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पत्रकारों के लिए इंसान की जान से ज्‍यादा जरूरी खबर होती है!

: एक तस्वीर ने रातों-रात चर्चित कर दिया चीनी पत्रकार को : अगर कोई पत्रकार किसी संवेदनशील मामले की रिपोर्टिंग कर रहा हो, तो उसकी पहली जिम्मेदारी क्या बनती है? घटना को कवर करना या मौका-ए-वारदात पर जरूरतमंद की मदद करना? ये एक ऐसा प्रश्न है जिसका जवाब हर इंसान की नज़र में अलग-अलग हो सकता है। एक ऐसा ही वाकया 23 वर्षीय चीनी पत्रकार काओ आइवेन की ज़िंदगी में घटित हुआ, जिसने उसे सोचने पर मजबूर कर दिया।

: एक तस्वीर ने रातों-रात चर्चित कर दिया चीनी पत्रकार को : अगर कोई पत्रकार किसी संवेदनशील मामले की रिपोर्टिंग कर रहा हो, तो उसकी पहली जिम्मेदारी क्या बनती है? घटना को कवर करना या मौका-ए-वारदात पर जरूरतमंद की मदद करना? ये एक ऐसा प्रश्न है जिसका जवाब हर इंसान की नज़र में अलग-अलग हो सकता है। एक ऐसा ही वाकया 23 वर्षीय चीनी पत्रकार काओ आइवेन की ज़िंदगी में घटित हुआ, जिसने उसे सोचने पर मजबूर कर दिया।

चीन के हेनान टीवी में पत्रकार काओ आइवेन को 10 जुलाई 2006 को फोन के जरिए येलो नदीं में एक लड़की के डूबने की सूचना मिली। लड़की खेलते हुए नदी में गिर गई थी। काओ इस उम्मीद के साथ घटनास्थल पर पहुंच गई कि उसे एक अच्छी स्टोरी मिले सकेगी। घटनास्थल पर पहुंची काओ ने देखा कि प्रत्यक्षदर्शियों ने लड़की को नदी से बाहर निकाल लिया है और वे उसकी जान बचाने के लिए फेफड़ों में से पानी निकालने की कोशिश कर रहे हैं। चूंकि काओ के माता-पिता डॉक्टर थे, इसलिए उसे प्राथमिक चिकित्सा की थोड़ी बहुत जानकारी थी। काओ ने मेडिकल सर्विस को बुलाने के लिए 120 नंबर पर फोन कर दिया।

हालांकि लोग लड़की के फेफड़ों से पानी बाहर निकालने की कोशिश तो कर रहे थे, लेकिन कोई भी उसे मुंह से सांस नहीं दे रहा था। काओ ने यह देखा और लड़की को तब तक मुंह से सांस देने की कोशिश की, जब तक ऐंबुलेंस नहीं आ गई। लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी और लड़की की मौत हो गई। यह देखकर काओ वहीं रोने लगी। चीनी मीडिया में रोती हुई काओ की तस्वीर प्रकाशित की गई और कई इंटरनेट वेबसाइट्स पर इस मामले को लेकर बहस भी छिड़ी। काओ की तस्वीर सबसे पहले प्रकाशित करने वाली चीनी वेबसाइट www.hnby.com.cn पर सभी टिप्पणियां काओ के समर्थन में आई। सिवाय एक कमेंट के, जिसमें लिखा था "अधिकतर पत्रकारों के लिए इंसान की जान से ज्यादा खबर ज़रूरी होती है। काओ सम्मान की अधिकारी होती, अगर वो बच्ची की जान बचा पाती।"

हालांकि काओ इस घटना में कोई भी स्टोरी नहीं ला पाई थी, लेकिन फिर भी उसकी समाचार एजेंसी द्वारा प्रोत्साहन के तौर पर 1,000 युआन का पुरस्कार दिया गया। पक्ष और विपक्ष में मिली कई टिप्पणियों के बावजूद काओ के दिमाग में ज़िंदगी बचाने वाली टिप्पणी ही घूम रही थी। बाद में काओ ने यह कहा भी कि उसे खबर का केंद्र नहीं बनाना चाहिए था, जबकि किसी इंसान की जान जा चुकी थी। इस मामले में काओ ने कहा "मुझे लड़की की जान न बचा पाने का बेहद अफसोस है, लेकिन मैंने अपनी तरफ से पूरी कोशिश की थी। अब मैं प्राथमिक चिकित्सा के बारे में पूरी जानकारी ले रही हूं। शायद मैं प्राथमिक चिकित्सा की जानकारी का इस्तेमाल उस वक़्त अच्छी तरह कर सकूं, जब मेरी ज़िंदगी ख़तरे में हो।" साभार : भास्‍कर

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