Sanjaya Kumar Singh : मुझे लगता है न्यायमूर्ति काटजू बीमार हैं या विदेश में। या फिर मुमकिन है वे भी कहीं पहाड़ पर फंसे हों। मीडिया वालों को इसका पता लगाना चाहिए। कुछ भी बोलकर मीडिया में बने रहने की इच्छा और प्रतिभा रखने वाला वह व्यक्ति इतने मौके यूं ही जाने देगा। मुझे यकीन नहीं हो रहा है। कुछ तो बात है। मीडिया में किस्म – किस्म की रिपोर्टिंग हो रही है कोई आदमी को गधा बना रहा है और अपने गधा होने का सबूत बिना मांगे दे रहा है और ऐसे में मीडिया वालों की योग्यता का रिकार्ड रखने के लिए भी काटजू साब को सामने आना चाहिए। पता नहीं वे यह काम पर्दे के पीछे से तो नहीं कर रहे हैं। वाकई चिन्ता हो रही है।
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Shambhunath Shukla : अरे, अपने जस्टिस मार्कण्डेय काटजू कहां चले गए? आखिर उत्तराखंड की बिपदा प्रेस से भी संबंधित हैं। वह होते तो समझाते कि इस बिपदा का कवरेज कैसे होना चाहिए। आखिर काटजू साहब भी उत्तरापथ के ही पंडित हैं।
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Pankaj Mukaati : इसका मतलब ये है कि – देश चलाने का दंभ भरने वाला वो सारे लोग जो इस वक्त चुप हैं। बीमार है, अक्सर ऐसे मौके पर गायब रहने वाले लोगों की बीमारी का नाम कोई बता सके तो मेहरबानी होगी और दवा खोजने में भी आसानी रहेगी.
एफबी वॉल से.






