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लखनऊ

नितिन गडकरी के लिए क्‍यों अशुभ रहा लखनऊ?

भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन गडकरी का जाना कई सवाल खड़े कर गया। राजनैतिक हालात इतने तेजी से बदले की दूसरी पारी की उम्मीद लगाये बैठे गडकरी को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ गया। वैसे तो गडकरी की शर्मनाक विदाई से उत्तर प्रदेश भाजपा पर कोई खास असर नहीं पड़ेगा, बल्कि राजनाथ सिंह के अध्यक्ष बनने प्रदेश भाजपा को फायदा ही होगा, लेकिन लगता है कि गडकरी को लखनऊ दौरा रास नहीं आया, उनके लखनऊ की सरजमी पर कदम पड़ते ही उनके साथ एक के बाद एक अनहोनी होती गई। 

भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन गडकरी का जाना कई सवाल खड़े कर गया। राजनैतिक हालात इतने तेजी से बदले की दूसरी पारी की उम्मीद लगाये बैठे गडकरी को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ गया। वैसे तो गडकरी की शर्मनाक विदाई से उत्तर प्रदेश भाजपा पर कोई खास असर नहीं पड़ेगा, बल्कि राजनाथ सिंह के अध्यक्ष बनने प्रदेश भाजपा को फायदा ही होगा, लेकिन लगता है कि गडकरी को लखनऊ दौरा रास नहीं आया, उनके लखनऊ की सरजमी पर कदम पड़ते ही उनके साथ एक के बाद एक अनहोनी होती गई। 

जैसे ही वह हवाई अड्डे से बाहर निकले प्रोन्नति में आरक्षण का विरोध कर रहे लोगों ने उन्हें काले झंडे दिखाना शुरू कर दिया, उनसे बचते-बचाते वह अटल शंखनाद रैली में भाग लेने के लिए लखनऊ के झूले लाल पार्क पहुंचे तो वहां उनके स्वागत के लिए बनी फूल माला टूट गई। यह माला लखनऊ के कुछ कार्यकर्ताओं और नेताओं ने उनके स्वागत के लिये बनवाई थी। स्वागताध्यक्ष राम नरायन साहू, राजीव मिश्र, विजय पाठक, मनीष दीक्षित आदि नेता जब नितिन गडकरी के साथ-साथ, भाजपा में लौटे कल्याण सिंह, मुरली मनोहर जोशी और राजनाथ सिंह को माला पहनाने लगे तो उसमें इतने नेताओं ने अपना सिर डाल दिया कि माला ही टूट गई। उसी समय कहा जाने लगा कि माला का टूटना शुभ संकेत नहीं है।
 
उस समय तो इस बात पर किसी ने विशेष ध्यान नहीं दिया, लेकिन इसके बाद तो गडकरी पर मुसीबतों का पहाड़ ही टूट पड़ा। वह लखनऊ से मुम्बई स्वामी विकेकानंद की स्मृति में आयोजित एक समारोह में भाग लेने पहुंचे तो उनका सामना भाजपा के दिग्गज नेता और उनके (नितिन गडकरी) दूसरे कार्यकाल का विरोध कर रहे लाल कृष्ण आडवाणी से हो गया, दोनों की कुर्सी अगल-बगल थी, एक बार दोनों की नजरें भी मिलीं लेकिन गडकरी की बॉडी लैंग्वेज से लग रहा था कि वह आडवाणी के साथ अपने आप को असहज महसूस कर रहे थे। समारोह निपटा भी नहीं था कि गडकरी के ठिकानों पर आयकर विभाग की टीम पहुंच गयी। आयकर अधिकारी नितिन की कम्पनियों में धांधली का पता लगाने के लिए के लिये उनके कम्पनी का सर्वे करने आये थे। मात्र 23 घंटे में हालात इतने खराब हो गये कि उन्हें अध्यक्ष पद से इस्तीफा देना पड़ गया तो राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ को भी गडकरी को अध्यक्ष बनाने की जिद्द छोड़नी पड़ गई।
 
लखनऊ में गडकरी के स्वागत कि लिये आई माला टूटने उन्हें जरूर नुकसान हुआ लेकिन उसी मंच पर मौजूद भाजपा के दिग्गज नेता और पूर्व अध्यक्ष राजनाथ सिंह को इसका बैठे बैठाये फायदा मिल गया। गडकरी के राष्ट्रीय अध्यक्ष की दौड़ से बाहर होते ही संघ की दूसरी पसंद राजनाथ सिंह आगे आ गये। राजनाथ जो लखनऊ के मंच पर अपने भाषण में ‘अटल शंखनाद रैली’ को भाजपा के लिए  टर्निंग प्वाइंट बता रहे थे, उससे भाजपा का कितना भला होगा यह तो कोई नहीं जानता लेकिन राजनाथ के लिये जरूर यह रैली टर्निंग प्वांइट साबित हुई। राजनाथ के निर्विरोध अध्यक्ष चुने जाने से की खबर से

 उत्तर प्रदेश के भाजपा कार्यकर्ताओं में भी खुशी की लहर व्याप्त है। इसका राजनैतिक फायदा भी उत्तर प्रदेश को मिल सकता है।
लेखक अजय कुमार लखनऊ में पदस्थ हैं. वे यूपी के वरिष्ठ पत्रकार हैं. कई अखबारों और पत्रिकाओं में वरिष्ठ पदों पर रह चुके हैं. अजय कुमार वर्तमान में ‘चौथी दुनिया’ और ‘प्रभा साक्षी’ से संबद्ध हैं.
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