विवादित संत आशाराम के समर्थकों ने मीडिया पर हमला करके यह जता दिया कि उन्हें लोकतान्त्रिक व्यवस्था पर विश्वास नहीं है. इंदौर और फिर जयपुर में मीडियाकर्मियों से मारपीट ने आशा राम के नाम के साथ एक और विवाद जोड़ दिया है. पत्रकारों पर हो रहे इन हमलों से गुस्साए वाराणसी के मीडिया कर्मियों ने रोड मार्च निकाला. ये मार्च इलेक्ट्रानिक मीडिया एसोशियेशन के बैनर तले रविदास गेट से काशी हिन्दू विश्वविध्यालय सिंह द्वार तक पहुचने के बाद पुनः रविदास गेट पर समाप्त हुआ।
मार्च में बड़ी संख्या में मीडिया कर्मियों ने अपनी आवाज़ बुलंद करते हुए हाथों में तख्तियां लेकर मीडिया पर हमला कायरता है, दमन हमें बर्दाश्त नहीं सच दिखाना-अधिकार हमारा, मीडिया पर हमला बंद करो आदि स्लोगन लिखित तख्तियां हाथों में लेकर अपनी आवाज़ बुलंद की. प्रदर्शनकारियों ने कहा कि मीडिया पर हमला अब और नहीं सहा जाएगा और इस तरह के कुत्सित विचार धारा के लोगों का मुह तोड़ ज़वाब दिया जाएगा.
प्रदर्शन कर रहे पत्रकारों की मांग थी कि मीडिया पर इस तरह के हमले बंद किये जाएं. साथ ही पत्रकारों ने सरकार से यह मांग भी की है कि मीडिया कर्मियों को सुरक्षा प्रदान की जाये. मीडिया कर्मियों के इस आन्दोलन में वहाँ से गुजर रहे छात्रों ने भी अपना पुरजोर समर्थन दिया. इस रोड मार्च में DEN काशी, एस टीवी, के टीवी, सिटी केबल, इंडिया न्यूज़, महुआ न्यूज़, आखों देखी, साधना न्यूज़, सहारा टीवी, जी न्यूज़, सी न्यूज़, पी 7 न्यूज़, न्यूज़ एक्सप्रेस, अनोखी खबर, लाईव वी एन एस पोर्टल मीडिया संस्थानों के प्रतिनिधि मौजूद थे.