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नहीं होगा राज्‍य मान्‍यता प्राप्‍त संवाददाता समिति का चुनाव!

: चुनाव समिति के अध्‍यक्ष ने प्रक्रिया से खुद को अलग किया : उत्तर प्रदेश राज्य मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति के चुनावों को लेकर संशय बरकरार है। जहां एक तरफ अपना कायर्काल पूरा कर चुके कमेटी के पदाधिकारी अभी भी चुनाव न होने देने पर अड़े हैं और इसे टालने की हर संभव जुगत लगा रहे हैं, वहीं चुनाव कराने पर अड़े राज्य मुख्यालय के संवाददाता अब जनरल बाडी की मीटिंग बुलाने पर विचार कर रहे हैं। चुनाव कराने के लिए बनायी गयी समिति ने संवाददाता समिति के अध्यक्ष ने दुर्व्यवहार का आरोप लगाते हुए खुद को सारी प्रक्रिया से विरत कर लिया है। चुनाव कराने के लिए तय किया गया शेड्यूल बीत चुका है और चुनाव न कराने पर अड़े पदाधिकारी जनरल बाडी की बैठक तक बुलाने में हीलाहवाली कर रहे हैं।

: चुनाव समिति के अध्‍यक्ष ने प्रक्रिया से खुद को अलग किया : उत्तर प्रदेश राज्य मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति के चुनावों को लेकर संशय बरकरार है। जहां एक तरफ अपना कायर्काल पूरा कर चुके कमेटी के पदाधिकारी अभी भी चुनाव न होने देने पर अड़े हैं और इसे टालने की हर संभव जुगत लगा रहे हैं, वहीं चुनाव कराने पर अड़े राज्य मुख्यालय के संवाददाता अब जनरल बाडी की मीटिंग बुलाने पर विचार कर रहे हैं। चुनाव कराने के लिए बनायी गयी समिति ने संवाददाता समिति के अध्यक्ष ने दुर्व्यवहार का आरोप लगाते हुए खुद को सारी प्रक्रिया से विरत कर लिया है। चुनाव कराने के लिए तय किया गया शेड्यूल बीत चुका है और चुनाव न कराने पर अड़े पदाधिकारी जनरल बाडी की बैठक तक बुलाने में हीलाहवाली कर रहे हैं।

गौरतलब है कि राज्य मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति का कायर्काल 10 जनवरी को ही समाप्त हो चुका है। कायर्काल खत्म होने से पहले ही समिति ने दरियादिली दिखाते हुए समय से चुनाव कराने की मंशा जताते हुए वरिष्ठ पत्रकार अजय कुमार की अध्यक्षता में एक चुनाव समिति का गठन कर दिया था। इस समिति के अन्य अधिकारी सर्वेश कुमार सिंह, गोलेश स्वामी और अंबरीश कुमार थे। विधान सभा चुनावों के मद्देनजर संवाददाता समिति के पदाधिकारियों ने चुनाव मार्च में कराने का अनुरोध किया था, जिसे अजय कुमार की अध्यक्षता वाली समिति ने स्वीकार कर लिया था। अजय कुमार ने अपने सहयोगियों के साथ 2 अप्रैल को बैठक कर चुनाव का कायर्क्रम घोषित कर दिया। इसके तरह 22 अप्रैल को मतदान होना था।

चुनाव कार्यक्रम की घोषणा होते ही संवाददाता समिति के पदाधिकारी गण इसे टलवाने में जुट गए। बिना किसी पंजीकरण के और केवल परंपराओं व मान्यताओं के आधार पर काम करने वाली इस समिति में कथित नियमावली जिसे वतर्मान पदाधिकारियों (जिनका कार्यकाल 10 जनवरी को ही पूरा हो चुका है) ने कुल जमा 30-35 लोगों की सहमति से लागू किया जाना बताया है, के आधार पर चुनाव कराने की बात कही। इतना ही जो इतिहास में कभी नहीं हुआ ( चुनाव समिति के अधिकारियों को नियुक्ति पत्र जारी करना) उसका हवाला दिया जाने लगा। संवाददाता समिति के निवर्तमान अध्यक्ष ने खुद अपने बनाए चुनाव अधिकारी पर इस बार के चुनाव में लड़ रहे एक प्रत्याशी के दबाव में काम करने का आरोप मढ़ दिया। जाहिर है इन आरोपों से आहत चुनाव समिति ने खुद को सारी प्रक्रिया से अलग किया और एक पत्र लिख कर कहा कि उनकी निष्पक्षता और कमर्ठता निवर्तमान अध्यक्ष के लिए कष्टकारी हो रही है लिहाजा वो चुनावी प्रक्रिया से खुद को अलग करते हैं।

इस सारे घटनाक्रम से पहले चार दर्जन मान्यता प्राप्त संवाददाता चुनाव समिति को एक पत्र लिख कर तय समय पर चुनाव कराने और बरसों से चली आ रही मान्यताओं व परंपरा के आधार पर ही चुनाव कराने की मांग कर चुके थे। संवाददाताओं के उक्त पत्र को देखते हुए चुनाव समिति के निवर्तमान पदाधिकारियों से अनुरोध किया था कि अगर उन्हें चुनाव कार्यक्रम व प्रक्रिया पर कोई आपत्ति हो तो जनरल बाडी की मीटिंग बुला कर इसमें सुधार कर लें वरना चुनाव पूर्व घोषित कार्य़क्रम के हिसाब से ही होंगे। मगर जनरल बाडी की मीटिंग बुलाने से डर रही निवर्तमान पदाधिकारियों की टीम ने एसा कुछ नहीं किया। अब जबकि सभी मान्यता प्राप्त संवाददाता जल्दी से जल्दी चुनाव चाहते हैं तो इसे टलवाने में जुटे लोगों ने संवाददाताओं से चुनाव अधिकारी के नाम पर रायशुमारी का शिगूफा छेड़ दिया है। चुनाव को बाधित करने वाले तत्व नयी सरकार में अपने हैसियत दिखाने की गरज से इसे टालना ही मुफीद मानते हैं। उधर राज्य मुख्यालय पर मान्यता प्राप्त संवाददाताओं का एक बड़ा समूह कायर्काल पूरा कर चुके पदाधिकारियों के जनरल बाडी मीटिंग न बुलाने की दशा में खुद से मीटिंग बुलाने पर विचार कर रहा है।

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

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