रों का कहना है कि इस संस्‍थान के एमडी निखेल पाण ने अपनी वेबसाइट www.pran.in पर कुछ पुराने छात्रों की तस्‍वीर लगाई और उस पर ये लिखा है कि इन्‍हें यहां से जी न्‍यूज, आजतक जैसे चैनलों में प्‍लेसमेंट दिलवाया गया, पर यह बात सरासर झूठ है. दो-तीन दिन पहले इस बात को लेकर इंस्‍टीट्यूट में काफी हंगामा हुआ तो इन्‍होंने वो तस्‍वीरें हटा दीं. उसका कहना है कि इस संस्‍थान से पढ़ाई किए तमाम पुराने छात्र अक्‍सर प्‍लेसमेंट के लिए यहां आते रहते हैं लेकिन मैनेजमेंट उनकी एक बात नहीं सुनता है.

कुछ अन्‍य छात्रों का आरोप है कि एडमिशन के समय लम्‍बे चौड़े वादे करके छात्रों को मिस गाइड किया जाता है. इन्‍होंने अपनी वेबसाइट पर भी तमाम गलत जानकारियां दी है कि उनका संस्‍थान नम्‍बर वन मीडिया इंस्‍टीट्यूट है, शत प्रतिशत प्‍लेसमेंट की भी बात कही गई है, जबकि सच्‍चाई इसके उलट है. यहां फंसने वाले छात्रों को दरबदर की ठोकर खाना पड़ रहा है. इन आरोपों के संदर्भ में जब प्राण'स मीडिया के एमडी निखेल प्राण से बात की गई तो उन्‍होंने कहा कि आप कौन सरकारी अथार्टी की हैसियत से यह सवाल पूछ रहे हैं. इसके बाद उन्‍होंने कहा कि उन्‍हें इन आरोपों पर कोई कमेंट नहीं करना है. 

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