: यह कैसा लोकतंत्र है? चुनाव आयोग मौन : उत्तर भारत में सबसे ज्यादा प्रकाशित होने का दावा करने वाले पंजाब केसरी अखबार में दो दिन पहले दिल्ली के स्थानीय संपादक अश्वनी कुमार की अध्यक्षता में अखबार के संपादकीय विभाग की एक बैठक का आयोजन किया गया। इस बैठक में संस्थान के कार्यकारी अध्यक्ष स्वदेश भूषण जैन भी मौजूद थे। इस मौके पर सारे रिपोर्टरों और डेस्क स्टाफ को ताकीद की गई कि नो पोलिटिकल न्यूज, ओनली पेड न्यूज।
अखबार के संपादकीय विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि बैठक में बताया कि गया कि मुफ्त समाचार केवल अरविंद केजरीवाल और उसकी आप पार्टी के खिलाफ ही जाएंगे। बाकी लोगों से समाचार के एवज में पैसा वसूला जाएगा। इस मौके पर सभी संपादकीय विभाग के लोगों को दिए गए रेट कार्ड के अनुसार, कलर में 10 बाई 8 की न्यूज का रेट 64 हजार और ब्लैक एंड व्हाइट का रेट 52 हजार रुपए रखा गया है। ग्राहक की जरूरत के हिसाब से आधे साइज की खबर आधे दाम में भी छापी जा सकती है।
इस मौके पर संपादकीय विभाग को बताया गया कि अखबार में केवल क्राइम के समाचार जाएंगे। जिन समाचार की प्रकृति राजनीतिक है, उन्हें बिना कीमत वसूले नहीं छापा जाएगा। इसके लिए किसी संपादकीय विभाग के कर्मचारी को उधार में खबर छापने की इजाजत भी नहीं होगी।
बताया गया कि केवल अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी के खिलाफ इसलिए मुफ्त समाचार छापे जा रहे हैं, क्योंकि उनके रोहिणी के उम्मीदवार राजेश गर्ग ने लोकायुक्त के यहां शिकायत करके पंजाब केसरी का सरकारी जमीन से अवैध कब्जा हटवाने का प्रयास किया था। हालांकि वह इसमें पूरी तरह से सफल नहीं हो पाए, लेकिन इससे पंजाब केसरी की पोल पट्टी सारी जनता के सामने सोशल नेटवर्किंग साइट के माध्यम से खुलकर आ गई है।
उल्लेखनीय है कि पिछले करीब एक दशक से पंजाब केसरी, दिल्ली हर बार विधानसभा और निगम चुनावों में इसी प्रकार पेड न्यूज छापता है। उस पैसे का कोई रिकार्ड नहीं रखा जाता। वह शाम को इकट्ठा करके मालिक के पास पहुंचा दिया जाता है। इस तरह से अखबार के मालिक हर चुनाव में कई करोड़ की ब्लैक मनी जमा करते हैं। इस तरह से पंजाब केसरी अखबार वर्तमान मालिक अपने दादाओं के बनाए गए सिद्धांतों की जमकर धज्जियां उड़ा रहे हैं और लोकतंत्र का मखौल करते हुए मोटा माल अंदर कर हैं। (कानाफूसी)
एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.






