प्रफुल्ल माहेश्वरी जी अब यूएनआई संभालेंगे, पढ़ कर आश्चर्य हुआ. अच्छे खासे चल रहे नवभारत को मध्यप्रदेश में डुबाने का श्रेय उन्हें ही जाता है. वे पहले से डूबी हुई यूएनआई को किस तरह उबारेंगे यह मूल प्रश्न है. एनबी प्लांटेशन के नाम पर निवेशकों के करोड़ों डुबाने वाले, मध्यप्रदेश वित्त निगम के करोड़ों डुबोने वाले और अपने ही स्थानीय समाज में अपनी प्रतिष्ठा डुबो चुके प्रफुल्ल जी से यूएनआई के कर्मचारी आस लगाकर झूठे ही प्रफुल्लित हो रहे हैं.
कहीं ऐसा न हो कि यूएनआई का रहा-सहा चल-अचल भी प्रफुल्ल जी के हाथों वे डूबा बैठें. यूएनआई को हथिया कर प्रफुल्ल जी शायद अपनी खोई प्रतिष्ठा की पुनर्प्राप्ति करना चाहते हैं लेकिन उनकी तरकीब यूएनआई के कर्मचारियों की कीमत पर सफल हुई तो भी उनकी कुख्याति कम नहीं होने वाली है. यदि देर न हुई हो तो यूएनआई के कर्ता-धर्ता अपने निर्णय पर पुनर्विचार करके स्वयं को और यूएनआई को बचा सकते हैं.
देवेंद्र कुमार सुरजन
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