कांग्रेस पार्टी के मुखपत्र ''नेशनल हेराल्ड'' अखबार के दोबारा शुरू होने की चर्चाएं समय समय पर उड़ा करती हैं. इन दिनों फिर उड़ रही है. अंदरखाने इस अखबार को शुरू करने की तैयारियां चल रही हैं लेकिन पब्लिकली कांग्रेस नेता अखबार शुरू किए जाने से इनकार कर रहे हैं. इस अखबार को लेकर एक रिपोर्ट इंडिया टुडे में प्रकाशित हुई है जो इस प्रकार है……
जवाहर लाल नेहरू ने 1938 में कांग्रेस का मुखपत्र नेशनल हेराल्ड शुरू किया था, अब उसे दोबारा बाजार में लाने की तैयारी चल रही है. जो कंपनी नेशनल हेराल्ड में नई जान फूंकने के प्रयासों में जुटी है, उसमें सोनिया गांधी और राहुल गांधी मुख्य शेयरधारक हैं. मार्च, 2011 में यंग इंडियन नाम की एक गैर-लाभकारी कंपनी की स्थापना की गई जिसमें कांग्रेस अध्यक्ष और उनके बेटे की 38 फीसदी हिस्सेदारी है. इस कंपनी के गठन का मुख्य उद्देश्य यह था कि यह नेशनल हेराल्ड और इसके उर्दू संस्करण कौमी आवाज के स्वामित्व वाली मूल कंपनी एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (एजेएल) की सारी देनदारी वहन कर ले. इसका सारा खर्च कांग्रेस कोष से हुआ.
दोनों अखबार 1 अप्रैल, 2008 को बंद हुए थे. माना जाता है कि यंग इंडियन ने एक करोड़ रु. की राशि 5-ए, बहादुरशाह जफर मार्ग स्थित अखबार के मुख्यालय, हेराल्ड हाउस, को दुरुस्त करने पर खर्च की. यह राशि भी कांग्रेस से ऋण के तौर पर मिली. इस नई कंपनी में सोनिया और राहुल की कुल हिस्सेधारी 76 फीसदी है जबकि बाकी के शेयर कांग्रेस कोषाध्यक्ष मोतीलाल वोरा और पार्टी महासचिव ऑस्कर फर्नांडीस के पास हैं.
वोरा एजेएल में अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक हैं. यंग इंडियन को कंपनी अधिनियम, 1956 के खंड 25 के तहत पंजीकृत किया गया है. वरिष्ठ पत्रकार सुमन दुबे को नई कंपनी में प्रबंध समिति का सदस्य बनाया गया है. राष्ट्रीय ज्ञान आयोग के अध्यक्ष सैम पित्रोदा भी इस समिति के सदस्य हैं. इस संदर्भ में पूछे जाने पर कांग्रेस प्रवक्ता मनीष तिवारी ने कहा कि उन्हें इस योजना के बारे में कोई जानकारी नहीं है. वोरा और फर्नांडीस से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उनसे बात नहीं हो सकी. राहुल के राजनैतिक सहयोगी कनिष्क सिंह ने कहा, ''यंग इंडियन का अखबार शुरू करने का कोई इरादा नहीं है.''
कंपनी रजिस्ट्रार के पास जमा कागजात में कंपनी ने कहा है, ''कंपनी लोकतांत्रिक और धर्मनिरपेक्ष समाज के आदर्शों के प्रति युवाओं को प्रेरित करने की गतिविधियों से जुड़ी है और अपनी आय या लाभ को वह इसी उद्देश्य में खर्च करती है.'' अखबार इसी उद्देश्य को पूरा करने की कोशिश करेगा!
(इंडिया टुडे में देवेश कुमार की रिपोर्ट)






