Nadim S. Akhter : गुजरात दंगों के लिए 'दोषी' जिस नरेन्द्र मोदी को फेसबुक के हमारे एक वरिष्ठ पत्रकार साथी और एक प्रतिष्ठित हिन्दी चैनल के हेड ने करिश्माई कहा था, उसी नरेन्द्र मोदी को अमेरिका ने एक बार फिर वीजा देने से इनकार कर दिया है. लगता है अमेरिकी पत्रिका टाइम मैगजीन के कवर पर छपकर भी मोदी अपने 'पाप' नहीं धो पाए. दुनिया भर में अमेरिका की जो नीतियां हैं, उससे मैं सहमत नहीं हूं लेकिन मोदी के मामले में अमेरिका ने एक सुलझा फैसला लिया है. यह एक सांकेतिक फैसला है और राजनेताओं के लिए ऐसे फैसलों के बड़े मायने होते हैं. कारण ये है कि न तो मोदी अमेरिका जाने के लिए मरे जा रहे हैं और न ही इससे उनकी कुर्सी को कोई खतरा है लेकिन मोरल ग्राउंड पर नरेन्द्र मोदी और बीजेपी बैक फुट पर जरूर है. हालांकि कुछ लोग इसके लिए बराक हुसैन ओबामा के नाम में भी कुछ ढूंढ रहे हैं.. अमेरिका की विदेश नीति अलग है और मोदी पर उसका स्टैंड विदेश नीति का हिस्सा नहीं है…
नदीम एस. अख्तर के फेसबुक वॉल से साभार.





