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पत्रकार कंचना स्मृति व्याख्यानमाला में संसद की गिरती साख पर चिंतन का लंबा दौर चला

दिवंगत पत्रकार कंचना की स्मृति में आयोजित नौवी कंचना स्मृति न्यास के तत्वाधान में आयोजित व्याखानमाला में विषय प्रवेश करते हुए पत्रकार अरविन्द सिंह ने कंचना की ओजपूर्ण पत्रकारिता पर प्रकाश डाला एवं कंचना के दस वर्षीय पत्रकारीय जीवन के बारे में बताया. ओजस्वी कंचना सिफर से शिखर सफ़र तय की थी. कार्यक्रम का आयोजन दिल्ली में गांधी शांति प्रतिष्ठान में किया गया था.

दिवंगत पत्रकार कंचना की स्मृति में आयोजित नौवी कंचना स्मृति न्यास के तत्वाधान में आयोजित व्याखानमाला में विषय प्रवेश करते हुए पत्रकार अरविन्द सिंह ने कंचना की ओजपूर्ण पत्रकारिता पर प्रकाश डाला एवं कंचना के दस वर्षीय पत्रकारीय जीवन के बारे में बताया. ओजस्वी कंचना सिफर से शिखर सफ़र तय की थी. कार्यक्रम का आयोजन दिल्ली में गांधी शांति प्रतिष्ठान में किया गया था.

कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के तौर पर श्री बलराम जाखड़ (पूर्व लोकसभा अध्यक्ष) ने संसद की गिरती गरिमा और संसदीय लोकतंत्र प्रणाली में आई गिरावट पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए आम आदमी को उसके मताधिकार में सावधानी बरतने की ओर इशारा किया. श्री जाखड़ ने आगे बताया कि देश संसद पर आधारित है एवं देश की तरक्की के लिए संसदीय लोक तंत्र प्रणाली का मजबूत होना नितांत आवश्यक है. डा जाखड़ ने संसद में बौद्धिक बहस का वर्तमान परिपेक्ष में घोर अभाव बताया. भारत में लोकतंत्र को बचाने के लिए पक्ष और विपक्ष दोनों का अहम् मसले पर बहस करना जरूरी है ताकि  सकारत्मक चितन से समाज का सृजनात्मक विकास हो सके. इतना ही नहीं उन्होंने बताया कि भारत में संसदीय लोकतंत्र प्रणाली में आयी गिरावट के लिए देश का नागरिक भी जिम्मेवार है. इसलिए यह नितांत महत्वपूर्ण है कि आम जनता अपने प्रतिनिधि चुनने  में पूरी सावधानी एवं सजगता अपनाए.

व्याख्यानमाला में श्री के रहमान खान (पूर्व उप सभापति -राज्यसभा) ने कहा कि संसदीय लोकतंत्र ख़त्म नहीं हुआ है बल्कि इसमें गिरावट जरुर आयी है इसके पीछे छिपा मूल कारण राजनीतिज्ञों का संसद को तवज्जो नहीं देना है. इन्होने निर्वाचन प्रणाली में सुधार लाने पर बल दिया. श्री खान ने बताया कि संसद को मजबूत करने के लिए राजनितिक दलों  की सबसे अहम भूमिका होनी चाहिए. संसद में होने वाली बहस आजकल टेलीविजन में देखने को मिलते है जो गंभीर चिंता का विषय है. मसलन संसद के भीतर चर्चा कम, बाहर टीवी पर बौद्धिक बहस ज्यादा देखने को मिलती है.

सीके जैन ( पूर्व महासचिव -लोकसभा ) ने संसद की कार्यवाही में सरकार के साथ साथ विपक्ष की महत्वपूर्ण भूमिका पर बल दिया. इन्होने बताया कि चाहे जनता कितनी भी आशावादी हो जाए संसदीय लोकतंत्र का इस देश में कोई विकल्प नहीं है.   कार्यक्रम का मंच संचालन टीवी पत्रकार अजय झा ने किया. धन्यवाद ज्ञापन राकेश कुमार सिंह ने किया. इस अवसर पर न्यास के अध्यक्ष एवं वरिष्ठ पत्रकार श्री राम बहादुर राय, प्रबंध न्यासी श्री अवधेश कुमार, श्री अच्युता नंदन मिश्र आदि गणमान्य लोग उपस्थित थे.

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