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पत्रकार कुंवर प्रसून के बहाने मुद्दों की पड़ताल

जाने माने पत्रकार सामाजिक कार्यकर्ता कुंवर प्रसून की छठीं पुण्य तिथि पर प्रोग्रेसिव जर्नलिस्ट यूनियन द्वारा एक विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। उत्तराखण्ड के जाने माने सामाजिक आंदोलनकर्ता तथा प्रखर लेखनी वाले कुंवर प्रसून किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। उनका देहांत 2006 साल के 15 जुलाई की रात को हुआ था। उत्तराखंड के जौनसार बावर से वेश्यावृत्ति के लिए ले जाई जा रही महिलाओं की मुक्ति का सवाल हो या फिर उसी इलाके में अफीम की खेती को नेताओं के संरंक्षण को सवाल। चाहे बात अवैज्ञानिक व घातक खनन की हो या फिर बीजों को बचाने का आंदोलन।

जाने माने पत्रकार सामाजिक कार्यकर्ता कुंवर प्रसून की छठीं पुण्य तिथि पर प्रोग्रेसिव जर्नलिस्ट यूनियन द्वारा एक विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। उत्तराखण्ड के जाने माने सामाजिक आंदोलनकर्ता तथा प्रखर लेखनी वाले कुंवर प्रसून किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। उनका देहांत 2006 साल के 15 जुलाई की रात को हुआ था। उत्तराखंड के जौनसार बावर से वेश्यावृत्ति के लिए ले जाई जा रही महिलाओं की मुक्ति का सवाल हो या फिर उसी इलाके में अफीम की खेती को नेताओं के संरंक्षण को सवाल। चाहे बात अवैज्ञानिक व घातक खनन की हो या फिर बीजों को बचाने का आंदोलन।

कुंवर प्रसून ने हर आंदोलन में जनपक्षरता के साथ संघर्षों को लड़ने और जीतने का नया ही मंत्र दिया। अपने सामाजिक सरोकारों को तिलांजलि देने की होड़ कर रही पत्रकारिता के इस दौर में ‘‘कुंवर प्रसून के बहाने’’ पत्रकार बिरादरी को उसकी जिम्मेदारियों की याद दिलाने में यह कार्यक्रम सफल रहा। इस गोष्ठी में बात रखते हुए दैनिक जागरण के वरिष्ठ पत्रकार शंकर सिंह भाटिया ने राज्य की वर्तमान दुर्दशा का चित्रण किया। वरिष्ठ पत्रकार जय सिंह रावत ने याद दिलाया कि मीडिया आज कैसे बाजार की गिरफ्त में आ चुका है। राजीव नयन बहुगुणा ने कुंवर प्रसून के चिंतन और तेवरों की वर्तमान समय में प्रासंगिकता को समझाते हुए बताया कि कैसे छोटा राज्य लूट की मंडी में तब्दील हो चुका है। उन्होंने पत्रकारिता में भाषा की समस्या को रेखांकित किया। युगवाणी के संपादक संजय कोठियाल ने विस्तार से कुंवर प्रसून के आंदोलनों को वर्तमान समय में उसके मौजूं होने पर जोर दिया।

सोमवारी लाल उनियाल ने प्रसून के साथ अपने संस्मरण सुनाते हुए युवाओं को आगे आ कर कुंवर प्रसून की थाती को आगे ले जाने का आह्वान किया। युवा पत्रकार योगेश भट्ट ने सत्ता और मीडिया के गठजोड़ पर बात की तो पर्वत जन के संपादक शिव प्रसाद सेमवाल कुंवर प्रसून द्वारा लिखित समाचारों के माध्यम से उनकी लेखनी की झलक दिखाई। वयोवृद्ध पत्रकार राधाकृष्ण कुकरेती ने युवाओं का प्रोत्साहन करते हुए नई पत्रकारिता को विकसित करने पर जोर दिया। प्रोग्रेसिव जर्नलिस्ट यूनियन के अध्यक्ष प्रवीन कुमार भट्ट ने बताया कि किन परिस्थितियों में यह पत्रकार संगठन गठित किया गया। जनकवि अतुल शर्मा द्वारा किया गया कविता पाठ और अंत में राजीव नयन बहुगुणा द्वारा फैज अहमद फैज की लिखी नज्म सुना कर गोष्ठी में नया जोश भर दिया।

इस विचार गोष्ठी में प्रेम पंचोली, उत्तरांचल श्रमजीवी पत्रकार यूनियन के जिला अध्यक्ष चंद्रवीर गायत्री, विवेक खंडूड़ी, जावेद, सुनीता भट्ट, मीना नेगी, सुप्रिया रतूड़ी, ऊषा रावत, भास्कर उप्रेती, गजेन्द्र रावत, अरण्य रंजन, रमेश कुडियाल, ललित भट्ट, गौरव प्रजापति, शक्ति सिंह, नवीन भारद्वाज, दीपक सती, रॉबिन, राकेश खंडूड़ी, राजीव कोठारी इत्यादि ने शिरकत की। सभा का संचालन कमल भट्ट ने किया।

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