वर्दी की आड़ में किसी को डराना धमकाना अब आम बात हो गई है. देश का कोई भी हिस्सा हो और आप कहीं के भी रहने वाले हो आप ऐसी घटनाओं से दो चार ज़रूर हुए होंगे, लेकिन जिस तरह से मुंबई में वर्दी की आड़ में घूसखोरी के दृश्य कैमरों में कैद हुए हैं, वो हमारा हौसला तोड़ने के लिए काफी है. मुंबई पुलिस को देश की अव्वल पुलिस का दर्ज़ा हासिल है..और वक्त वक्त पर मुंबई पुलिस ने ये साबित भी किया है, लेकिन कुछ चुनिंदा पुलिसवालों ने मुंबई पुलिस की साख पर बट्टा लगा दिया है.
पैसों की हवस में अंधे ये पुलिसवाले इंसानी ज़िंदगी को दांव पर लगाते दिख रहे हैं..हालांकि कैमरों में बहुत ही छोटे ओहदे के पुलिसवाले घूसखोरी करते कैद हैं..लेकिन साफ है कि इसके पीछे कई और बड़े चेहरे हैं जो अभी तक बेनकाब नहीं हुए हैं और आगे भी शायद नहीं होंगे, क्योंकि अकसर देखा गया है कि बड़ी मछलियां साफ तौर पर बच जाती हैं. जब भी मैं किसी पुलिसवाले को घूस लेते देखता हूं तो मेरे मन में बस यही सवाल उठता है कि आखिर क्यों ये जनता का सेवा धर्म भूल जाते हैं..क्या इसीलिए लोग वर्दी पहनकर देश सेवा की शपथ लेते हैं ताकि ढलते वक्त के साथ वो पैसा कमाने के लिए हर हथकंडा अपनाएंगे.
हमारे आस पास अपराध का ग्राफ लगातार ही बढ़ता जा रहा है. कहीं बुज़ुर्ग नागरिकों की हत्या हो रही है तो कहीं दिन दहाड़े लूट पाट.. मुंबई में बीते दिनों में इस तरह की वारदातों में लगातार इज़ाफा हुआ है.. पुलिस का भय लगातार कम होता जा रहा है और हो भी क्यों ना जहां पुलिस ही अपराध को बढ़ावा देगी तो अपराध करने वालों का हौसला बढ़ेगा ही..अगर कासिम नाम के शख्स ने कुर्ला नेहरू नगर में चंद पुलिसवालों को बेनकाब नहीं किया होता तो कड़वा सच सामने नहीं आता और अवैध इमारतें बनती रहती. मुंब्रा में मारे गए लोगों से मुझे सहानुभूति है. ठाणे पुलिस ने अवैध इमारतों को तोड़ने का सिलसिला भी जारी रखा है, लेकिन अब हर इंसान को अपनी जिंदगी के बारे में खुद सोचना होगा. नवनिर्मित इमारतों की पड़ताल करनी होगी ताकि आपकी ज़िंदगी खतरे में ना पड़े. अब तो यही समझ लीजिए कि तथाकथित नेता हो या बिल्डर या फिर पुलिसवाले सब हमारी आपकी जान से खिलवाड़ करने पर अमादा हैं..ऐसे में देखना होगा कि आप अपने को कैसे बचाते हैं.
अश्विनी शर्मा
पत्रकार
मुंबई
फेसबुक से साभार.






