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पत्रकारों की जंग का अखाड़ा बन गया यूपी मान्‍यता प्राप्‍त संवाददाता समिति चुनाव

लखनऊ में राज्य स्तर मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति का चुनाव अब पत्रकारों के लिए जंग का अखाडा बन गया हैं. पिछली समिति अपनी नई नियमावली को आधार बना कर इसी नियमावली पर चुनाव कराने को आमादा है तो अधिकांश पत्रकार इस नियमावली का विरोध कर रहे हैं. इस धड़ेबाजी के चलते जहाँ पत्रकारों की जंग बढ़ती  जा रही है वहीं कुछ वरिष्‍ठ  पत्रकार इस लड़ाई से बहुत दुखी हैं. यह लोग चाह रहे हैं कि सभी पत्रकारों की एक बैठक बुलाई जाये जिसमें इन सारे विवादों को रख कर उस पर चर्चा हो, मगर यह हो पायेगा इसकी उम्मीद नहीं लगती. अब बड़ी संख्या में पत्रकारों ने तय किया है कि अगर एक सप्ताह के भीतर मौजूदा समिति जनरल बॉडी की बैठक बुला कर चुनाव का ऐलान नहीं करती तो बाकी पत्रकार खुद ही जीबीएम बुला कर चुनाव कराने की घोषणा कर देंगे.

लखनऊ में राज्य स्तर मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति का चुनाव अब पत्रकारों के लिए जंग का अखाडा बन गया हैं. पिछली समिति अपनी नई नियमावली को आधार बना कर इसी नियमावली पर चुनाव कराने को आमादा है तो अधिकांश पत्रकार इस नियमावली का विरोध कर रहे हैं. इस धड़ेबाजी के चलते जहाँ पत्रकारों की जंग बढ़ती  जा रही है वहीं कुछ वरिष्‍ठ  पत्रकार इस लड़ाई से बहुत दुखी हैं. यह लोग चाह रहे हैं कि सभी पत्रकारों की एक बैठक बुलाई जाये जिसमें इन सारे विवादों को रख कर उस पर चर्चा हो, मगर यह हो पायेगा इसकी उम्मीद नहीं लगती. अब बड़ी संख्या में पत्रकारों ने तय किया है कि अगर एक सप्ताह के भीतर मौजूदा समिति जनरल बॉडी की बैठक बुला कर चुनाव का ऐलान नहीं करती तो बाकी पत्रकार खुद ही जीबीएम बुला कर चुनाव कराने की घोषणा कर देंगे.

दरसअल पिछली समिति का सारा विवाद इस बात को लेकर है कि चाहे कोई भी अध्यक्ष बन जाये, मगर हेमंत तिवारी को अध्यक्ष नहीं बनना चहिये. वह ऐसा करके हेमंत से अपना पुराना हिसाब साफ़ करना चाहते हैं. पिछले चुनाव में ग्यारह पत्रकारों को यह कह कर वोट नहीं डालने दिया गया कि यह हेमंत तिवारी के समर्थक हैं. वोट ना डालने देने से नाराज इन ग्यारह पत्रकारों ने प्रमुख सचिव सूचना से इस कमेटी को मान्यता ना देने की बात कही. दो सालों में सरकारी स्तर पर इस कमेटी को शासन स्तर पर कोई भाव नहीं दिया गया. इसके बाद दो साल पूरे होने पर इसी कमेटी के अध्यक्ष हिसाम सिद्दीकी ने बैठक बुलाई. इसमें सर्व सम्मति से अजय कुमार, गोलेश तथा सर्वेश कुमार को चुनाव अधिकारी घोषित करके चुनाव कराने की मांग  पास कर दी गई. चुनाव प्रक्रिया शुरू होते होते सभी को अहसास हो गया कि हेमंत तिवारी भारी मतों से चुनाव जीत जायेंगे. हिसाम खेमे में इसको लेकर मायूसी छाई हुई थी. इसका कारण था कि बड़ी संख्या में इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के लोग हेमंत का समर्थन कर रहे थे.

इसके बाद रामदत्त त्रिपाठी ने इसकी काट ढूंढी. उन्होंने कहा कि जो नियमावली उन्होंने बनाई है उसके आधार पर ही चुनाव करवा दिया जाये तो हेमंत खेमा या तो जीत नहीं पायेगा. अगर जीत भी गया तो उसे उलझा दिया जायेगा. इस नियमावली में शर्त रखी गई थी कि चुनाव लड़ने वाले लोग कम से कम स्नातक हो. ऐसा होने पर बड़ी संख्या में फोटोग्राफर और कैमरा सेक्‍शन में काम करने वाले बाहर हो जायेंगे जो हेमंत का साथ दे रहे हैं. पर इससे सच्चे जैसे कम पढ़े-लिखे लोग भड़क गए. एनेक्सी में पत्रकारों के बीच खूब गर्मागर्मी हुई. इससे पहले इसी नियमावली को आधार बना कर चुनाव कराने से मना करने पर हिसाम टीम ने अजय कुमार पर आरोप लगाये, जिससे आहात होकर उनकी टीम ने इस्तीफ़ा दे दिया और किशोर निगम को चुनाव अधिकारी बना दिया गया.

हेमंत तिवारी समर्थकों ने किशोर निगम से कहा कि वह पुरानी नियमावली के आधार पर ही चुनाव करवाएं. इस पर निगम ने कहा कि अगर एक तिहाई लोग यह बात लिख कर दे दें तो वह ऐसा कर लेंगे. इस पर एक तिहाई से अधिक लगभग एक सौ तीन पत्रकारों ने यह लिख कर दे दिया. इसके बाद जब मौजूदा कमेटी को लगा कि अब फिर उनका पलड़ा हल्का है तो उन लोगों ने यह लिखवाना शुरू कर दिया कि यह चुनाव आपसी मतभेद पैदा कर रहे हैं इसलिए यह चुनाव ना करवाए जायें. इन सब विवादों के बीच किशोर निगम ने भी चुनाव करवाने में असमर्थता जताते हुए कहा कि इन विवादों के चलते बेहतर होगा कि सभी पत्रकारों की जनरल बॉडी मीटिंग बुला ली जाये..अब देखना यह है कि यह विवाद खत्म होता है या नहीं.

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