मीडिया को सबसे बड़ा खतरा न्यू कन्वर्जेंस से है. जिसके तहत बड़े व्यापारिक घराने मीडिया समूह को खरीद रहे हैं और मीडिया समूह बिजनेस हाउसिस में बदल रहे हैं. बड़े राजनैतिक दल नए-नए अखबार और चैनल की शुरुआत कर रहे हैं. यानी अब मीडिया, कॉरर्पोरेट और राजनैतिक दलों के हित एक हो रहे हैं. यह ‘न्यू कनवर्जेन्स’ सबसे खतरनाक है. क्योंकि कॉरर्पोरेट जगत को सृजनात्मकता अथार्त क्रिएटिविटी से कोई मतलब नहीं. उनका मुख्य उद्देश्य केवल प्राफिट है. पेड न्यूज, प्राइवेट ट्रीटी (निजी समझौते) जैसी प्रवृतियों पहले ही मीडिया की साख को कम कर चुकी हैं.

पी. साईंनाथ
उन्होंने कहा हर मीडिया हाउस अधिक से अधिक प्राइवेट ट्रीटी रखना चाहता है. एक अखबार ने २४० कंपनियों के साथ प्राइवेट ट्रीटी कर रखी है. लेकिन जब शेयर मार्केट गिरने के कारण ऐसी ट्रीटी के चलते मीडिया हाउसिस को नुकसान होता है तो भी वह शेयर समझौते से बंधे होने के कारण खामोश रहता है और यह नहीं कह पाता कि कंपनी के शेयर का मूल्य घट रहा है. नाम लिए बिना उन्होंने बताया कि इस मीडिया हाउस ने अपने यहाँ फतवा ज़ारी कर रखा है कि ‘रिसेशन’ शब्द का इस्तेमाल न करें. केवल ‘स्लो डाउन’ ही लिखें. रिसेशन केवल अमेरिका के लिए लिखें.
श्री साईनाथ के मुताबिक मीडिया हाउस खासकर चैनल बिजनेस लीडर अवार्ड या सेव टाइगर्स जैसे विज्ञापन कैम्पेन चलाने में अधिक दिलचस्पी दिखाते हैं क्योंकि इसमें उन्हें फायदा मिलता है. उन्होंने कहा हर दिन ४७ किसान आत्महत्या करते हैं लेकिन ऐसी स्टोरी कवर करने केवल कुछ पत्रकार पहुँचते हैं. लेकिन स्विट्जर्लैंड दावोस में इंडियन इकोनोमिक फोरम को कवर करने २०० पत्रकार पहुँचते हैं. क्योंकि सीआईआई या हीरो होंडा जैसे ग्रुप इसे प्रायोजित करते हैं. मीडिया हितों के टकराव की बात करता है लेकिन समूचा मीडिया स्वयं हितों के टकराव से जकड़ा हुआ है. उन्होंने कहा यह दौर मीडिया के हायपर कमर्शियलाइजेशन का दौर है. जिस से बचने के लिए कुछ न कुछ नए तरीके ढूँढने होंगे.
मीडिया संवाद से लौटकर वरिष्ठ पत्रकार अन्नू आनंद की रिपोर्ट.
आयोजन की कुछ तस्वीरें–








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