निरूपमा पाठक को आत्महत्या के लिए प्रेरित करने के आरोपी प्रियभांशु ने जेल से बाहर आने के बाद पत्रकारों से कहा कि वह निर्दोष है और निरूपमा को न्याय मिलने तक संघर्ष जारी रखेगा। निरूपमा पाठक का मामला ऑनर किलिंग या आत्महत्या का मामला है, के सवाल पर उसने कहा कि अब मामला न्यायालय में है, इसलिये वह इसपर कुछ नहीं कहना चाहता परन्तु इस मामले में नाहक उसे घसीटा गया है, उसे न्यायालय पर भरोसा है। न्याय जरूर मिलेगा।
अनुसंधान में नहीं हुआ खुलासा : पुलिस अनुसंधान बेमानी साबित हुआ। अनुसंधान में दूध का दूध और पानी का पानी नहीं हो सका। दोनों परिवारों को आरोपी सिद्ध कर पुलिस ने भले हीं अपनी पीठ थपथपा ली है, पर आज भी कई सवालों पर से पर्दा नहीं उठ सका है। कभी हत्या कभी आत्महत्या तो कभी आत्महत्या के लिए उकसाने के चक्रव्यूह में सिमटी रही पुलिस। ठोस नतीजे पर अनुसंधान के दौरान अनुसंधानकर्ता नहीं पहुंच पाया। यही कारण है कि आज भी इस मामले में दुविधा की स्थिति दोनों परिवारों के बीच बनी हुई है। अभी भी इस पूरे मामले का खुलासा होना बाकी है।

कोडरमा जेल से बाहर आने के बाद प्रियभांशु