इसे विडंम्बना ही नहीं तो और क्या कहेंगे कि एक ओर जहां 30 मई को समूचे देश में पत्रकारों और इनके विभिन्न संगठनों द्वारा जहां हिन्दी पत्रकारिता दिवस मनाए जाने के साथ इस दिवस की उपयोगिता और पत्रकारों की सार्थकता आदि पर बढ़-चढ़ कर विचार प्रकट किए जा रहे थे। वहीं मीरजापुर जिले में, जिसका पत्रकारिता के क्षेत्र में एक अहम स्थान माना जाता है, में भी विभिन्न पत्रकार संगठनों द्वारा इस दिवस को मनाए जाने के साथ एकजुटता और सम्मान, सुरक्षा की बात की जा रही थी तो दूसरी तरफ मीरजापुर के ही प्रेस क्लब के कार्यक्रम में कई पत्रकारों को अपने ही आयोजक पत्रकार द्वारा अपमानित होना पड़ा। जिसकी पीड़ा को अपमानित पत्रकार न कह पा रहे हैं और न ही सुना पा रहे हैं।
हुआ यूं कि प्रेस क्लब मीरजापुर के तत्वाधान में नगर के लालडिग्गी स्थित लायंस स्कूल में 30 मई को रात्रि में कार्यक्रम आयोजित किया गया था, जिसमें भोजन की भी व्यवस्था की गई थी। इसके लिए बाकायदा सभी पत्रकारों को आमंत्रित तो किया ही गया था, इस पेशे से दूर के लोगों को भी बुलाया गया था। इस कार्यक्रम में द पायनियर दिल्ली के एसोसिएट एडिटर सिद्धार्थ मिश्र, गोरखपुर के वरिष्ठ पत्रकार विनय मिश्र आदि और भी कई पत्रकारों को बुलाया गया था अथिति के रूप में। लिहाजा रात्रि में अखबार के कार्यालय बंद हो जाने के बाद पत्रकारों का जुटना शुरू हो गया था। कार्यक्रम के समापन पर कई लोगों को फाइल दिया गया। इसके बाद भोजन की बारी आयी तो बात बिगड़ उठी जब कार्यक्रम के स्वयंभू आयोजक बन बैठे अमरेश मिश्र, जो कि मीरजापुर जनपद से द पायनियर के पत्रकार हैं, ने इसे अपना निजी कार्यक्रम मान कर कुछ पत्रकारों और अखबार के कार्यालयों में काम करने वाले रिर्पोटरों के हाथ से न केवल भोजन की थाली झपट कर छीन ली बल्कि परिचय पूछने लगे कि तुम कौन हो और किसने बुलाया था?
बस फिर क्या था यह देखते ही कार्यक्रम आए हुए काफी लोग अपने को अपमानित और ठगा सा महसूस करते हुए न केवल खाना चाए बगैर वापस लौटने लगे, वरन कुछ लोगों ने तो हाथ में भोजन की थाली लेने के बाद भी थाली रखकर चलते बने। मजे की बात है कि इन्हीं अमरेश मिश्र द्वारा कुछ कलमकारों के हाथों से फाइल भी छिन ली गई। और ऐस लोगों को फाइल दिया गया जो उनको फंड देते हैं। ऐसे में यह कार्यकम पत्रकारों का दिवस न होकर उन्हें अपमानित करने का दिवस बन कर रह गया। बताते चले कि पत्रकारिता दिवस की आड़ में इस संगठन द्वारा न केवल लाखों की रकम बटोर ली गई थी, बल्कि सबकुछ अपने हाथ में लेकर अन्य पत्रकारों को इससे दूर रखा गया था, जिसकी चर्चा पहले से ही थी। बताते चले कि पत्रकारिता के नाम पर दूसरे कई काम किए जाने वाले इस पत्रकार को कई बार सार्वजनिक रूप से अपमानित भी होना पड़ा है।
पत्रकारों की पत्रकारिता दिवस अवसर पर हुई इस गत को लेकर जहां चर्चाओं का बाजार गर्म है वहीं अपमानित पत्रकारों के आंखों में खून के आंसू देखे जा रहे हैं। इस संदर्भ में जब अमरेश मिश्र से बात की गई तो उनका कहना था कि जो सदस्य नहीं थे उनको हमने नहीं बुलाया था। हमने सेमिनार के लिए बुलाया था खाने के लिए नहीं, इसके बाद भी ये लोग चले आए। भोजन केवल अतिथियों के लिए था। भोजन के लिए किसी को नहीं बुलाया गया था। कार्यक्रम के बाद गेट बंद कर दिया गया था। इसके बाद अगर किसी को परेशानी हुई है तो अलग बात है। किसी पत्रकार के हाथ से थाली नहीं छीना गया, ये सरासर गलत है।





