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सुख-दुख...

नशे में धुत कैमरामैन चिल्लाया- मुझमें क्या कमी है जो तू इस पीआरओ के साथ घूम रही है

भारतीय वायु सेना के दो विमान श्रीनगर के हवाई अड्डे पर खड़े थे. दिल्ली से गये पत्रकारों के दल को भारतीय वायु सेना ने भोज दिया था. हवाई पट्टी पर ही दोपहर के भोज का प्रबंध था. वायु सेना के अधिकारी पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे. इतने में ही कुछ शोर शराबा हो गया. हिन्दुस्तान टाइम्स के कैमरामैन संतोष गुप्ता ने एक दुबली पतली पत्रकार का हाथ पकड़ लिया. उसका हाथ पकड़ कर खींचने लगा और कहने लगा कि मुझमें क्या कमी है जो तू इस एयरफोर्स के पीआरओ कौल के साथ घूमती फिर रही है. आज तू मेरे साथ सोएगी. वायुसेना के पीआरओ से कहा- साले दो दो औरतों को घुमा रहा है. मैं देखता हूं कि तू इसे कैसे अपने साथ ले जाएगा, यह तो आज मेरे साथ चलेगी और मेरे साथ ही सोएगी. यह दृश्य आश्चर्यजनक और शर्मनाक था.

भारतीय वायु सेना के दो विमान श्रीनगर के हवाई अड्डे पर खड़े थे. दिल्ली से गये पत्रकारों के दल को भारतीय वायु सेना ने भोज दिया था. हवाई पट्टी पर ही दोपहर के भोज का प्रबंध था. वायु सेना के अधिकारी पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे. इतने में ही कुछ शोर शराबा हो गया. हिन्दुस्तान टाइम्स के कैमरामैन संतोष गुप्ता ने एक दुबली पतली पत्रकार का हाथ पकड़ लिया. उसका हाथ पकड़ कर खींचने लगा और कहने लगा कि मुझमें क्या कमी है जो तू इस एयरफोर्स के पीआरओ कौल के साथ घूमती फिर रही है. आज तू मेरे साथ सोएगी. वायुसेना के पीआरओ से कहा- साले दो दो औरतों को घुमा रहा है. मैं देखता हूं कि तू इसे कैसे अपने साथ ले जाएगा, यह तो आज मेरे साथ चलेगी और मेरे साथ ही सोएगी. यह दृश्य आश्चर्यजनक और शर्मनाक था.

वायुसेना के अधिकारी संतोष गुप्ता की इस हरकत से अत्यंत नाराज थे. परंतु मुंह नहीं खोल रहे थे. मैंने आगे बढ़ कर संतोष गुप्ता से उस लड़की को छुड़वाया और खींच कर दूसरी और ले गया. संतोष गुप्ता तो नशे में धुत था, वह फिर उस लड़की की ओर भागा और कहने लगा- साली, बता मुझमें क्या कमी है. मैंने संतोष गुप्ता को पकड़ कर समझाया कि यह सेना का क्षेत्र है यहां ऐसी हरकतें नहीं करते. उसने फिर कहा- मुझे आज इसे अपने साथ ले जाना है, मैं आज इसके साथ सोउंगा. मैं संतोष गुप्ता को खींच कर दूसरी ओर ले जाने लगा, दूसरे कुछ और साथी भी उसे रोक कर दूसरी ओर ले गये.

जब मामला शांत हो गया तो इन दोनों महिला पत्रकारों को दूसरे जहाज में बैठा दिया. खाना खाकर सभी विमानों पर सवार होकर दिल्ली हवाई अड्डे पर उतर कर अपने अपने घरों की ओर चल दिए. आज के लिए इस यात्रा के बारे में छापने की मनाही वायुसेना ने की थी. इस यात्रा वृतांत को दूसरे दिन छापने के लिए कहा गया था. सभी ने इसका पालन भी किया था. क्योंकि अगर खबर को एक समाचार पत्र भी छाप देता तो दूसरे समाचार पत्र फिर अपने समाचार पत्र में नहीं छापेंगे. इसलिए उस दिन छापने की मनाही थी. दूसरे दिन सभी समाचार पत्रों ने वायुसेना के करतबों और वायुसेना का जम्मू-कश्मीर में क्या योगदान है, इसके बारे में छापा.

मैं श्रीनगर से वायुसेना के इस टूर से आने के बाद हिन्दुस्तान टाइम्स के फोटो प्रमुख त्यागराजन जी से मिला और उन्हें उनके कैमरामैन की करतूतों के बारे में बताया. उन्होंने संतोष गुप्ता को बुलाकर उसके खिलाफ कार्रवाई की और उसके सेना के ऐसे किसी भी आयोजन में शामिल होने पर प्रतिबंध लगा दिया.

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हिन्दुस्तान टाइम्स के एक पत्रकार उपेन्द्र वाजपेयी थे, जो पत्रकार कम थे. वह पत्रकारिता के नाम पर बिल्डर थे. उन्होंने प्रेस एनक्लेव और गुड़गांव के पास मीडिया हाउसिंग सोसाइटी बना कर पैसा कमाया. उनके पास पंडारा रोड में दो मकान थे. एक तो मीडिया हाउसिंग सोसाइटी के नाम पर और दूसरी पत्रकारिता के नाम पर. एक दिन उन्होंने पंडारा रोड पर अपने निवास पर एक नेता को दावत दी, जिसमें कुछ पत्रकारों को भी बुलाया था. पत्रकारों में चन्द्र लाल चन्द्राकर, केरला कौमुदी के ब्यूरोचीफ वी.एन. नायर और आनंद बाजार पत्रिका के कार्टूनिस्ट कुट्टी साहब शामिल थे. नेता जी तो खाना खाकर चले गए. इतने में एक नौकर आया, उसने चन्द्राकर जी से कहा कि आपको अंदर वाजपेयी जी बुला रहे हैं. चन्द्राकर जी ने उस नौकर से कहा- ''वाजपेयी से कहो, नर्स नहीं लौंडा चाहिए''. मैंने वी.एन.नायर से पूछा, नायर साहब, यह नर्स और लौंडा क्या है. वह हंसने लगे. कुट्टी साहब ने मुझसे कहा अब तुम घर जाओ, तुमने खाना खा लिया, शोर करोगे. नायर साहब ने भी इशारा किया कि अब तुम यहां से निकल लो. दूसरे दिन मैं फिर नायर साहब के कार्यालय में पहुंचा. मेरे साथ उनके रिश्ते छोटे भाई बड़े भाई के समान थे. उनसे पूछा कि यह कल क्या मामला था, तो नायर साहब ने मुझे उपेन्द्र वाजपेयी की गतिविधियों के बारे में बताया कि उपेन्द्र वाजपेयी नेताओं को खुश करके काम कराते हैं.

…जारी…

(इसे भी पढ़ सकते हैं- अखबार मालिक विश्वबंधु गुप्ता की काम पिपासा और लोहिया जी का शोर)

लेखक विजेंदर त्यागी देश के जाने-माने फोटोजर्नलिस्ट हैं और खरी-खरी बोलने-कहने-लिखने के लिए चर्चित हैं. पिछले चालीस साल से बतौर बिजेंदर त्यागीफोटोजर्नलिस्ट विभिन्न मीडिया संगठनों के लिए कार्यरत रहे. कई वर्षों तक फ्रीलांस फोटोजर्नलिस्ट के रूप में काम किया और आजकल ये अपनी कंपनी ब्लैक स्टार के बैनर तले फोटोजर्नलिस्ट के रूप में सक्रिय हैं. ''The legend and the legacy : Jawaharlal Nehru to Rahul Gandhi'' नामक किताब के लेखक भी हैं विजेंदर त्यागी. यूपी के सहारनपुर जिले में पैदा हुए विजेंदर मेरठ विवि से बीए करने के बाद फोटोजर्नलिस्ट के रूप में सक्रिय हुए. विजेंदर त्यागी को यह गौरव हासिल है कि उन्होंने जवाहरलाल नेहरू से लेकर अभी के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की तस्वीरें खींची हैं. वे एशिया वीक, इंडिया एब्राड, ट्रिब्यून, पायनियर, डेक्कन हेराल्ड, संडे ब्लिट्ज, करेंट वीकली, अमर उजाला, हिंदू जैसे अखबारों पत्र पत्रिकाओं के लिए काम कर चुके हैं. विजेंदर त्यागी से संपर्क 09810866574 के जरिए किया जा सकता है.

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