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पत्रकारिता के छात्र ने मांगी जानकारी, कुलसचिव ने शुरू कर दी मारामारी

: रायपुर के अनुसूचित जाति थाने में दिया तहरीर : डा. अम्‍बेडकर अस्‍पताल में चल रहा है इलाज : कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्‍वविद्यालय, रायपुर से पीएचडी कर रहे छात्र कमल ज्‍योति जाहिरे को आरटीआई के तहत सूचना मांगना महंगा पड़ गया. यूनिवर्सिटी के कई वरिष्‍ठ पदस्‍थ लोगों ने सूचना मांगे जाने से नाराज होकर कमल की जमकर पिटाई की तथा गाली-ग्‍लौज, जाति सूचक शब्‍दों का प्रयोग करते हुए जान से मारने की धमकी भी दी. कमल ने इस संबंध में रायपुर के अनुसूचित जाति थाने में एक लिखित तहरीर दी है. कमल का इलाज रायपुर के डा. भीमराव अम्‍बेडकर अस्‍पताल के ट्रामा सेंटर में चल रहा है.

: रायपुर के अनुसूचित जाति थाने में दिया तहरीर : डा. अम्‍बेडकर अस्‍पताल में चल रहा है इलाज : कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्‍वविद्यालय, रायपुर से पीएचडी कर रहे छात्र कमल ज्‍योति जाहिरे को आरटीआई के तहत सूचना मांगना महंगा पड़ गया. यूनिवर्सिटी के कई वरिष्‍ठ पदस्‍थ लोगों ने सूचना मांगे जाने से नाराज होकर कमल की जमकर पिटाई की तथा गाली-ग्‍लौज, जाति सूचक शब्‍दों का प्रयोग करते हुए जान से मारने की धमकी भी दी. कमल ने इस संबंध में रायपुर के अनुसूचित जाति थाने में एक लिखित तहरीर दी है. कमल का इलाज रायपुर के डा. भीमराव अम्‍बेडकर अस्‍पताल के ट्रामा सेंटर में चल रहा है.

कमल ज्‍योति का कहना है कि विश्‍वविद्यालय में व्‍याप्‍त गड़बडि़यों के खिलाफ वो लगातार आवाज उठाते रहे हैं. कई बार उन्‍होंने आरटीआई के तहत जानकारी लेकर गड़बडि़यों को सुधरवाने की कोशिश की है. इस बार भी वो 23 नवम्‍बर को टेलीफोन बिल संबंधी जानकारी के लिए आरटीआई लगाने कुलपति के कार्यालय गए हुए थे. उन्‍होंने जब आरटीआई देकर उसकी पावती देने का अनुरोध किया तो कुलसचिव डीएन वर्मा, उप कुलसचिव संजय शर्मा एवं कर्मचारी आकाश चंद्रवंशी ने उन्‍हें हड़काने की कोशिश की. जब वे पावती लेने की बात कहने लगे तो उन्‍हें इन लोगों ने गाली देते हुए तीन-चार चाटा मारा. इसके बाद एक कमरे में ले जाकर इन लोगों ने लात-घूंसों से पिटाई की तथा जाति सूचक शब्‍दों का इस्‍तेमाल किया.

कमल का कहना है कि ये लोग शुरू से ही उनका उत्‍पीड़न करते आ रहे हैं. जब मैं छात्रावास में खुद खाना बनाकर खाता था तब इनलोगों ने नोटिस निकालकर छात्रावास में खाना बनाने पर पाबंदी लगा दी. जब मैंने इन लोगों से खाना बनाने के लिए अलग से कमरा देने का निवेदन किया तो उस पर कोई सुनवाई नहीं की गई. कमल कहते हैं कि वो गरीब परिवार से आते हैं लिहाजा उनके लिए खाने पर हर महीने मेस का अठारह सौ रुपया दे पाना संभव नहीं है. इसके बाद भी कुलसचिव की तरफ से इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं की गई. अब जब मैंने जनसूचना अधिकार के तहत जानकारी मांगी तो मेरे साथ मारपीट की गई.

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