''गुप्त ज्ञान'' और ''काम शास्त्र'' जैसी फिल्मों का निर्देशन कर भारतीय दर्शकों को पहली बार यौन शिक्षा से फिल्मों के माध्यम से परिचित करने वाले वरिष्ठ फिल्मकार, लेखक और पत्रकार प्रेम कपूर का 22 दिसंबर की सुबह 8 बजे मुंबई में गोरेगाँव के रूबी अस्पताल में निधन हो गया. वे 83 वर्ष के थे. 1962 में टाइम्स ऑफ़ इंडिया समूह की पत्रिका सारिका से बतौर पत्रकार अपने करियर की शुरुआत करने वाले प्रेम कपूर ने धर्मयुग के सम्पादक मंडल में भी काम किया.
कोई एक दशक तक सक्रिय पत्रकारिता करने के बाद फिल्मों की दुनिया में निर्माता निर्देशक और लेखक के तौर पर क़दम रखा. 1968 में इलाहाबाद पर बनायी गयी उनकी डोक्यूमेंट्री ''त्रिवेणी'' काफी चर्चित रही जिसमें सुमित्रा नंदन पन्त, हरिवंश राय बच्चन, फ़िराक़ गोरखपुरी और नरेन्द्र शर्मा जैसे कवियों की पंक्तियों के माध्यम से इस शहर की खूबियों पर रोशनी डाली गई थी.
कमलेश्वर के उपन्यास पर आधारित उनकी फिल्म ''बदनाम बस्ती'' भी काफी चर्चित रही और पुरस्कृत भी हुई. इंग्लैण्ड में कई वर्ष
महान फिल्मकार सर रिचर्ड एटनबरो के साथ बतौर सहायक काम करने वाले प्रेम कपूर महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू, आचार्य विनोबा भावे, लाल बहादुर शास्त्री और इंदिरा गांधी पर बनाई गई अपनी अनूठी फिल्मों के लिए भी जाने जाते हैं.
इंग्लैण्ड में रहकर ''फिल्म्स फ्रॉम इण्डिया'' नामक कम्पनी की स्थापना करने वाले प्रेम कपूर संभवतः एक मात्र ऐसे भारतीय फिल्मकार हैं जिनकी किसी फिल्म के लिए सर रिचर्ड एटनबरो ने वोईस ओवर किया हो. यह फिल्म थी ''टू मानसून्स'' जो कि बतौर फिल्मकार उनके जीवन के महत्वपूर्ण कामों में से एक है. अपने जीवन काल में प्रेम कपूर ने एक लेखक, निर्माता और निर्देशक के तौर पर भरपूर काम किया और हमेशा एक सरल और निश्छल व्यक्ति के तौर पर जाने गए. प्रेम कपूर के पुत्र हरिओम कपूर हैं. हरिओम से संपर्क 09892028220 के जरिए किया जा सकता है.






