छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की परिवर्तन रैली पर हमला हुआ और नुकसान हर किसी को हुआ। कांग्रेस को। बीजेपी को। देश को। पुलिस को। भले ही ये नुकसान अलग-अलग तरीकों से हुआ हो लेकिन अगर किसी को फायदा हुआ, तो वो है आईबीसी और खबर भारती चैनल को। वजूद की लड़ाई लड़ रहा खबर भारती पिछले कई महीनों से तरक्की के आसमान में उड़ना चाह रहा था लेकिन ना तो उसे मौका मिल रहा था ना वक्त की सुईयां उसके इशारे पर घुम रही थी।
सरोकारों की पत्रकारिता करने वाला ये चैनल अपने पूर्वजों की छाया और छाप से बाहर निकलकर अब तरक्की की लकीर खींच रहा है। एबीपी न्यूज, इंडिया न्यूज, एनडीटीवी, पी7, हर किसी ने सौजन्य खबर भारती लिखकर जब दरभा के दर्द को दिखाया तो क्षेत्रीय चैनल का दस्तूर बदलता चला गया। दरभा के जंगल से नोएडा के दफ्तर में पहुंचने वाली हर तस्वीर सच थी और जिंदा थी।
आईबीसी भले ही पुराना चैनल हो लेकिन नाम और पहचान की दुनिया में वो भी गुमनाम ही था। जी वालों ने नाम तो वापस ले लिया लेकिन दरभा में उसके रिपोर्टर ने जो किया वो इतिहास में दर्ज हो गया। वो तस्वीर जिसे देखकर इंसान सिर्फ हैरान हो सकता है, हैवानियत की ये तस्वीर जब दुनिया को उस रिपोर्टर ने दिखाया तो आज तक से लेकर टाइम्स नाउ तक को सौजन्य लगाना पड़ा गया।
सवाल ये नहीं है कि इस खबर ने खबर भारती और आईबीसी को नई पहचान दिलाई। सवाल बिल्कुल सीधा और सरल है। क्या राष्ट्रीय चैनल, क्षेत्रीय चैनल का मोहताज हो रहा है। बात बहस की नहीं, विचार करने की है। खैर जिस जमीन पर जवान नहीं पहुंच सके वहां इन दो चैनलों के पत्रकार ने पहुंचकर ये साबित कर दिया की यूं ही इस मुल्क से माओवादियों को नहीं हटाया जा सकता। गोलियों की गूंज के बीच सिसक रहा है आज दरभा का जंगल।
Animesh ranjan das






