यूपी के बस्ती जिले से खबर है कि एक परीक्षा केंद्र पर नकल का कवरेज करके निकल रहे पत्रकारों पर कुछ बदमाशों ने हमला कर दिया, जिसमें दो पत्रकार गंभीर रूप से घायल हो गए. हालांकि इन पत्रकारों पर वसूली के भी आरोप लगाए जा रहे हैं लेकिन घटना नकल रुकवाने से उपजी नाराजगी को माना जा रहा है. पुलिस ने स्कूल प्रबंधक समेत कई लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है लेकिन अभी इस मामले में किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है.
जानकारी के अनुसार न्यूज एक्सप्रेस के संवाददाता अमृतलाल, समाचार प्लस के संवाददाता रजनीश तिवारी, अमर उजाला के फोटोग्राफर राजू, यूटीएस न्यूज के संवाददाता दिलीप उपाध्याय एवं एक अन्य पत्रकार राघवेंद्र सिंह नगर थाना क्षेत्र के एक इंटर कालेज में शिकायत होने की जानकारी मिलने पर पहुंचे. बताया जा रहा है कि इन लोगों ने डीआईओएस को भी इसकी सूचना दी. जिस पर डीआईओएस जांच के लिए इंटर कालेज के लिए चले, इसी बीच उनके आने की खबर किसी तरह लीक हो गई और प्रबंधन ने नकल रुकवा दी तथा चिट-पर्चा भी साफ करवा दिया.
डीआईओएस जब मौके पर पहुंचे तो उन्हें सब कुछ साफ सुथरा मिला. हालांकि कहा जा रहा है कि प्रबंधन ने पैसे से सभी का मुंह बंद कर रखा है इसलिए डीआईओएस कार्यालय से ही छापे की सूचना लीक करवा दी गई. खैर, इसके बाद जब डीआईओएस जांच के बाद वापस लौट गए तथा पत्रकार भी कवरेज के बाद वापस लौटने लगे तो कॉलेज से कुछ ही दूरी पर स्थित एनएच28 पर सफारी सवार बदमाशों ने सभी पत्रकारों को रोक लिया. इसी दौर आधा दर्जन बाइक पर सवार और कई लोग पहुंच गए.
इन लोगों ने पत्रकारों को चारों तरफ से घेर लिया तथा गालियां देते हुए इन लोगों को मारना-पीटना शुरू कर दिया. अमृतलाल और रजनीश पर ज्यादा हमले किए गए, जिससे इन लोगों को गंभीर अंदरुनी चोटें आईं. किसी तरह सभी पत्रकार जान बचाकर फुटहिया चौकी पहुंचे तथा इस घटना की जानकारी थानेदार सहित एसपी को भी दी. एसपी ने पत्रकारों पर हमले का मामला देखते हुए थानेदार को तत्काल मामला दर्ज करने का निर्देश दिया, जिसके बाद पत्रकारों की तहरीर पर स्कूल प्रबंधक राजेश मिश्रा समेत कई लोगों पर विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज हुआ।
हालांकि अभी तक इस मामले में किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है. पुलिस भी पूरे मामले की जांच कर रही है. पत्रकारों में इसको लेकर नाराजगी है. जिले के सभी पत्रकार संगठन डीएम और एसपी से मिलकर आरोपियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की है. दूसरी तरफ कुछ लोग इसे वसूली के मामले से जोड़कर देख रहे हैं. लेकिन सब मिलाकर यूपी में पत्रकारों पर हमले के मामले लगातार बढ़ रहे हैं. पत्रकारों की सुरक्षा भी लगातार खतरे में पड़ती जा रही है.






