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पत्रकारों के खिलाफ तो पोस्टर चिपकने लगे, पर्चे बंटने लगे, देखें महाराष्ट्र का हाल

पत्रकारों के खिलाफ पोस्टर चिपकने लगे हैं, जैसे नेताओं के खिलाफ चिपकते थे. लगातार धंधेबाज हो रही पत्रकारिता के कारण आम लोगों का भरोसा पत्रकारों से उसी तरह उठ गया है जैसे पुलिस व वकीलों से उठ चुका है. यही कारण है कि कई बार लोग सबक सिखाने के लिए पोस्टर वगैरह भी चिपका देते हैं. महाराष्ट्र में पत्रकारिता के व्यवसायीकरण के कारण पत्रकारों पर आए दिन हमले होते रहते हैं.

पत्रकारों के खिलाफ पोस्टर चिपकने लगे हैं, जैसे नेताओं के खिलाफ चिपकते थे. लगातार धंधेबाज हो रही पत्रकारिता के कारण आम लोगों का भरोसा पत्रकारों से उसी तरह उठ गया है जैसे पुलिस व वकीलों से उठ चुका है. यही कारण है कि कई बार लोग सबक सिखाने के लिए पोस्टर वगैरह भी चिपका देते हैं. महाराष्ट्र में पत्रकारिता के व्यवसायीकरण के कारण पत्रकारों पर आए दिन हमले होते रहते हैं.

पत्रकार जब विज्ञापन के नाम पर पैसे मांगेंगे और विज्ञापन न मिलने पर खिलाफ खबर चला देंगे तो ऐसे में सामने वाला कई बार पत्रकार को सबक सिखाने के लिए मजबूर हो जाता है. यही कारण है कि महाराष्ट्र में राजनेता, माफिया और अन्य लोग गाहे-बगाहे पत्रकारों पर हमले करते रहते हैं. एक तरफ पत्रकारों पर हमले हो रहे हैं तो दूसरी तरफ पत्रकारों से विलचित कुछ लोग पत्रकारों को बदनाम करने के लिए इनके विरोध में पोस्टर चिपका रहे हैं. महाराष्ट्र के कई हिस्सों में पत्रकारों के उपर एफआईआर दाखिल किए जा रहे हैं. इससे पत्रकार काफी दिक्कत में हैं.

चंद्रपूर के एक नेता ने तो अलग ही फंडा अपनाया है. उसने कुछ पत्रकारों के विरोध में शहर के विभिन्न भागों मे बड़े बड़े पोस्टर लगाकर पत्रकारों के विरोध में मोर्चा ही खोल दिया है. आश्चर्य की बात यह है कि महापालिका ने बैनर लगाने की भी अनुमती दी है. बताया जाता है कि इसमें जिस प्रकाशक का नाम प्रसिद्ध किया गया है वह फर्जी है. बताया जाता है कि इस नाम का कोई आदमी चंद्रपूर में है ही नहीं. इस घटना से चंद्रपूर के पत्रकार काफी क्रोधित हैं. चंद्रपूर जिला मराठी पत्रकार संघ तथा चंद्रपूर श्रमिक पत्रकार संघ की और से इस घटना की निंदा की गई है. पत्रकार हल्ला विरोधी कृती समिती ने भी आरआर पाटील से निवेदन करके इस पोस्टरबाजी के पीछे के दिमाग को तलाश कर उसे दंडित करने का निवेदन किया है.

इधर पुना के पास आलंदी में सकाल के पत्रकार के विरोध में गांव के स्थानीय नेता ने पत्रक गांव में वितरित किया है. इसका भी विरोध पुना जिला मराठी पत्रकार संघ के अध्यक्ष शरद पाबळे ने किया है. इस प्रकार की बढती घटना रोकने के लिए शीघ्र उपाय करने की मांग की जा रही है.

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