छत्तीसगढ़ के दरभा घाटी में हुए नक्सली हमले की जाँच कर रही एनआईए की टीम ने कुछ स्थानीय पत्रकारों को भी जाँच के दायरे में लिया है। पत्रकारों से हमले के संबंध में प्रारंभिक जानकारी ली गई है। एनआईए की टीम इस हमले को राजनैतिक षडयंत्र मानते हुए जाँच को आगे बढ़ा रही है। इस बीच पत्रकारों से भी टीम ने हमले के संबंध में जानकारी मांगी है।
गौरतलब है कि बस्तर के जिन स्थानों में पूरी तरह नक्सलियों का कब्ज़ा है, जहाँ तक अर्धसैनिक बल नहीं पहुँच पाते वहां भी जाकर इलेक्ट्रानिक व प्रिंट मीडिया के कुछ पत्रकारों ने रिपोर्टिंग की थी। घटना के बाद लगातार ऐसे स्थानों में जाकर पत्रकार खबर दिखाते रहे। उन्हें कोई खतरा महसूस नहीं हुआ जबकि उन्ही स्थानों में नक्सलियों ने 28 लोगों को मौत के घाट उतार दिया।
इससे पहले सुकमा के कलेक्टर एलेक्स पाल मेनन के अपहरण कांड व ताड़मेटला कांड के समय भी कुछ पत्रकारों की भूमिका संदिग्ध मानी गई थी। अब ऐसे ही कुछ पत्रकारों से एनआईए की टीम पूछताछ कर रही है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार पत्रकारों के संपत्ति की जाँच भी की जा सकती है। पत्रकारों को सबसे पहले घटना की जानकारी मिलना व घटनास्थल से उनकी बेख़ौफ़ रिपोर्टिंग ने ही कई पत्रकारों को संदेह के दायरे में ला दिया है।






