लखनऊ के राजभवन कालोनी में पत्रकार पंकज वर्मा के साथ कोई मारपीट नहीं हुई. हजरतगंज पुलिस को दी गई शिकायत में मारपीट या बदतमीजी का उल्लेख नहीं है. पंकज वर्मा के करीबी लोगों का कहना है कि राजभवन कालोनी में मौजूद आवासों में तमाम अधिकारी और पत्रकार रहते हैं. इन आवासों में नौकरों के रहने के लिए आउट हाउस बनाए गए हैं, जिनमें तमाम युवा नौकर रहते हैं. सूत्रों का कहना है कि अनेक आवास में रहने वाले नौकरों का एक गिरोह बन गया है, जो देर रात तक हो हल्ला करते रहते हैं. आपस में लड़ते रहते हैं. इनमें से ज्यादातर की उम्र बीस से पचीस साल के बीच है.
बताया जा रहा है कि ऐसे ही नौकरों का समूह कुछ दिन पहले रात साढ़े ग्यारह बजे के आसपास कालोनी में उलझ रहा था. ये लोग काफी शोर मचा रहे थे. वरिष्ठ पत्रकार पंकज वर्मा ऑफिस से घर लौट रहे थे. जब उन्होंने कालोनी में इनको आपस में लड़ते देखा तो चालक से कार रुकवा कर इन लोगों को अलग करवाया तथा डांटा डपटा. इसके बाद इन लोगों ने कहा कि ये लड़ नहीं रहे थे बल्कि एक दूसरे से हंसी-मजाक कर रहे थे.

सूत्रों का कहना है कि इन नौकरों की देर रात तक की जाने वाली इस हरकत से तमाम लोग परेशान हैं लेकिन नौकरों को डांटने पर भाग जाने के डर से ये लोग इनके खिलाफ सख्ती नहीं दिखाते हैं, लिहाजा पंकज वर्मा ने ही इस मामले में संज्ञान लेते हुए इन नौकरों की देर रात शोर और लड़ाई करने की लिखित शिकायत हजरतगंज पुलिस को दी. साथ ही उनसे गुजारिश की कि पुलिस वाले रात में कम से कम एक बार गश्त लगा लिया करें ताकि ऐसी गतिविधियां थोड़ी कम हों. बताया जा रहा है कि इसी मामले को कुछ लोगों ने बढ़ा चढ़ाकर पंकज वर्मा से मारपीट करने की बात बना दी.






