कल भड़ास पर नेशनल दुनिया के कर्मियों को तीन महीने से सेलरी न दिए जाने के चलते काली दिवाली होने की आशंका वाली खबर छपी तो इसके फौरन बाद नेशनल दुनिया मैनेजमेंट ने एक महीने की सेलरी सभी इंप्लाइज के बैंक एकाउंट में ट्रांसफर करा दी. नेशनल दुनिया के कई लोगों ने भड़ास को फोन कर खबर छापने और सेलरी दिलाने के लिए दिल से धन्यवाद दिया.
आलोक मेहता ने अपने साथियों की पीड़ा को भले ही भड़ास पर खबर छपने के बाद महसूस किया, पर किया तो और उन्होंने तुरंत सेलरी रिलीज कराने के लिए प्रयास किया जिसमें वो सफल रहे. उम्मीद करते हैं कि आगे भी आलोक जी अपने टीम मेंबर्स को आर्थिक संकट से नहीं जूझने देंगे और बाकी बची दो महीने की सेलरी भी दिला देंगे.
पर हर किसी का भाग्य एक सा नहीं होता. महुआ समूह के मुखिया पीके तिवारी जी की जमानत हुए कई दिन बीत गए और उनके घर में अच्छी खासी दिवाली मनाई जाएगी, लेकिन महुआ के स्ट्रिंगर्स के यहां तो दिवाली काली ही रहेगी. महुआ के समूह संपादक राणा यशवंत अपने स्ट्रिंगरों को उनकी मेहनत की कमाई नहीं दिला पाए हैं और उनके मालिक पीके तिवारी शायद देना ही नहीं चाहते हैं.
स्ट्रिंगरों ने महुआ न्यूज़ लाइन के लिए अपना खून पसीना एक किया और उनकी दिवाली नहीं मन रही है. कारण एक ही है. पिछले दस महीने से भी ज्यादा समय का अब तक भुगतान नहीं हुआ.हर बार यही कहा जाता रहा कि दिवाली से पहले भुगतान हो जायेगा लेकिन नहीं हुआ. महुआ न्यूज़ लाइन के स्ट्रिंगरों का बकाया भुगतान पीके तिवारी और राणा यशवंत कब कराएंगे, ये तो नहीं मालूम. लेकिन अगर दोनों इस दिशा में मिलजुल कर कुछ सोचते हैं और पहल करते हैं तो उन्हें ढेरों मीडियाकर्मियों की दुवाएं मिलेंगी.
अगर आपके संस्थान में भी सेलरी न दी गई है तो भड़ास तक पूरी कथा [email protected] के जरिए लिखकर भेजें.





