उमरिया। पत्रकार चंद्रिका राय की परिवार सहित हुई हत्या की जांच के लिये गठित भारतीय प्रेस परिषद की जांच समिति ने रविवार को घटनास्थल का दौरा कर विभिन्न पक्षों से बात कर मामले से जुड़े साक्ष्य एकत्र किये। जांच समिति ने पत्रकारों से चर्चा में राय हत्याकाण्ड की न सिर्फ निंदा की अपितु जांच पर गंभीर सवाल खड़े किये। भारतीय प्रेस परिषद के वरिष्ठ सदस्य के. अमरनाथ की अध्यक्षता में गठित इस तीन सदस्यीय जांच समिति में राजीव रंजननाग और कल्याण बरूआ शामिल थे।
जांच समिति के नोडल ऑफीसर प्रदीप बहल भी इस दौरान साथ रहे। जांच समिति ने घटनास्थल का गहन निरीक्षण करने के उपरांत पत्रकारों, अधिकारियों एवं मृतक के परिजनों से भेंटकर घटना के संबंध में विस्तृत चर्चा की। जांच समिति दोपहर उमरिया पहुंची और लगभग 5 घंटे तक अलग-अलग स्त्रोतों से जानकारियां एकत्र की। भारतीय प्रेस परिषद की जांच समिति के सदस्य राजीव रंजन नाग ने पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि वे मीडिया की आजादी के लिये हैं और पत्रकारों के साथ हैं। श्री रंजन ने कहा कि वे पत्रकार चंद्रिका राय की परिवार सहित हुई हत्या की भर्त्सना करते हैं और यह जताने के लिये आये हैं कि प्रेस परिषद पत्रकारों के ऊपर हो रहे हमलों के प्रति गंभीर है।
उन्होंने कहा कि पत्रकार अपने संविधान प्रदत्त अधिकारों का खुलकर उपयोग करें। प्रेस परिषद यह देखने के लिये ही है कि प्रेस की आजादी का कहीं उल्लंघन तो नहीं हो रहा। पत्रकारों को दबाने एवं उनके बीच दहशत पैदा करने की कोशिश तो नहीं की जा रही। श्री रंजन ने पत्रकारों से कहा कि वे अपना मनोबल ऊंचा रखे और लोकहित में बिना डरे-बिना झुके खबरों का प्रकाशन करें। उनके ऊपर कोई भी किसी भी प्रकार का दबाव डालने की कोशिश कर रहा है तो वे प्रेस परिषद को लिखें। उन्होंने राय हत्याकाण्ड की गलत जांच के कारण जनमानस में पत्रकार चंद्रिका राय एवं पत्रकारीय प्रोफेशन के बारे में जनता के बीच जो धारणा बनी उसे भी जांच के दायरे में रखा है और उसे जांच रिपोर्ट में शामिल करेंगे।

पत्रकारों ने की सीबीआई जांच की मांग : भारतीय प्रेस परिषद की जांच समिति से मिलकर जिले के पत्रकार प्रतिनिधि मंडल ने चंद्रिका राय हत्याकाण्ड के संबंध में कई अहम जानकारियां दी। पत्रकार प्रतिनिधि मण्डल ने जांच समिति को 5 सूत्रीय ज्ञापन देकर हत्याकाण्ड की सीबीआई से जांच कराने की मांग किया। पत्रकार प्रतिनिधि मंडल ने कहा कि हत्या की प्रकृति को देखते हुए इसकी गहन जांच अवश्यक थी। बावजूद इसके पूरी जांच प्रारंभ से ही दिग्भ्रिमित रही। यही वजह है कि जांच प्रक्रिया पर सवाल खड़े करते हुए पत्रकार प्रतिनिधि मंडल ने पांच बिंदुओं पर, जिसमें मामले की सीबीआई से जांच कराने के अलावा हत्या के आरोपी चालक सुरेश यादव का नार्को एवं ब्रेन मैपिंग टेस्ट कराये जाने तथा इस बात का पता लगाने की मांग शामिल है, कि आखिर क्या वजह थी कि पुलिस ने इस हत्याकाण्ड को अपहरणकाण्ड से जोडऩे की कोशिश की?
पत्रकार प्रतिनिधि मंडल ने यह मांग भी किया कि एसटीएफ ने हत्याकाण्ड की जांच में कितने लोगों से पूछताछ की एवं पूछताछ के दौरान कितने लोगों के साथ थर्ड डिग्री प्रयोग में लाया। ज्ञापन में पत्रकार प्रतिनिधि मंडल ने प्रिंट एवं इलेक्ट्रानिक मीडिया द्वारा हत्याकाण्ड की तथ्यहीन, भ्रामक एवं गैरजिम्मेदार रिपोर्टिंग की जांच एवं ऐसे मामलों की रिपोर्टिंग के लिए जरूरी दिशा-निर्देश जारी करने की मांग भी किया।
मृतक के भाई ने सौंपा ज्ञापन : मृतक पत्रकार चंद्रिका राय के अनुज मिथिलेश राय ने भारतीय प्रेस परिषद की जांच समिति को ज्ञापन देकर हत्याकाण्ड की पुलिसिया जांच के प्रति असंतोष व्यक्त करते हुए मामले की जांच सीबीआई से कराये जाने की मांग की है। मिथिलेश ने कहा कि इस सामूहिक हत्याकाण्ड एवं हत्याकाण्ड की प्रारंभिक जांच से उन्हें जिस पीड़ा अपमान एवं जहालत का सामना करना पड़ा है, उससे उबर पाना उनके लिये संभव नहीं। श्री राय ने कहा कि उन्हें नहीं लगता कि राज्य की पुलिस सच को सामने लाना चाहती है। इसीलिए वे चाहते हैं कि इस मामले को केन्द्रीय जांच ब्यूरो को सौंपा जाये।
''पत्रकार राय हत्याकाण्ड की जांच जिन आड़े-टेढ़े रास्तों से गुजरते हुए ड्राइवर के ऊपर केन्द्रित हुई है और इस दौरान जिस तरह पुलिस के परस्पर विरोधाभाषी बयान आये हैं, वे जांच प्रक्रिया पर सवाल खड़े करते हैं। हमने सभी पहलुओं पर जिला प्रशासन एवं पुलिस प्रशासन से बात की है। अगले दिन भोपाल में गृहमंत्री एवं गृह सचिव से भी चर्चा करेंगे एवं इस संबंध में उठे सवालों से उन्हें अवगत करायेंगे।'' – के. अमरनाथ, प्रमुख, जांच समिति, भारतीय प्रेस परिषद
''मध्यप्रदेश एवं छत्तीसगढ़ में बीते दिनों हुई पत्रकारों की यह तीसरी हत्या है। 1 मार्च को रीवा में भी एक पत्रकार की हत्या हो गई। पत्रकारों के मामले में राज्य एवं केन्द्र की कोई भी जांच एजेंसी गंभीर नहीं है। पत्रकारों के हमले के मामलों में जान-बूझकर जांच को लंबा खींचा जाता है ताकि घटना के साक्ष्य समाप्त हो जायें और आरोपी साफ-साफ बच निकलें। पत्रकारों के विरुद्ध हिंसा चिंताजनक है इसके लिए प्रेस परिषद को ठोस कदम उठाने होंगे।'' – हबीब खान, ब्यूरो चीफ, यू.एन.आई., बिलासपुर (छ.ग.)
उमरिया से संतोष कुमार द्विवेदी की रिपोर्ट.






