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नवभारत टाइम्स में एक से बढ कर एक नमूने रहे हैं, सुनिए एक समाचार संपादक की दास्तान

नवभारत टाइम्स में एक से बढ कर एक नमूने रहे हैं। चीफ रिपोर्टर ने शराब के नशे में टुन्न होकर जहां आतंकी पेंटा के मारे जाने की झूठी खबर छाप दी वहीं समाचार संपादक ने फ्रांस के दिवंगत नेता ओलफ पालमे से राजीव गांधी को मिला दिया। राजीव गांधी फ्रांस की यात्रा पर जा रहे थे एजेंसी से समाचार आया था सब एडीटर ने समाचार का संपादन किया और शीर्षक लगाया- ओलफ पालमे के देश में राजीव गांधी। समाचार संपादक ने समाचार देखा तो उन्हें शीर्षक पसंद नही आया। उन्होंने संशोधन कर शीर्षक लगया- राजीव गांधी ओलफ पालमे से मिलेंगे। समाचार संपादक को पता ही नहीं था कि ओलफ पालमे की बरसों पहले हत्या हो चुकी थी। यह शीर्षक 40 पाइंट की हैडिंग में छपा तो कई लोगों का ध्यान इस पर गया।

नवभारत टाइम्स में एक से बढ कर एक नमूने रहे हैं। चीफ रिपोर्टर ने शराब के नशे में टुन्न होकर जहां आतंकी पेंटा के मारे जाने की झूठी खबर छाप दी वहीं समाचार संपादक ने फ्रांस के दिवंगत नेता ओलफ पालमे से राजीव गांधी को मिला दिया। राजीव गांधी फ्रांस की यात्रा पर जा रहे थे एजेंसी से समाचार आया था सब एडीटर ने समाचार का संपादन किया और शीर्षक लगाया- ओलफ पालमे के देश में राजीव गांधी। समाचार संपादक ने समाचार देखा तो उन्हें शीर्षक पसंद नही आया। उन्होंने संशोधन कर शीर्षक लगया- राजीव गांधी ओलफ पालमे से मिलेंगे। समाचार संपादक को पता ही नहीं था कि ओलफ पालमे की बरसों पहले हत्या हो चुकी थी। यह शीर्षक 40 पाइंट की हैडिंग में छपा तो कई लोगों का ध्यान इस पर गया।

अगले दिन माथुर जी सवेरे 11 बजे आफिस आ गए। संयोग से मैं भी उस समय आफिस में ही था। माथुर जी ने आते ही चपरासी भेज कर कंपोजिंग विभाग से रात की खबरों का बंडल मंगाया। मदद के लिए माथुर जी ने मुझे भी बुला लिया। खबरें छांट कर वह खबर निकाली तो यह कनफर्म हो गया कि राजीव गांधी को ओलफ पालमे से मिलाने का कारनामा समाचार संपादक ने ही किया है। माथुर जी ने फोन कर समाचार संपादक को तुरंत आफिस आने को कहा। लगभग आधे घंटे बाद समाचार संपादक हड़बड़ाया हुआ आया तो चपरासी ने उसे तुरंत माथुर जी के कक्ष में भेज दिया। अंदर पता नहीं क्या बात हुई मगर जब बाहर आया तो माथे पर पसीना झिलमिला रहा था। हालांकि बिल्डिंग पूरी तरह वातानुकूलित थी। इसके बाद कई दिन तक समाचार संपादक आफिस नहीं आया। ऐसा ही एक और कारनामा समाचार संपादक ने किया और चार केंद्रीय मंत्रियों को भूतपूर्व बना दिया। नरसिंह राव के जमाने में चार केंद्रीय मंत्री कांग्रेस कार्य समिति में चुने गए मगर पार्टी के आदेश पर उन्होने कार्य समिति से इस्तीफा दे दियां समाचार संपादक ने शीर्षक लगया-  चार भूतपूर्व केंद्रीय मंत्रियों का कांग्रस कार्यसमिति से इस्तीफा। यह शीर्षक भी काफी चर्चित रहा और संपादक जी ने इस पर भी समाचार संपादक को खरी खोटी सुनाई और सारे चीफ सब से आग्रह किया कि समाचार संपादक जो शीर्षक लगाएं, उसे देख लिया करें।

यह सज्जन संघ के एक बड़े नेता की सिफारिश पर मेरे बाद नभाटा में आए थे मगर अपने आका के आशीर्वाद से अपने सब सीनियर्स को लांघ कर कुछ ही समय में समाचार संपादक बन गए। इनकी योग्यता का नमूना तो सब देख ही चुके थे मगर ये अपने आप को बहुत बुद्धिमान मानते थे। पता नहीं इन्हें क्या बीमारी थी कि हर समय सूं सूं करते रहते थे। पेज मेकिंग विभाग में जब भी ये जाते तो दो तीन शरारती लड़के सूं सूं करने लगते। अब उनसे यह कुछ कह तो नहीं सकते थे सो चुपचाप चले आते। विभाग में कोई व्यक्ति नजले के कारण नाक सुड़कता था तो ये समझते कि यह मेरी नकल उतार रहा है। अपनी इस आदत के कारण यह हर समय टेंशन में रहते थे। समाचार संपादक ने एक और कारनामा किया जिसे लेकर कर भी अखबार की काफी छीछालेदर हुई और साथ इन्हें भी काफी खरी खोटी सुननी पड़ी।

मदर टेरेसा की हालत काफी गंभीर थी। उनकी मृत्यु की आशंका के मद्देनजर समाचार संपादक ने एक सब एडीटर से उनके बारे में एक लेख एडवांस में लिखवा लिया। मगर बाद में मदर के स्वास्थ्य में सुधार हो गया तो वह लेख जो कंपोज करा लिया था, समाचार संपादक ने अपनी फाइल में रख लिया। इसके काफी दिन बाद तक मदर जीवित रहीं। जिस दिन उनकी मृत्यु हुई तो इन श्रीमान ने वही पुराना लेख बिना अपडेट किए पेज पर चिपका दिया। लेख में देश काल की कई बातें बदल गई थीं, कुछ नाम भी अब नहीं रहे थे। बेचारा लेखक जगह जगह सफाई देता फिरा और एक दिन उसने नौकरी छोड़ दी। पूछने पर उसने बताया कि ऐसे मूर्ख बॉस के साथ नौकरी करना अपने को अपमानित करना है। यही नहीं, और भी कई युवक समाचार संपादक की मूर्खताओं के चलते नौकरी छोड़ कर अन्यत्र चले गए।

संभवतः इनके आका का आग्रह था कि इन्हें संपादक बना दिया जाए। दिल्ली में तो यह संभव नहीं था सो मालिकों ने सोचा कि इन्हें जयपुर का संपादक बना दिया जाए। इस बारे में बात करने के लिए रमेश जी ने इन्हें अपने कक्ष में बुलाया। पहले तो यह रमेश जी का बुलावा सुनते ही घबरा गए। धड़कते दिल से उनके कक्ष में पहुंचे तो रमेश जी ने उनके सामने जयपुर का प्रस्ताव रखा। प्रस्ताव सुनते ही इनका बी. पी. हाई हो गया और रमेश जी के कक्ष में ही उल्टी कर दी। रमेश जी तुरंत कक्ष से बाहर आ गए और चपरासी से समाचार संपादक को उसकी सीट पर भेजने को कहा। सफाई कर्मी कक्ष की सफाई में जुट गया। रमेश जी का चपरासी इन्हें विभाग में ले कर आया। इनकी सूरत देख कर सब समझ गए कि मामला गड़बड़ है। रमेश जी के चपरासी के पीछे विभाग का एक चपरासी गया और आ कर आंखों देखा हाल सुनाया। बाद में और भी कई लोग उधर गए तो यह सब को पता चल गया कि श्रीमान जी रमेश जी के कक्ष को गंदा कर आए हैं। बाद में जयपुर वाली बात का भी पता चल गया। कुल मिला कर इन सब बातों के चलते यह महाशय रिटायरमेंट तक यहीं जमे रहे।

लेखक डॉ. महर उद्दीन खां वरिष्ठ पत्रकार और स्तंभकार हैं. रिटायरमेंट के बाद इन दिनों दादरी (गौतमबुद्ध नगर) स्थित अपने घर पर रहकर आजाद पत्रकार के बतौर लेखन करते हैं. उनसे संपर्क 09312076949 या [email protected] के जरिए किया जा सकता है. डॉ. महर उद्दीन खां का एड्रेस है:  सैफी हास्पिटल रेलवे रोड, दादरी जी.बी. नगर-203207


अन्य संस्मरणों को पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें: भड़ास पर डा. महर उद्दीन खां

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