जालौन में भयादोहन के मामले में पुलिस के द्वारा लगभग पचास पत्रकारों पर फर्जी मुकदमा दर्ज किये जाने पर पत्रकारों में रोष बढ़ता जा रहा है। ये मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है जिसके विरोध में सोमवार को उरई में सैकड़ों पत्रकारों ने इकट्ठा होकर पुलिस के खिलाफ प्रदर्शन किया और झूठा फंसाए जाने के खिलाफ जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा। गौरतलब है कि 21 जून को गुटखा व्यापारी संजय गुप्ता ने अपने बच्चों को ट्यूशन पढ़ाने वाली शिक्षिका के साथ दुष्कर्म के मामले में सरेंडर किया था। इसमें उरई कोतवाली में मुकदमा भी दर्ज कराया गया था। लेकिन उरई पुलिस गुटखा व्यापारी को शुरू से ही बचाने में लगी थी, परन्तु मीडिया में कवरेज के चलते पुलिस व्यापारी को बचा नहीं पाई।
चार जुलाई को आरोपी संजय गुप्ता ने उरई कोर्ट में आत्म समर्पण कर दिया था, जिसका कवरेज करने के लिए पत्रकार भी पहुंचे थे। लेकिन व्यापारी के समर्थकों ने कवरेज कर रहे पत्रकारों के साथ पुलिस की मौजूदगी में ही हमला कर दिया था, जिससे गुस्साए पत्रकारों ने कोतवाली में मामला भी दर्ज कराया था। लेकिन उरई कोतवाली के इंस्पेक्टर ने स्वार्थ सिद्धि के चलते गुटखा व्यापारी के समर्थकों के पक्ष में इलेक्ट्रानिक और प्रिंट मीडिया के बारह नामजद एवं 30 अज्ञात पत्रकारों के खिलाफ भयादोहन का झूठा मुकदमा लिख दिया था। जिसके चलते पत्रकारों में आक्रोश भड़क गया है।
आज सैकड़ों पत्रकारों ने उरई स्थित गांधी चबूतरा पर इकट्ठा होकर जिलाधिकारी कार्यालय तक प्रदर्शन किया और पुलिस विरोधी नारे भी लगाए। पत्रकारों ने जिलाधिकारी जालौन मनीषा त्रिघटिया को पुलिस द्वारा झूठा फंसाए जाने की शिकायत की और मांग की कि झूठा मुकदमा लिखने वाले भ्रष्ट कोतवाल को निलम्बित कर झूठा मुकदमा लिखाने वाले दबंग व्यापारी समर्थकों पर कड़ी करवाई की जाए और पत्रकारों पर दर्ज झूठा मुकदमा ख़त्म किया जाए। जिलाधिकारी ने पत्रकारों को उचित कारवाई करने का आश्वासन दिया है। वहीं पत्रकारों का कहना है कि अगर प्रशासन कार्रवाई नहीं करता है तो आगामी ग्यारह जुलाई से जिलाधिकारी कार्यालय परिसर में क्रमिक धरना दिया जाएगा।
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