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नेशनल दुनिया से डाइरेक्‍टर आलोक मेहता का इस्‍तीफा

वरिष्‍ठ पत्रकार आलोक मेहता आखिरकार नेशनल दुनिया से चले ही गए. प्रबंधन की तरफ से कई बार जाने का इशारा किए जाने के बाद भी आलोक मेहता बड़प्‍पन दिखाते हुए नेशनल दुनिया में टिके हुए थे. लेकिन जब प्रबंधन ने उनके बैठने की जगह पर भी हथौड़ा चलवा दिया तो आलोक मेहता ने अखबार को बाय करना ही बेहतर समझा और इस्‍तीफा देकर चले गए. आलोक मेहता अब किस संस्‍थान से जुड़ेंगे इसकी जानकारी नहीं मिल पाई है.

वरिष्‍ठ पत्रकार आलोक मेहता आखिरकार नेशनल दुनिया से चले ही गए. प्रबंधन की तरफ से कई बार जाने का इशारा किए जाने के बाद भी आलोक मेहता बड़प्‍पन दिखाते हुए नेशनल दुनिया में टिके हुए थे. लेकिन जब प्रबंधन ने उनके बैठने की जगह पर भी हथौड़ा चलवा दिया तो आलोक मेहता ने अखबार को बाय करना ही बेहतर समझा और इस्‍तीफा देकर चले गए. आलोक मेहता अब किस संस्‍थान से जुड़ेंगे इसकी जानकारी नहीं मिल पाई है.

रातोंरात नईदुनिया की जमीन पर नेशनल दुनिया लांच करवाने वाले आलोक मेहता ने अखबार को चमकाने की जगह अपने लोगों को ही चमकाने में अपनी पूरी ऊर्जा खतम कर दी. अखबार लांचिंग के आठ महीने बाद ही प्रबंधन को आलोक मेहता की काम करने की शैली पता चल गई. क्‍यों कि कहीं ना कहीं नईदुनिया के ताबूत में कील ठोंकने का काम मेहता एंड कंपनी ने ही की थी. इसके बाद मालिक शैलेंद्र भदौरिया ने खुद अखबार की कमान अपने हाथ में ले ली. पहले इनको समूह संपादक के पद से हटाकर डाइरेक्‍टर बनाया गया. इसके बाद वरिष्‍ठ पत्रकार प्रदीप सौरभ को संपादक तथा कुमार आनंद को समूह संपादक नियुक्‍त किया गया.

अखबार के प्रिंट लाइन से आलोक मेहता का नाम भी हटाया गया. उनके खास और नजदीकी रहे लोगों में कई को बाहर किया गया तो कई लोगों ने खुद इस्‍तीफा दे दिया. इसके बाद भी आलोक मेहता डाइरेक्‍टर बन कर डंटे रहे और बिना किसी काम के पैसे लेते रहे. कई तरह के इशारा किए जाने के बाद भी जब आलोक मेहता नेशनल दुनिया को अलविदा कहने को तैयार नहीं दिखे तो प्रबंधन ने दूसरा रास्‍ता अपनाया. सूत्रों का कहना है कि प्रबंधन ने उनके चेम्‍बर को दो दिन पहले तोड़वा दिया, उनके बैठने का स्‍थान भी खतम कर दिया गया. यानी जब प्रबंधन की तरफ से बिल्‍कुल आखिरी इशारा कर दिया गया तब जाकर आलोक मेहता ने अखबार प्रबंधन को अपना इस्‍तीफा सौंपा.   

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