: एक माह से खाली पड़ा है जिलाधिकारी का पद : जेपी ग्रुप के हितपोषक जिलाधिकारी की तलाश : सोनभद्र में एक माह से जिलाधिकारी का पद रिक्त है। जिलाधिकारी की तैनाती न होना अपने आप में इस महत्वपूर्ण जिले के लिए आश्चर्यजनक है। चर्चा है कि जिले को राजधानी के पंचम तल पर बैठे मुख्यमंत्री के विषेश सचिव व सोनभद्र के पूर्व जिलाधिकारी पंधारी यादव की सलाह पर चलाया जा रहा है। वर्तमान में मुख्य विकास अधिकारी शफाकत कमाल प्रभारी जिलाधिकारी का काम देख रहे हैं, लेकिन वह कोई ठोस निर्णय नहीं ले पा रहे हैं। इसके चलते तमाम काम बाधित हैं। घोटालों के बेताज बादशाह के रूप में यह जिला देश में मशहूर हो चुका है।
जिले में मनरेगा में तीन सौ करोड़ का घोटाला तब हुआ जब यहाँ पंधारी यादव जिलाधिकारी थे। छात्र शक्ति कन्ट्रकशन कम्पनी ने अरबों रुपये की सड़कों में तब जमकर घोटाला किया जब यहाँ पंधारी यादव जिलाधिकारी थे। तमाम गावों की सड़कें बनी ही नहीं थीं लेकिन बसपा सरकार के कुछ मंत्रियों को खुश रखने के लिए यादव सड़कों के पूर्ण हो जाने की रिपोर्ट शासन को भेजते रहे ताकि भुगतान होता रहे। आज भी वह सड़कें जिले में मौजूद हैं, जिन पर ६ माह बाद ही चलना मुश्किल हो गया। बसपा सुप्रीमो मायावती के चहेते जेपी को जब वन बंदोबस्त अधिकारी विजय कुमार ने कार्य क्षेत्र से बाहर जाकर हजारों एकड़ वन भूमि सौंप दी तब जिलाधिकारी पंधारी यादव थे। खनन क्षेत्र से जब एमएम ११ का शुल्क २२ हजार की जगह एक लाख पार कर गया तो उस समय भी जिलाधिकारी के रूप में जिले में पंधारी यादव ही मौजूद थे।
घोरावल, राबर्ट्सगंज, तहसीलों में जब सूखा राहत राशि में लाखों का घोटाला हुआ तब जिलाधिकारी के रूप में यहाँ पंधारी यादव मौजूद थे। एक माह से अधिक समय बीत जाने के बाद भी अभी तक किसी जिलाधिकारी की सोनभद्र में तैनाती न होने से चर्चाओं का बाजार गर्म होता जा रहा है। विजय विश्वास पन्त ने जिस तरीके से जिला चलाया उसे लोग भूल नहीं पा रहे हैं। २७ फरवरी को ओबरा के पास हुए खदान हादसे के दोषियों को सजा दिलाने के लिए पन्त ने जो तेवर अपनाया था, उससे सिर्फ खनन माफिया ही नहीं बल्कि कुछ पूर्ववर्ती आला अधिकारी भी अपने को असुरक्षित महसूस कर रहे थे, जिस खदान में हादसा हुआ उसमें लगभग पिछले चार वर्षों से धड़ल्ले से खनन का काम हो रहा था। इस अवैध खनन में पुलिस, कुछ पत्रकार जिला प्रशासन समेत तमाम लोग सक्रिय थे। इसे बढ़ावा देने में पूर्व जिलाधिकारी पंधारी यादव की भूमिका महत्वपूर्ण कही जा रही है।
भाजपा के कार्यवाहक जिलाध्यक्ष धर्मबीर तिवारी का कहना है कि सोनभद्र में जितने भी घोटाले हुए उसमें यादव की प्रमुख भूमिका रही। अब जब घोटालों को लेकर सोनभद्र में माहौल गर्म है तब यहाँ अपने पूर्व के कारनामों को छुपाने की जुगत में वह सभी लोग लग गए हैं जो कहीं न कहीं इसमे शरीक थे। मनरेगा में हुए घोटाले को लेकर केंद्र सरकार के तेवर तीखे हैं, वह सीबीआई जाँच के बहाने बहुजन समाज पार्टी की मुखिया मायावती को घेरना चाहती है। लेकिन सोनभद्र में जब जाँच शुरु होगी तो सबसे पहले पंधारी यादव उसके लपेटे में होगें, क्योंकि उनके ही देख रेख में मनरेगा का काम चल रहा था। अब कुछ लोग जेपी के खिलाफ अपनी कमर कस कर लड़ने को तैयार हो चुके हैं। वहीं अवैध खनन हादसे को लेकर कुछ जन संगठन सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दाखिल करने की तैयारी में जुटे हैं। ऐसे में इस जिले में किसे जिलाधिकारी के रूप में भेजा जाय, जो पूर्व के तमाम कुकृत्यों पर पर्दा डाल सके, उसकी तलाश की जा रही है। सोना उगलने वाले जिले में किसी ऐसे जिलाधिकारी की तैनाती पंचम तल पर बैठे यादव नहीं चाहते, जो भ्रष्टाचार को उजागर करने में सक्रिय हो।
एक माह से अधिक समय बीत जाने के बाद भी जिलाधिकारी की तैनाती न होना अपने आप में सरकार व उसके सलाहकारों की मंशा को साफ जाहिर कर रही है। कांग्रेस के राजेश दुबे का कहना है कि पंचम तल पर बैठे विशेष सचिव पंधारी यादव जैसे लोग न तो सपा के हैं और न बसपा के, ऐसे लोग जेपी जैसे पूंजीपतियों के होते हैं, जो किसी की भी सरकार बने उसमें घुसकर पूंजीपति को लाभ पहुंचाना उनका मुख्य लक्ष्य होता है। ऐसे में जेपी पंचम तल पर बैठे कुछ लोगों की मदद से अपने लिए काम करने वाला जिलाधिकारी लाना चाहता है। महिला जन संगठनों का रुख भी इस मुद्दे पर मुखर है। राष्ट्रीय वन जन श्रम जीवी मंच की संयोजक रोमा का कहना है कि सोनभद्र में आदिवासियों का सर्वाधिक उत्पीड़न भी पंधारी यादव के कार्यकाल में हुआ। वनाधिकार कानून की आड़ में वनवासियों का शोषण किया गया। अधिकार पत्र देने में काफी अनियमितताएं की गई। रोमा का कहना है कि मुख्यमंत्री को सोनभद्र में शीघ्र एक जिलाधिकारी की तैनाती करनी चाहिए नहीं तो सोनभद्र की महिलाएं उस कुर्सी पर काबिज होकर जिला चलाने की मुहीम शुरु करेंगीं।
विजय विनीत
पत्रकार
सोनभद्र, यूपी





