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पटेल सेक्युलर नहीं साम्प्रदायिक थे

आज के कुछ कांग्रेसी नेता सरदार पटेल को सेक्युलर साबित कर रहे हैं जो कि एकदम गलत है, अगर इतिहास देखें तो इस बात का सबूत मिलता है कि पटेल सेक्युलर नही थे. गांधी जी की हत्या के बाद संघ पर प्रतिबंध लगाने से पटेल सेक्युलर नहीं हो गये. केन्द्रिय मंत्रिमंडल और देश के अधिकतर लोगों ने संघ पर पाबंदी लगने की मांग की थी. उस समय पटेल पर ये भी इल्जाम था कि उन्होंने गांधी जी को समुचित सुरक्षा प्रदान नहीं की थी. पटेल ने संघ पर लगी पाबंदी को कुछ दिनों बाद हटा भी लिया था.
आज के कुछ कांग्रेसी नेता सरदार पटेल को सेक्युलर साबित कर रहे हैं जो कि एकदम गलत है, अगर इतिहास देखें तो इस बात का सबूत मिलता है कि पटेल सेक्युलर नही थे. गांधी जी की हत्या के बाद संघ पर प्रतिबंध लगाने से पटेल सेक्युलर नहीं हो गये. केन्द्रिय मंत्रिमंडल और देश के अधिकतर लोगों ने संघ पर पाबंदी लगने की मांग की थी. उस समय पटेल पर ये भी इल्जाम था कि उन्होंने गांधी जी को समुचित सुरक्षा प्रदान नहीं की थी. पटेल ने संघ पर लगी पाबंदी को कुछ दिनों बाद हटा भी लिया था.
 
कुछ दिन पहले ही आडवाणी ने एक किताब का हवाला देते हुआ कहा है कि हैदराबाद पर पुलिस हमला (जो कि फ़ौजी हमला था) के बारे में नेहरू और पटेल में आपस में विवाद था नेहरू फ़ौजी कार्रवाई के विरुद्ध थे जब कि पटेल फ़ौजी कार्रवाई के समर्थन में थे, विवाद इतना बढ़ा कि पटेल मीटिंग से उठ कर चले गये थे, आखिर नेहरू को उनकी बात मांनी पड़ी थी. हैदराबाद राज्य पर हमला किया गया और सुन्दर लाल आयोग के अनुसार इस फ़ौजी हमले में 25-40 हज़ार मुसलमान मारे गये थे. आडवाणी ने सैम मानेक शॉ के एक पुराने इंटरव्यू का हवाला देते हुए कहा कि नेहरू कश्मीर में भी फ़ौजी कर्रवाई के खिलाफ थे.
 
हम सभी जानते हैं कि पटेल साम्प्रदायिक सोच के करण ही संघ के हीरो हैं. संघ परिवार उन पर फक़्र करता है और उन्हें हिन्दुत्व का नेता मानता है. नेहरू की मुखालफत के बाद भी पटेल ने सोमनाथ मंदिर को बनवाया. नेहरू जागीरदारी खत्म करना चाहते थे जब कि पटेल पूंजीवाद को आगे लाना चाहते थे. नेहरू अमन शान्ति और जनतांत्रिक तरीकों पर यकीन रखते थे जबकि पटेल उग्र विचार और डिक्टेटर वाली सोच रखते थे नेहरू सेक्युलर थे जबकि पटेल सेक्युलर नही थे. कांग्रेस में भी बहुत से नेताओं की सोच साम्प्रदायिक थी और उसमें एक ग्रुप था खरे, डॉक्टर संजय, केएम मुंशी, लाजपत राय आदि का जो कि पटेल के समर्थक थे. अबुल कलाम आज़ाद ने अपनी किताब इंडिया विन्स फ्रीडम में लिखा है कि कांग्रेस में साम्प्रदायिक सोच वाले नेताओं के करण मुसलमानों का कांग्रेस से मोहभंग होने लगा था और मुसलमान कांग्रेस छोड़ रहे थे.
 
मौलाना अबुल कलम आज़ाद ने अपनी किताब इंडिया विन्स फ्रीडम के पृष्ट 215-217 पर लिखते हैं कि ''मैं, नेहरू और पटेल, गांधी जी के पस बैठे हुए थे, नेहरू ने गांधी जी से कहा के दिल्ली में मुसलमान बिल्ली कुत्ते की तरह मारे जा रहे हैं और मैं चाह कर भी उन्हें नहीं बचा पा रहा हूं तो पटेल ने कहा कि नेहरू गलत बोल रहे हैं सिर्फ 1-2 इस तरह की घटनायें हुई हैं बाकी शान्ति है तो गांधी जी ने कहा के पटेल मैं चीन में नहीं दिल्ली में ही हूं और अपने आंखो से देख रहा हूं और तुम कहते हो कि कुछ नही हो रहा है.''
 
एक और घटना जो कि पृष्ट 214-215 पर लिखी है जिससे पटेल की साम्प्रदायिक सोच बेनक़ाब होती है. ''पटेल ने गांधी जी को बताया कि दिल्ली में मुसलमानों के घर से खतरनाक हथियार मिले हैं जो कि हिन्दू और सिखों की हत्या करने के लिये जमा किये गये हैं. हथियार को जब्त कर लिया गया है और उसे गवर्नमेंट हाउस में रखा गया है. सुबह जब हम मीटिंग मे गये और जब्त हथियार को देखने के लिये गये तो टेबल पर दर्जनों सब्जी काटने वाली चाक़ू, जेबी चाकू, हथौड़ी छेनी आदि और कुछ कील जब्त किये गये थे. लॉर्ड माउंट बेटेन ने दो चाकू उठा कर मुस्कराते हुए कहा के पटेल इससे मुसलमान हमला करेंगे. आपकी सोच पर हमे हंसी आती है. ऐसी बहुत से घटनायें हैं जो हमें बताती हैं के पटेल सेक्युलर नहीं थे और उनकी सोच सम्प्रदायिक थी.
 

लेखक अफ़ज़ल ख़ान का जन्म समस्तीपुर, बिहार में हुआ. वर्ष 2000 में अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से एमबीए की पढ़ाई कंप्लीट की. इन दिनों दुबई की एक कंपनी में मैनेजर की पोस्ट पर कार्यरत हैं. 2005 से एक उर्दू साहित्यिक पत्रिका 'कसौटी जदीद' का संपादन कर रहे हैं. संपर्क: 00971-55-9909671 और  [email protected] के जरिए.


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