Abhishek Srivastava : तो लीजिए साहेबान, साहित्य की दुनिया में जला है नया चिराग जिसमें तेल की जगह शराब है। शराब व्यवसायी और रियल एस्टेट के सरताज मरहूम पोन्टी चड्ढा की वेव कंपनी हिंदुस्तान टाइम्स अखबार के सहयोग से प्रस्तुत करती है दिल्ली लिटरेचर फेस्टिवल 2014…! इस मेले की शुरुआत श्री राजेंद्र यादव को श्री नामवर सिंह द्वारा श्रद्धांजलि से होगी।
अदभुत संयोग! इसके बाद तमाम किस्म की बहसों में आप कुसुम अंसल से लेकर विश्वनाथ त्रिपाठी तक कई हिंदीजीवियों को पाएंगे। फिर अंत में महान पत्रकार बरखा दत्त इस मौसम के सबसे बड़े लेखक, भ्रष्टाचार के क्रूसेडर और सबसे ईमानदार मानव अरविंद केजरीवाल से उनकी पुस्तक ''स्वराज'' पर चर्चा करेंगी। एंट्री मुफ्त, मुफ्त, मुफ्त…

डिसक्लेमर: इस बार किसी को टैग नहीं करूंगा क्योंकि देख रहा हूं आजकल आवाजाही के लोकतंत्र को बड़ी ठेस पहुंच रही है। किसी को दुख पहुंचाने की मेरी कोई मंशा नहीं है। वैसे भी, अपराध से घृणा करो, अपराधी से नहीं- बापू ने कहा था।
प्रतिभाशाली और जनसरोकारी पत्रकार अभिषेक श्रीवास्तव के फेसबुक वॉल से. उपरोक्त स्टेटस पर आए कुछ कमेंट इस प्रकार हैं..
Sanjay Tiwari : नामवर जी बड़ा काम कर रहे हैं. पप्पुओं, लवलियों, और पोन्टियों को साहित्य की सेवा में शामिल कर कहे हैं. साहित्य में पोन्टी की पूंजी और पप्पू के प्रभाव का विरोध बंद करें कॉमरेड लोग……नामवर जी बड़ा काम कर रहे हैं.
Palash Biswas बहुत खूब अभिषेक।आयोजकों से कहो कि डा.अमर्त्य सेन को बुलाकर उनसे संस्कृत में राजेद्र यादव,नामदेव धसाल और ओम प्रकाश बाल्मीकि को श्रदधांजलि दिलवा दें।एबीएआईएसएफ मार्का क्रांति हो जायेगी। अपने वीर भारततलवार जी और मधु किश्वर जी को भी बुला सकते हैं।
Ranjit Verma बहुत भयानक समय आ चुका है। मुक्तिबोध ने जिन आलोचकों, कवियों और बुद्धिजीविओं को रात के अँधेरे में देखा था डोमा उस्ताद के साथ वे सब अब दिन के उजाले में निकल आये हैं।






