पटियाला : पंजाब सरकार के पंचायत विभाग द्वारा केन्द्र सरकार के आर.एन.आई. (अखबार-मैगजीन रजिस्ट्रेशन एक्ट) को दरकिनार किया गया है। पंचायत विभाग द्वारा एक मैगजीन ‘साडे पिंड’ नामक प्रकाशित किया है, जोआर.एन.आई. से रजिस्टर्ड ही नहीं करवाया गया। इस कारण पंचायत विभाग की इस कार्रवाई पर प्रश्नचिन्ह लग गया है तथा निकाले गए इस मैगजीन को गैर-कानूनी माना जा रहा है। प्रकाशित किए गए मैगजीन ‘साडे पिंड’ व कार्यकारी संपादक श्री जगतार सिंह सिद्धू, जिसका सम्पर्क नंबर मैगजीन पर भी दिया हुआ है, ने कहा कि रजिस्ट्रेशन बाद में भी हो सकती है।
जगतार सिंह सिद्धू चंडीगढ़ से प्रकाशित होने वाली एक अखबार में स्टाफ रिपोर्टर भी रह चुका है परंतु वह इस बात का जवाब नहीं दे सके कि यदि नाम ‘साडे पिंड’ किसी अन्य के नाम पर प्रकाशित हो रहा हो तो आप पर कापी राईट एक्ट की धाराएं भी लग सकती हैं। मैगजीन के मुख्य संपादक डा. एस. करुणा राजू हैं। यहां ही बस नहीं इसी तरह डी.सी. पटियाला द्वारा भी अपने संरक्षण में एक मैगजीन बाल प्रीत प्रकाशित किया गया। वह भी आर.एन.आई. से रजिस्टर्ड नहीं करवाया गया। उस बारे डी.सी. पटियाला का फोन नहीं मिला।
कोई भी बिना रजिस्ट्रेशन करवाए अखबार या मैगजीन नहीं प्रकाशित कर सकता : एस.डी.एम. श्री चहल ने कहा कि कोई भी पत्र, अखबार, मैगजीन आदि बिना आर.एन.आई. प्रकाशित नहीं किया जा सकता है। यदि कोई इस तरह करता है तो उसके लिए सजा का प्रावधान है। उसने कहा कि हमारे पास अभी बाल प्रीत की फाइल तक नहीं आई।
अखबार या मैगजीन चलाने के लिए आर.एन.आई. से रजिस्टर्ड करवाना जरूरी : उल्लेखनीय है कि बताना बनता है कि यदि कोई मैगजीन, अखबार छापना चाहता है तो उस द्वारा पहले एक अर्जी अपने दस्तावेज लगा कर एस.डी.एम. को देनी पड़ती है। पूरी पड़ताल के बाद चंडीगढ़ होते हुआ अर्जी सभी कार्रवाइयां पूरी करने के बाद दिल्ली आर.एन.आई. के पास पहुंचती है। यदि कोई अपनी मर्जी से मैगजीन या फिर अखबार प्रकाशित करता है तो उसकी धाराएं अलग लगती हैं और केस दर्ज होते हैं।
जब नाम मिल जाता है तो प्रकाशक एक घोषणा पत्र एस.डी.एम. के पास दाखिल करता है, जिसको एस.डी.एम. मंजूर करता है तो फिर उसकी कापी प्रकाशित की जाती है। प्रकाशित कापी आर.एन.आई. को भेजी जाती है। सभी प्रक्रियाएं पूरी करने के बादही आर.एन.आई. नंबर मिलता है जिस पर सभी ही कार्य करते हैं। (पंजाब केसरी)






